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डाटा गोपनीयता दिवस पर झारखंड में जागरूकता की जरूरत, सुरक्षित डाटा से ही सुरक्षित भविष्य

#गढ़वा #डाटा_गोपनीयता : डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा को लेकर नागरिकों को सतर्क रहने का संदेश।

हर वर्ष 28 जनवरी को मनाया जाने वाला डाटा गोपनीयता दिवस डिजिटल युग में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। झारखंड सहित पूरे देश में बढ़ते ऑनलाइन लेनदेन और डिजिटल सेवाओं के बीच साइबर अपराध की आशंका भी बढ़ी है। इस दिवस का उद्देश्य आम नागरिकों को डाटा सुरक्षा, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और साइबर ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सही जानकारी ही डिजिटल सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है।

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  • 28 जनवरी को विश्वभर में मनाया जाता है डाटा गोपनीयता दिवस
  • मोबाइल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और ई-कॉमर्स से जुड़ा डाटा सबसे अधिक जोखिम में।
  • ओटीपी, यूपीआई पिन और एटीएम पिन साझा करना साइबर ठगी का मुख्य कारण।
  • ग्रामीण इलाकों में एटीएम बदलकर ठगी के मामले सामने आए हैं।
  • बैंक मित्र और विशेषज्ञ लगातार सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

डिजिटल तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही डाटा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग, सरकारी पोर्टल और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से हर व्यक्ति का निजी डाटा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। डाटा गोपनीयता दिवस इसी खतरे की ओर ध्यान आकर्षित करता है और लोगों को यह याद दिलाता है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान का कारण बन सकती है।

डिजिटल युग में डाटा गोपनीयता का महत्व

आज के समय में आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड, फोटो, मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी जैसी संवेदनशील सूचनाएं डिजिटल माध्यमों से जुड़ी हैं। यदि यह जानकारी गलत हाथों में चली जाए तो पहचान की चोरी, बैंक खाते से पैसे निकल जाना और फर्जी लेनदेन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डाटा गोपनीयता अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी बन चुकी है।

साइबर अपराध के बढ़ते मामले

झारखंड के कई जिलों से साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग ओटीपी, यूपीआई पिन या एटीएम पिन हासिल कर लोगों की गाढ़ी कमाई चंद मिनटों में साफ कर देते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं और बुजुर्ग अधिक शिकार बन रहे हैं। कई मामलों में एटीएम के पास मदद के बहाने कार्ड बदल दिए जाने की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं।

बैंक मित्र और विशेषज्ञों की सलाह

गढ़वा जिले में कार्यरत पीएनबी बैंक मित्र अविनाश कुमार ने डाटा सुरक्षा को लेकर लोगों को सख्त चेतावनी दी।

अविनाश कुमार ने कहा: “ओटीपी और यूपीआई पिन को हमेशा गुप्त रखें, इसे किसी को न बताएं और न ही कहीं लिखकर रखें।”

उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी फॉर्म के साथ आधार कार्ड की कॉपी जमा करते समय उस पर स्पष्ट रूप से लिखें कि यह किस उद्देश्य के लिए दी जा रही है, ताकि दुरुपयोग की संभावना कम हो सके। उन्होंने बताया कि कई लोग एटीएम कवर में ही पिन लिखकर रख लेते हैं, जो अत्यंत जोखिम भरा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता की जरूरत

ग्रामीण इलाकों में आज भी कई महिलाएं एटीएम से पैसे निकालने में असहज महसूस करती हैं और अनजान लोगों से मदद मांग लेती हैं। कुछ मामलों में ठगों ने इसी का फायदा उठाकर एटीएम कार्ड बदल दिए और बाद में खाते से पैसे निकाल लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि एटीएम या बैंकिंग से जुड़ा कोई भी काम स्वयं करें या केवल भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लें।

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साइबर अपराध से बचाव के मुख्य उपाय

डाटा गोपनीयता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने कुछ बुनियादी लेकिन प्रभावी उपाय सुझाए हैं। मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग, अनजान लिंक और कॉल से दूरी, सार्वजनिक वाई-फाई पर ऑनलाइन बैंकिंग से बचाव, और मोबाइल व कंप्यूटर में नियमित सुरक्षा अपडेट बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को डिजिटल साक्षरता के प्रति जागरूक करना भी समय की मांग है।

सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की जिम्मेदारी

इंटरनेट ज्ञान और सुविधाओं का बड़ा माध्यम है, लेकिन बिना सावधानी इसका उपयोग खतरे में डाल सकता है। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से पहले सोच-विचार करना, फर्जी वेबसाइट और ऐप्स से दूर रहना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करना जरूरी है। साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस की सहायता से कई मामलों में समय रहते नुकसान रोका जा सकता है।

न्यूज़ देखो: डिजिटल सुरक्षा की असली परीक्षा

डाटा गोपनीयता दिवस केवल एक प्रतीकात्मक दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह खबर बताती है कि तकनीक जितनी तेज़ी से बढ़ रही है, सुरक्षा उतनी ही मजबूत करनी होगी। सरकार और बैंकिंग संस्थान लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आम नागरिक की सतर्कता सबसे अहम कड़ी है। सवाल यह है कि क्या हम अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर बड़े साइबर खतरे को रोकने के लिए तैयार हैं? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग नागरिक ही सुरक्षित डिजिटल समाज की नींव

डिजिटल भारत की सफलता तभी संभव है जब हर नागरिक अपने डाटा की सुरक्षा को गंभीरता से ले। छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। आज जरूरत है कि हम स्वयं भी सीखें और दूसरों को भी जागरूक करें। अपने ओटीपी, पिन और निजी जानकारी को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और सुरक्षित डिजिटल भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

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