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पॉलिटेक्निक व्याख्याता नियुक्ति नियमों में बदलाव की मांग, कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने सदन में उठाया मुद्दा

#कोलेबिरा #विधानसभा_मुद्दा : विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने पॉलिटेक्निक व्याख्याता योग्यता में संशोधन की मांग उठाई।

झारखंड विधानसभा के शून्यकाल में कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में व्याख्याता नियुक्ति से जुड़े नियमों का मुद्दा उठाया। उन्होंने वर्तमान विज्ञापन में निर्धारित M.Tech और PhD की अनिवार्यता पर सवाल उठाते हुए योग्यता में संशोधन की मांग की। विधायक ने कहा कि इस नियम के कारण कई वर्तमान NBL कर्मियों की नौकरी पर संकट उत्पन्न हो सकता है। सरकार से B.Tech डिग्री को भी पात्रता में शामिल करने की मांग की गई है।

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  • कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने विधानसभा के शून्यकाल में उठाया मुद्दा।
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में व्याख्याता नियुक्ति की योग्यता पर जताई आपत्ति।
  • वर्तमान विज्ञापन में M.Tech और PhD अनिवार्य होने पर सवाल।
  • NBL कर्मियों की नौकरी पर संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई।
  • योग्यता में B.Tech डिग्री शामिल करने और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग।

झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में व्याख्याता नियुक्ति से संबंधित नियमों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार द्वारा जारी नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित योग्यता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उसमें संशोधन की मांग की।

विधायक ने कहा कि वर्तमान में जारी विज्ञापन के अनुसार व्याख्याता पद के लिए P.G (M.Tech) के साथ PhD की अर्हता अनिवार्य की गई है। उनका कहना है कि इस प्रकार की योग्यता निर्धारित होने से वर्तमान में कार्यरत कई कर्मियों के सामने नौकरी समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

NBL कर्मियों की नौकरी पर मंडरा रहा संकट

नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने सदन में बताया कि राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में कार्यरत कई NBL कर्मी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता मुख्य रूप से B.Tech है।

ऐसे में यदि नई नियुक्तियों के लिए M.Tech और PhD की अनिवार्यता लागू रहती है तो इन कर्मियों के लिए अपनी सेवाएं जारी रखना कठिन हो सकता है। इससे उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने कहा:
“वर्तमान नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित योग्यता के कारण कई अनुभवी NBL कर्मियों के सामने नौकरी समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।”

योग्यता में B.Tech शामिल करने की मांग

विधायक ने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि नियुक्ति विज्ञापन की योग्यता शर्तों में संशोधन किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि व्याख्याता पद के लिए B.Tech डिग्री को भी पात्रता में शामिल किया जाए।

उनका मानना है कि इससे उन कर्मियों को राहत मिल सकेगी जो वर्षों से संस्थानों में कार्य कर रहे हैं और जिनके पास व्यावहारिक अनुभव भी है।

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सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की भी मांग

नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने इस मुद्दे के साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण मांग भी सदन के सामने रखी। उन्होंने कहा कि राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में कार्यरत NBL कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित की जानी चाहिए।

विधायक का कहना है कि यदि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाई जाती है तो इससे कर्मियों को सेवा सुरक्षा मिलेगी और संस्थानों को भी अनुभवी शिक्षकों का लाभ मिलता रहेगा।

सरकार से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील

विधायक ने कहा कि यदि सरकार समय रहते इस विषय पर उचित निर्णय नहीं लेती है तो कई अनुभवी कर्मियों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि नियुक्ति नियमों में आवश्यक संशोधन करते हुए ऐसे समाधान निकाले जाएं जिससे संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता भी बनी रहे और वर्तमान कर्मियों के रोजगार पर भी असर न पड़े।

न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के बीच संतुलन जरूरी

पॉलिटेक्निक संस्थानों में नियुक्ति से जुड़े नियम शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े होते हैं, लेकिन इसके साथ ही वर्षों से कार्यरत कर्मियों की सेवा सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। ऐसे मामलों में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होती है। यदि अनुभव और योग्यता दोनों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए तो इससे संस्थानों और कर्मियों दोनों को लाभ मिल सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षा और रोजगार दोनों की सुरक्षा जरूरी

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योग्य शिक्षकों की आवश्यकता होती है, लेकिन साथ ही उन लोगों के अनुभव का सम्मान भी जरूरी है जो वर्षों से इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं।

यदि नीति निर्माण में संतुलन और संवेदनशीलता रखी जाए तो इससे शिक्षा व्यवस्था और रोजगार दोनों सुरक्षित रह सकते हैं।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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