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मधुबन में मजदूर-किसान संगठनों की संयुक्त बैठक, 12 फरवरी की ऐतिहासिक हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान

#मधुबन #गिरिडीह #मजदूर_किसान : संयुक्त बैठक में सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय।

मधुबन बाजार टांड में असंगठित मजदूर मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें 12 फरवरी को प्रस्तावित ऐतिहासिक हड़ताल को सफल बनाने पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता कामरेड अजीत राय ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य पुरन महतो ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। बैठक में मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर मंडरा रहे खतरों को लेकर चिंता जताई गई। आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का कार्यक्रम भी तय किया गया।

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  • मधुबन बाजार टांड में मजदूर-किसान संगठनों की संयुक्त बैठक।
  • 12 फरवरी की ऐतिहासिक हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान।
  • पुरन महतो ने चार लेबर कोड और भूमि नीति पर सरकार को घेरा।
  • 7 फरवरी को कामरेड सत्यनारायण भट्टाचार्य को माल्यार्पण कार्यक्रम।
  • 10 फरवरी को पुनः बैठक कर हड़ताल की रणनीति तय होगी।

मधुबन क्षेत्र में मजदूरों और किसानों के मुद्दों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में आज मधुबन बाजार टांड में असंगठित मजदूर मोर्चा एवं अखिल भारतीय किसान महासभा की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य आगामी 12 फरवरी को होने जा रही राष्ट्रव्यापी हड़ताल को पूरी ताकत से सफल बनाना और इसके लिए जमीनी स्तर पर तैयारी को मजबूत करना रहा।

बैठक की अध्यक्षता कामरेड अजीत राय ने की। इसमें मजदूर और किसान संगठनों से जुड़े कई प्रमुख कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मौजूदा परिस्थितियों में एकजुट संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकार की नीतियों पर तीखा हमला

बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह गिरीडीह जिला अध्यक्ष कॉमरेड पुरन महतो ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:

पुरन महतो ने कहा: “इस समय भाजपा की सरकार न सिर्फ चार लेबर कोड लाकर मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने जा रही है, बल्कि किसानों की पूरी जमीन छीनकर उसे कार्पोरेट घरानों को देने की तैयारी कर चुकी है।”

उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव से मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और किसानों को उनकी जमीन से वंचित किया जाएगा। ऐसे में 12 फरवरी की हड़ताल मजदूरों और किसानों के लिए अपने अधिकारों की रक्षा की निर्णायक लड़ाई है।

12 फरवरी की हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने की अपील

पुरन महतो ने सभी संगठनों और आम जनता से 12 फरवरी की हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिन का आंदोलन नहीं, बल्कि सरकार की मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आज आवाज नहीं उठाई गई तो आने वाले समय में हालात और गंभीर होंगे।

बैठक में मौजूद वक्ताओं ने भी एकमत होकर कहा कि मजदूरों और किसानों की एकता ही इन नीतियों का जवाब दे सकती है।

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आंदोलन को लेकर तय हुआ कार्यक्रम

संयुक्त बैठक में आंदोलन की तैयारी को लेकर आगामी कार्यक्रम भी तय किया गया। इसके तहत:

7 फरवरी का कार्यक्रम

7 फरवरी को मधुबन में कामरेड सत्यनारायण भट्टाचार्य को सुबह 9 बजे माल्यार्पण किया जाएगा। इसके बाद सभी साथी कतरास के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां आगे की गतिविधियों में भाग लिया जाएगा।

10 फरवरी की रणनीतिक बैठक

10 फरवरी को पुनः बाजार टांड में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में 12 फरवरी की हड़ताल को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी और जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

बैठक में इन नेताओं ने रखे विचार

इस संयुक्त बैठक में कई वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं ने अपने विचार रखे। प्रमुख रूप से दुवारिका राय, बसंत कर्मकार, उदेश्वर सिंह, हराधन तुरी, मंसु हंसदा, डेगनी देवी ने मजदूरों और किसानों की मौजूदा समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। सभी वक्ताओं ने संगठन को मजबूत करने और आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

एकजुट संघर्ष का संकल्प

बैठक के दौरान यह साफ संदेश दिया गया कि असंगठित मजदूर और किसान अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक मंच से संघर्ष करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि रोजगार, जमीन, मजदूरी और सम्मान से जुड़े सवालों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: बढ़ते जनआंदोलन की आहट

मधुबन में हुई यह संयुक्त बैठक साफ संकेत देती है कि मजदूर और किसान संगठनों में असंतोष गहराता जा रहा है। चार लेबर कोड और भूमि से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की तैयारी हो रही है। 12 फरवरी की हड़ताल इस असंतोष को सड़क पर लाने का माध्यम बनेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आवाजों को किस तरह सुनती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता जरूरी

जब मजदूर और किसान एक साथ खड़े होते हैं, तब बदलाव की ताकत पैदा होती है। मधुबन की यह बैठक संघर्ष और एकजुटता का संदेश देती है। अपने हक और भविष्य की सुरक्षा के लिए सजग रहना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर
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