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मनरेगा घोटाले पर झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव का बड़ा हमला, एसीबी और ईडी जांच की मांग से लातेहार में राजनीतिक हलचल

#लातेहार #मनरेगा_घोटाला : प्रेस वार्ता में सौरभ श्रीवास्तव ने लगाए गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग।

लातेहार में मनरेगा से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को लेकर झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता कर बड़ा हमला बोला। उन्होंने जिले सहित राज्य स्तर पर करोड़ों रुपये के घोटाले का दावा करते हुए एसीबी और ईडी से जांच की मांग की। सर्किट हाउस में आयोजित इस वार्ता में कई पंचायतों और व्यक्तियों के नाम लेते हुए गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। झामुमो नेता ने कहा कि अबुआ सरकार मनरेगा को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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  • लातेहार सर्किट हाउस में आयोजित हुई प्रेस वार्ता।
  • सौरभ श्रीवास्तव ने मनरेगा में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
  • 302 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का किया दावा।
  • एसीबी और ईडी से जांच की मांग।
  • कई पंचायतों और लाभुकों के नाम लेकर उठाए सवाल।

अबुआ सरकार में मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किए जाने की बात कहते हुए सामाजिक कार्यकर्ता एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता सौरभ श्रीवास्तव ने लातेहार में आयोजित प्रेस वार्ता के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाए। शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस, लातेहार में आयोजित इस प्रेस वार्ता में उन्होंने जिले के साथ-साथ राज्य स्तर पर मनरेगा में व्याप्त कथित अनियमितताओं का विस्तार से जिक्र किया।

मनरेगा में भ्रष्टाचार पर झामुमो का कड़ा रुख

सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली अबुआ सरकार मनरेगा को पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और इसके लिए अधिकारियों व मनरेगा कर्मियों को ईमानदारी से कार्य करना होगा।

सौरभ श्रीवास्तव ने कहा: “अबुआ सरकार में मनरेगा जैसी योजना में भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई तय है।”

उन्होंने मकर संक्रांति के अवसर पर भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि लातेहार में आयोजित यह प्रेस वार्ता इस बात का प्रमाण है कि सरकार खुद पारदर्शिता के पक्ष में खड़ी है।

302 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा

प्रेस वार्ता के दौरान सौरभ श्रीवास्तव ने दावा किया कि उनके संज्ञान में आया है कि राज्य के 55 जिलों में करीब 302 करोड़ रुपये का बड़ा मनरेगा घोटाला सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

उन्होंने लातेहार जिले की मोंगर एवं सीसी पंचायत का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां 600 टीसीबी योजनाएं स्वीकृत थीं, लेकिन इनमें से 10 प्रतिशत भी पूरी नहीं हो सकी। इसके बावजूद कई योजनाओं में भूमिहीनों के नाम पर राशि की निकासी कर ली गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

संदिग्ध लाभुकों और फर्जी भुगतान का आरोप

सौरभ श्रीवास्तव ने गारू प्रखंड के कूटाम पंचायत का उल्लेख करते हुए कहा कि कामिल हुसैन, सोमन प्रवीण, मासूम प्रवीण सहित कई ऐसे लोगों के नाम मनरेगा लाभुक सूची में दर्ज पाए गए हैं, जिनकी पात्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा से जुड़े संविदा कर्मियों एवं अन्य संबंधित लोगों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि देखी जा रही है, जो भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है।

जेल में बंद व्यक्ति के नाम पर भुगतान का दावा

एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि सीसी पंचायत में सोनू कुमार, जो पिछले वर्ष मई से जुलाई तक जेल में बंद थे, उनके नाम पर भी मनरेगा की राशि की निकासी की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

चंदवा प्रखंड में फर्जी खातों का आरोप

सौरभ श्रीवास्तव ने चंदवा प्रखंड का भी जिक्र करते हुए बताया कि वहां के डाकघरकर्मी मनीष कुमार पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मनोज चौधरी द्वारा उपायुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया गया था। पत्र में कहा गया था कि मनोज मुंडा, सोमा मुंडा एवं तारा देवी के नाम से फर्जी खाते खोलकर मनरेगा की राशि की निकासी की गई।

वेंडरों पर भी उठे सवाल

मनरेगा वेंडरों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में कई ऐसे वेंडर पंजीकृत हैं, जिनके पास न तो दुकान है और न ही कोई स्टॉक, फिर भी फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी वे जल्द ही एसीबी से जांच की मांग करेंगे।

आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी

उन्होंने जानकारी दी कि फर्जी जॉब कार्ड, बिचौलियों की सक्रियता और योजनाओं का धरातल पर नहीं उतरना मनरेगा की सबसे बड़ी समस्या है। इसे लेकर उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत उपविकास आयुक्त एवं सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों से मनरेगा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं मांगी हैं।

सौरभ श्रीवास्तव ने कहा: “सूचनाएं मिलने के बाद पुनः प्रेस वार्ता कर तथ्य सामने लाए जाएंगे और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास होगा।”

गरीब और आदिवासी परिवारों तक लाभ पहुंचाने का दावा

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि झामुमो की पूरी टीम यह सुनिश्चित करेगी कि लातेहार जिले के जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और आदिवासी परिवारों तक मनरेगा योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे।

न्यूज़ देखो: मनरेगा में पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा

न्यूज़ देखो: आरोपों की जांच से तय होगी व्यवस्था की साख

लातेहार में मनरेगा को लेकर झामुमो नेता द्वारा लगाए गए आरोप प्रशासन और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती हैं। यदि एसीबी और ईडी जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि जांच प्रक्रिया कितनी तेज और निष्पक्ष होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जवाबदेही से ही बचेगी जनकल्याणकारी योजनाओं की साख

मनरेगा जैसी योजनाएं गरीबों और मजदूरों की जीवनरेखा हैं।
इनमें पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
आप भी अपने क्षेत्र की योजनाओं पर नजर रखें और सवाल पूछें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता फैलाएं।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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