#बरवाडीह #खरीफ_कर्मशाला : कम वर्षा की संभावना के बीच किसानों को उन्नत खेती और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी।
बरवाडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती और कम वर्षा की स्थिति में खेती प्रबंधन की जानकारी दी गई। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की संभावना जताते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों की खेती पर जोर देने की सलाह दी। कार्यक्रम में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने और उस पर मिलने वाले सरकारी अनुदान की भी जानकारी दी गई। बड़ी संख्या में किसान और कृषि कर्मी कार्यक्रम में शामिल हुए।
- बरवाडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित हुई खरीफ कर्मशाला।
- किसानों को कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई।
- कृषि विभाग ने सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई।
- मडुआ, ज्वार और बाजरा की खेती पर प्रति हेक्टेयर 3 हजार रुपये अनुदान की जानकारी।
- किसानों को मिट्टी जांच, गहरी जुताई और संतुलित खाद उपयोग की सलाह।
- कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और कृषि कर्मी शामिल हुए।
बरवाडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में शुक्रवार को प्रखंड स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। झारखंड सरकार के कृषि मंत्री के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, कम वर्षा की स्थिति में खेती प्रबंधन और कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में अधिकारियों ने किसानों को मौसम के बदलते हालात के अनुसार खेती की तैयारी करने की सलाह दी।
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ उपप्रमुख बीरेंद्र जायसवाल, विधायक प्रतिनिधि प्रेम कुमार सिंह उर्फ पिंटू, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुमित कुमार तिवारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी विपुल पांडेय, प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामनाथ यादव एवं अंचल निरीक्षक अनिल सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया गया।
कम वर्षा को लेकर किसानों को किया गया सतर्क
प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामनाथ यादव ने बताया कि वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम होने की संभावना है। ऐसे में किसानों को खेती की रणनीति बदलने की जरूरत है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे कम पानी में होने वाली फसलों की खेती पर विशेष ध्यान दें, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामनाथ यादव ने कहा: “किसानों को कम पानी वाली फसलों और कम अवधि की किस्मों की खेती पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”
गहरी जुताई और मिट्टी जांच पर दिया जोर
कर्मशाला के दौरान किसानों को खेतों की गहरी जुताई कराने और मिट्टी जांच करवाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग करने से उत्पादन बेहतर होगा।
साथ ही किसानों को विभागीय सुझावों के अनुरूप खेती करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कम अवधि वाली फसलों की खेती की सलाह
अधिकारियों ने किसानों को कम अवधि वाली फसल किस्मों का चयन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए ऐसी फसलों का चयन जरूरी है, जिनमें कम पानी और कम समय में बेहतर उत्पादन संभव हो।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल प्रबंधन और जल संरक्षण के उपायों की भी जानकारी दी।
मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा
कर्मशाला में बताया गया कि कृषि विभाग मोटे अनाज जैसे मडुआ, ज्वार और बाजरा की खेती को बढ़ावा दे रहा है। इन फसलों की खेती पर किसानों को प्रति हेक्टेयर तीन हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि मोटे अनाज कम पानी में भी अच्छी पैदावार देते हैं और पोषण के लिहाज से भी बेहद लाभकारी हैं।
बड़ी संख्या में किसान हुए शामिल
कार्यक्रम में एटीएम ज्योति कुमारी, बीटीएम सपना कुमारी, जनसेवक सुजाता कुमारी, कृषक मित्र और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों से खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवाल भी पूछे, जिनका मौके पर समाधान किया गया।
बदलते मौसम में वैज्ञानिक खेती की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण खेती की पारंपरिक पद्धतियों में बदलाव जरूरी हो गया है। वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
कम पानी वाली फसलें और जल संरक्षण तकनीक आने वाले समय में खेती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
न्यूज़ देखो: मौसम के बदलते हालात में जागरूक खेती जरूरी
बरवाडीह में आयोजित खरीफ कर्मशाला किसानों के लिए जागरूकता और वैज्ञानिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए समय रहते किसानों को सही सलाह और तकनीकी जानकारी देना बेहद जरूरी है। मोटे अनाज और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना भविष्य की खेती के लिए सकारात्मक कदम हो सकता है। अब जरूरत है कि किसान भी बदलते मौसम के अनुसार नई तकनीकों और विभागीय सुझावों को अपनाने के लिए आगे आएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक किसान ही मजबूत बनाएंगे खेती और भविष्य
बदलते मौसम में वैज्ञानिक और समझदारी भरी खेती समय की जरूरत है।
कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
जल संरक्षण और संतुलित खेती से ही कृषि को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
जागरूक किसान ही आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करेंगे।
खेती से जुड़ी नई जानकारियों को अपनाएं और दूसरों तक भी पहुंचाएं।
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