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UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 333वीं रैंक हासिल कर करण सेठ ने बढ़ाया गिरिडीह का गौरव, पहले प्रयास में मिली बड़ी सफलता

#गिरिडीह #यूपीएससी_सफलता : जमुआ के चुंगलो गांव के करण सेठ ने सिविल सेवा परीक्षा में 333वीं रैंक हासिल की।

गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत चुंगलो गांव निवासी करण सेठ ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 333वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। वर्तमान में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में कार्यरत करण ने पहले ही प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गिरिडीह में खुशी और गर्व का माहौल है। क्षेत्र के लोग इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक मान रहे हैं।

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  • गिरिडीह के जमुआ प्रखंड के चुंगलो गांव निवासी करण सेठ ने UPSC में ऑल इंडिया 333वीं रैंक प्राप्त की।
  • रंजीत कुमार गुप्ता और सरिता गुप्ता के पुत्र हैं करण सेठ।
  • शुरुआती पढ़ाई हनी होली ट्रिनिटी स्कूल मोहनपुर से, आगे की पढ़ाई सीसीएल डीएवी स्कूल से।
  • वर्तमान में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं करण।
  • खास बात – पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की।
  • सफलता से जमुआ, पचम्बा और पूरे गिरिडीह जिले में खुशी की लहर

गिरिडीह जिले के लिए यह गर्व का क्षण है जब जमुआ प्रखंड के चुंगलो गांव के युवा करण सेठ ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 333वीं रैंक हासिल की है। देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली इस परीक्षा में सफलता हासिल कर करण ने अपने परिवार, गांव और पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं में उत्साह और प्रेरणा का माहौल बना हुआ है।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी सफलता

करण सेठ के पिता रंजीत कुमार गुप्ता और माता सरिता गुप्ता हैं। उनका पैतृक घर गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत चुंगलो गांव में स्थित है। हालांकि पढ़ाई के दौरान उनका परिवार गिरिडीह शहर के पचम्बा में भी रहता था, जहां रहकर उन्होंने अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाया।

परिवार के सदस्यों और परिचितों के अनुसार करण बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी रहे हैं। अनुशासन, निरंतर मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंततः देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली यूपीएससी में सफलता प्राप्त की।

करण की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो छोटे शहरों और गांवों से भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

स्कूल से ही मेधावी छात्र रहे करण

करण सेठ की प्रारंभिक शिक्षा हनी होली ट्रिनिटी स्कूल, मोहनपुर से हुई। बचपन से ही वे पढ़ाई में काफी तेज माने जाते थे और शिक्षकों के बीच भी उनकी पहचान एक होनहार छात्र के रूप में थी।

इसके बाद छठी कक्षा से उन्होंने सीसीएल डीएवी स्कूल में पढ़ाई शुरू की। इसी स्कूल से उन्होंने मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके शिक्षकों का कहना है कि करण हमेशा पढ़ाई के प्रति गंभीर और अनुशासित रहे।

स्कूल के दिनों से ही उन्होंने बड़े लक्ष्य तय कर लिए थे और लगातार मेहनत करते रहे। यही मेहनत आगे चलकर उनके लिए सफलता की राह बनी।

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पहले ही प्रयास में यूपीएससी में सफलता

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा में हर साल लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग अंतिम सूची में स्थान बना पाते हैं।

ऐसे में पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 333वीं रैंक हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। करण सेठ की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत तैयारी, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

उनकी सफलता से गिरिडीह जिले के छात्रों में भी नई उम्मीद जगी है कि वे भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।

वर्तमान में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन में कार्यरत

बताया जाता है कि करण सेठ वर्तमान में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और अपने लक्ष्य को हासिल किया।

उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है जो नौकरी करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यह दिखाता है कि सही समय प्रबंधन और दृढ़ संकल्प के साथ सफलता हासिल की जा सकती है।

गिरिडीह में खुशी की लहर

करण सेठ की सफलता की खबर मिलते ही जमुआ, पचम्बा और पूरे गिरिडीह जिले में खुशी का माहौल बन गया। उनके परिवार, रिश्तेदारों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि करण ने केवल अपने परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता से यह संदेश गया है कि गिरिडीह जैसे जिलों के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

कई लोगों ने कहा कि करण की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और अधिक से अधिक छात्र अब यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

न्यूज़ देखो: छोटे शहरों से बड़े सपनों की उड़ान

करण सेठ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। गिरिडीह जैसे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में स्थान बनाना युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश देता है। यह सफलता न केवल एक परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है। अब जरूरत है कि प्रशासन और समाज ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपने बड़े हों तो मंजिल दूर नहीं होती

हर युवा के जीवन में एक ऐसा लक्ष्य होना चाहिए जो उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। करण सेठ की सफलता बताती है कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।

आज जरूरत है कि हमारे गांव और शहरों के छात्र भी बड़े सपने देखने का साहस करें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत करें। समाज और परिवार का समर्थन भी युवाओं की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि आप भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो इस सफलता से प्रेरणा लें और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहें।

अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें और ऐसे प्रेरणादायक प्रयासों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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