
#सिमडेगा #सरसआजीविकामेला : राष्ट्रीय मंच पर झारखंड की महिला समूहों ने उत्पादों से पहचान बनाई।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर में आयोजित सरस आजीविका मेले में झारखंड की महिला स्वयं सहायता समूहों ने अपने हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 8 से 18 जनवरी तक आयोजित इस मेले में झारखंड के विभिन्न जिलों की महिलाएं अपने उत्पादों के साथ राष्ट्रीय बाजार में मौजूद हैं। पलाश और आदिवा ब्रांड के माध्यम से महिलाओं ने न केवल बिक्री की, बल्कि राज्य की पहचान भी मजबूत की। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- गुंटूर सरस आजीविका मेला का आयोजन 8 से 18 जनवरी 2026 तक।
- झारखंड की महिला समूहों ने पलाश और आदिवा ब्रांड से उत्पाद प्रदर्शित किए।
- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मेले का उद्घाटन किया।
- सिमडेगा, दुमका और गोड्डा जिलों के उत्पादों को विशेष सराहना।
- देशभर के 24 राज्यों के 320 स्टॉल मेले में शामिल।
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित सरस आजीविका मेला हर वर्ष देशभर की महिला स्वयं सहायता समूहों को एक साझा राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। इस वर्ष वर्ष की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर में आयोजित इस मेले में झारखंड की महिलाओं ने अपनी उपस्थिति से खास पहचान बनाई है। सिमडेगा, दुमका और गोड्डा जिलों से पहुंची महिला समूहों की दीदियों ने अपने उत्पादों के माध्यम से यह साबित किया कि ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता और बाजार की समझ में किसी से पीछे नहीं हैं।
सरस आजीविका मेला: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय अवसर
सरस आजीविका मेला ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय बाजार उपलब्ध कराना है। इस मंच के माध्यम से महिलाएं सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ती हैं और अपने उत्पादों की गुणवत्ता, स्वाद और पारंपरिक पहचान को देशभर में पहुंचाती हैं।
इस वर्ष गुंटूर में आयोजित मेले में झारखंड की महिलाओं ने पलाश और आदिवा जैसे ब्रांड के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री की। यह न केवल आर्थिक लाभ का अवसर है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी बढ़ाता है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का संदेश
मेले का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा: “महिलाएं बचत और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा देखना गर्व की बात है।”
उनका यह वक्तव्य इस बात को रेखांकित करता है कि स्वयं सहायता समूह केवल आय का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन चुके हैं।
सिमडेगा जिले के उत्पादों की खास पहचान
झारखंड के सिमडेगा जिले से कोलेबिरा प्रखंड की मां बाघचंडी आजीविका समूह ने पलाश ब्रांड के तहत अपने उत्पाद प्रस्तुत किए हैं। इन उत्पादों में रागी लड्डू, रागी मिक्सचर, तिल लड्डू, रागी आटा और पापड़ शामिल हैं।
इन खाद्य उत्पादों की खासियत उनका पारंपरिक स्वाद, पोषण मूल्य और शुद्धता है। मेले में आए लोगों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की है और बड़ी संख्या में खरीदारी भी की जा रही है। यह सिमडेगा जिले की महिलाओं की कार्यकुशलता और उद्यमशील सोच को दर्शाता है।
दुमका जिले के पारंपरिक आभूषण बने आकर्षण
दुमका जिले से आई वर्षा आजीविका समूह की दीदियों ने आदिवा ब्रांड के तहत झारखंड के पारंपरिक हस्तनिर्मित आभूषण प्रदर्शित किए हैं। ये आभूषण पारंपरिक डिज़ाइन और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं, जिन्हें हर आयु वर्ग की महिलाएं पसंद कर रही हैं।
इन आभूषणों के माध्यम से झारखंड की जनजातीय संस्कृति और शिल्पकला को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। यह सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के साथ-साथ महिलाओं के लिए आय का स्थायी साधन भी बन रहा है।
गोड्डा जिले का तसर सिल्क बना खास आकर्षण
गोड्डा जिले की रिमझिम आजीविका समूह द्वारा प्रदर्शित तसर सिल्क की साड़ियाँ, सूट पीस और दुपट्टे भी मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। तसर सिल्क की प्राकृतिक चमक, गुणवत्ता और पारंपरिक डिज़ाइन ने खरीदारों को खासा प्रभावित किया है।
तसर सिल्क झारखंड की पहचान मानी जाती है, और इस मेले के माध्यम से यह उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रहा है, जिससे बुनकर महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।
24 राज्यों की सहभागिता से सजा विशाल मेला
गुंटूर सरस आजीविका मेले में झारखंड सहित देश के 24 राज्यों के कुल 320 स्टॉल लगाए गए हैं। यह मेला केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी मंच बन गया है। मेले में सांस्कृतिक कला मंच, बच्चों के लिए झूले और फूड कोर्ट की व्यवस्था की गई है, जिससे यह आयोजन परिवारों के लिए आकर्षक बन गया है।
इस तरह के आयोजन ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को नई दिशा देते हैं।
न्यूज़ देखो: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
गुंटूर सरस आजीविका मेला यह दिखाता है कि जब महिलाओं को सही मंच और अवसर मिलता है, तो वे अपनी पहचान खुद बना सकती हैं। झारखंड की महिला समूहों की भागीदारी राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर पेश करती है। यह पहल सरकार की योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभाव को भी दर्शाती है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऐसे आयोजनों से महिलाओं को दीर्घकालिक बाजार कैसे मिलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जब हुनर को मंच मिलता है, तब आत्मनिर्भरता जन्म लेती है
झारखंड की महिलाएं आज केवल उत्पाद बेचने नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान बना रही हैं। सरस आजीविका मेला जैसे आयोजन यह साबित करते हैं कि ग्रामीण भारत की महिलाएं देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकती हैं।





