
#कोलेबिरा #शोकसभा : बीमारी के इलाज के दौरान प्रधान लिपिक धनेश्वर उराँव का आकस्मिक निधन।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा–पाकरटांड़ प्रखंड में पदस्थापित प्रधान लिपिक धनेश्वर उराँव का 12 मार्च 2026 को इलाज के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से प्रखंड और अंचल प्रशासन में शोक की लहर दौड़ गई। कोलेबिरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में शोकसभा आयोजित कर अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
- प्रधान लिपिक धनेश्वर उराँव का 12 मार्च 2026 को इलाज के दौरान निधन।
- कोलेबिरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में शोकसभा आयोजित।
- अधिकारियों और कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि।
- वर्ष 2003 में सरकारी सेवा में दिया था पहला योगदान।
- लगभग 23 वर्षों की सेवा के दौरान कई कार्यालयों में निभाई जिम्मेदारी।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा–पाकरटांड़ प्रखंड में पदस्थापित प्रधान लिपिक धनेश्वर उराँव का 12 मार्च 2026 को बीमारी के इलाज के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रखंड और अंचल प्रशासन सहित सहकर्मियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई।
उनके सम्मान में कोलेबिरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक शोकसभा आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
अंचलाधिकारी और कर्मचारियों ने दी श्रद्धांजलि
शोकसभा में अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी अनूप कच्छप की उपस्थिति में अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वर्गीय धनेश्वर उराँव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान सभी ने उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि वे एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे, जिन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया।
2003 में शुरू की थी सरकारी सेवा
स्वर्गीय धनेश्वर उराँव का जन्म 9 मई 1966 को हुआ था। उन्होंने 22 जनवरी 2003 को जिला स्थापना शाखा, सिमडेगा में सरकारी सेवा में अपना पहला योगदान दिया था।
अपने लगभग 23 वर्षों के सेवाकाल के दौरान उन्होंने जिला स्थापना शाखा सिमडेगा, बोलबा प्रखंड, पाकरटांड़ प्रखंड तथा अनुमंडल कार्यालय सहित कई स्थानों पर विभिन्न दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
शांत स्वभाव और कार्यकुशलता के लिए थे लोकप्रिय
सहकर्मियों के अनुसार धनेश्वर उराँव अपने शांत स्वभाव, सुशील व्यवहार और कार्यकुशलता के लिए जाने जाते थे। वे अपने सहयोगी कर्मचारियों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
हाल ही में उन्हें प्रधान लिपिक के पद पर प्रोन्नति भी मिली थी। उनके असामयिक निधन से प्रशासनिक महकमे को अपूरणीय क्षति हुई है।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने जताया दुख
शोकसभा के दौरान प्रखंड सह अंचल कार्यालय के कई पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

न्यूज़ देखो: कर्मठ कर्मचारियों की कमी हमेशा महसूस होती है
सरकारी सेवा में ऐसे कई कर्मचारी होते हैं जो अपनी मेहनत और ईमानदारी से संस्थान की पहचान बनाते हैं। धनेश्वर उराँव भी उन्हीं कर्मठ कर्मचारियों में शामिल थे। उनका असामयिक निधन न केवल उनके परिवार बल्कि प्रशासनिक महकमे के लिए भी एक बड़ी क्षति है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
उनकी यादें हमेशा रहेंगी जीवित
किसी भी व्यक्ति का असली परिचय उसके व्यवहार और काम से होता है। धनेश्वर उराँव ने अपने सेवाकाल में जिस समर्पण और सरलता से काम किया, वह हमेशा लोगों की यादों में जीवित रहेगा।
अगर आप भी उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो इस खबर को साझा करें और अपनी संवेदनाएं व्यक्त करें।






