#बरवाडीह #जनसमस्या : जलमीनार खराब—आदिम जनजाति गांव में पानी और सड़क का संकट गहराया।
लातेहार के बरवाडीह प्रखंड के पुटुआगढ़ गांव में कोरवा जनजाति परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जलमीनार छह माह से खराब है और ग्रामीण दूर से पानी ला रहे हैं। सड़क और पुलिया के अभाव से आवागमन प्रभावित है। जनप्रतिनिधि ने समाधान का आश्वासन दिया है।
- पुटुआगढ़ गांव में कोरवा परिवारों को पेयजल संकट।
- जलमीनार 6 महीने से खराब पड़ी है।
- ग्रामीणों को आधा-एक किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा।
- सड़क और पुलिया की ग्रामीणों ने मांग की।
- संतोषी शेखर ने समाधान का आश्वासन दिया।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छेचा पंचायत के पुटुआगढ़ गांव में रहने वाले कोरवा जनजाति परिवार गंभीर पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सरकार द्वारा आदिम जनजातियों के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद इनका लाभ गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है।
करीब एक दर्जन परिवारों के 100 से अधिक लोग पिछले छह महीनों से पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जलमीनार खराब, बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्थापित जलमीनार की टंकी पिछले छह महीनों से खराब पड़ी है। विभागीय कर्मी मशीन खोलकर ले गए, लेकिन अब तक उसे दोबारा नहीं लगाया गया।
जितेंद्र कोरवा ने कहा: “हम लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, कोई सुनने वाला नहीं है।”
दूर से पानी लाने को मजबूर
पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आधे से एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं, नदी या नाले से पानी लाना पड़ रहा है।
इससे खासकर महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी हो रही है।
सड़क और पुलिया की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है, जिससे बारिश के दिनों में आवागमन बेहद कठिन हो जाता है।
दिनु कोरवा ने कहा: “बारिश में गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, सड़क बननी जरूरी है।”
उन्होंने पुटुआगढ़ स्कूल से गांव तक सड़क और पुलिया निर्माण की मांग की है।
जनप्रतिनिधि ने लिया जायजा
मंगलवार को जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर गांव पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुना।
इस दौरान जितेंद्र कोरवा, दिनु कोरवा, अनिल कोरवा, वीरेंद्र कोरवा, अर्जुन कोरवा, सबिता देवी, रानी देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
अधिकारियों को दिए निर्देश
संतोषी शेखर ने पेयजल विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द जलमीनार की मरम्मत कर समस्या दूर करने का निर्देश दिया।
संतोषी शेखर ने कहा: “पेयजल जैसी बुनियादी समस्या का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।”
विधायक से पहल का आश्वासन
उन्होंने बताया कि विधायक रामचंद्र सिंह से बात कर गांव में सड़क और अन्य सुविधाओं को विकसित करने की पहल की जाएगी।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल
यह मामला दर्शाता है कि योजनाओं के बावजूद कई आदिम जनजाति गांव अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों में उम्मीद
जनप्रतिनिधि के आश्वासन के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा।
विकास की जरूरत
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास की आवश्यकता को उजागर करती है।

न्यूज़ देखो: योजनाएं हैं, पर जमीन पर कमी
बरवाडीह का यह मामला दिखाता है कि योजनाएं बनने के बावजूद उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब जरूरत है कि प्रशासन इन समस्याओं को प्राथमिकता से हल करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हर गांव तक पहुंचे विकास
पानी और सड़क हर व्यक्ति का अधिकार है।
जरूरी है कि कोई भी गांव इन सुविधाओं से वंचित न रहे।
जागरूकता और आवाज उठाने से ही बदलाव संभव है।
आइए, हम सभी मिलकर विकास की मांग करें।
इस खबर को शेयर करें और जरूरतमंद क्षेत्रों की आवाज को आगे बढ़ाएं।
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).