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पेसा कानून लागू होने पर कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने जताया आभार, मनरेगा में बदलाव का किया कड़ा विरोध

#कोलेबिरा #पेसाकानून #मनरेगा #झारखंडराजनीति : विधायक ने आदिवासी स्वशासन को बताया ऐतिहासिक कदम, केंद्र सरकार के फैसलों को बताया जनविरोधी।

कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने झारखंड में पेसा कानून लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं कांग्रेस–झामुमो–इंडिया महागठबंधन की सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया।

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  • बजट सत्र में पेसा कानून लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई थी
  • ग्राम सभाओं को मिलेंगे संवैधानिक अधिकार
  • स्थानीय स्वशासन और गांवों के विकास को मिलेगी मजबूती
  • मनरेगा को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बताया
  • केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में बदलाव का किया विरोध

कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग उठाई थी, जिसे राज्य सरकार ने गंभीरता से लेते हुए अमल में लाया। उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होने से आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को संवैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे और स्थानीय लोग अपने संसाधनों एवं विकास योजनाओं पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे।

ग्राम स्वशासन को मिलेगी मजबूती

विधायक कोनगाड़ी ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा करने वाला कानून है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों का समग्र विकास संभव होगा और स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस निर्णय को झारखंड के आदिवासी समाज के लिए मील का पत्थर बताया।

मनरेगा को बताया गरीबों का मजबूत सहारा

विधायक ने राज्य सरकार द्वारा मनरेगा योजना को बेहतर ढंग से संचालित किए जाने के लिए भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस एवं सहयोगी दलों की सरकार द्वारा मनरेगा कानून पारित किया गया था, ताकि ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में 100 दिनों का रोजगार मिल सके। आज भी यह योजना ग्रामीण मजदूरों, गरीब किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए मजबूत सहारा बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने तमाम चुनौतियों के बावजूद गांवों के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब किसान, मजदूर और बीपीएल श्रेणी के परिवार बड़ी संख्या में हैं, जिनके लिए मनरेगा योजना जीवनरेखा साबित हो रही है।

केंद्र सरकार के बदलावों का किया विरोध

वहीं विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना में किए गए हालिया बदलावों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे बदलाव मजदूरों और गरीबों के हितों की अनदेखी हैं। उन्होंने इन बदलावों को जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी बढ़ेगी।

विधायक ने मांग की कि मनरेगा में किए गए सभी बदलावों को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यह योजना देश के करोड़ों गरीब किसानों, ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का एकमात्र मजबूत माध्यम है।

गरीबों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प

विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीबों, मजदूरों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी लड़ाई लगातार जारी रहेगी।

न्यूज़ देखो: ग्राम स्वराज और रोजगार दोनों जरूरी

पेसा कानून के क्रियान्वयन से जहां आदिवासी स्वशासन को बल मिलेगा, वहीं मनरेगा जैसी योजनाओं की मजबूती ग्रामीण भारत के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी जनविरोधी बदलाव का विरोध लोकतंत्र की मूल भावना है।

जनहित में आवाज, विकास में विश्वास

ग्राम सभाओं को अधिकार, गांवों को आत्मनिर्भरता
मनरेगा से मजदूरों को सम्मानजनक रोजगार
जनविरोधी नीतियों का हर स्तर पर विरोध
यही है सशक्त लोकतंत्र की पहचान

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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