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कृषि चौपाल से जगी नई उम्मीद, हरिहरपुर में मयूरी ट्रस्ट ने किसानों को दिखाई आधुनिक खेती और शिक्षा की राह

#जारी #कृषि_चौपाल : हरिहरपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में किसानों और महिलाओं को मिली खेती व शिक्षा की व्यावहारिक जानकारी।

मयूरी ट्रस्ट द्वारा जारी प्रखंड के हरिहरपुर गांव में कृषि चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, सरकारी योजनाओं और शिक्षा के महत्व से अवगत कराना रहा। चौपाल में महिला मंडल और किसान प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विशेषज्ञों ने खेती और शिक्षा के समन्वित विकास को ग्रामीण समृद्धि की कुंजी बताया।

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  • हरिहरपुर गांव में मयूरी ट्रस्ट द्वारा कृषि चौपाल का आयोजन।
  • आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी।
  • कृषि विशेषज्ञ सुश्री वंशिका ने वैज्ञानिक खेती पर दिया मार्गदर्शन।
  • मयूरी ट्रस्ट के निदेशक बसंत कुमार गुप्ता ने शिक्षा का महत्व बताया।
  • महिला किसान प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी

जारी प्रखंड के हरिहरपुर गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित कृषि चौपाल कार्यक्रम ने ग्रामीण किसानों के बीच नई उम्मीद जगाई। इस कार्यक्रम में खेती और शिक्षा को एक-दूसरे से जोड़ते हुए विकास की नई दिशा पर चर्चा की गई। बुधवार को दोपहर एक बजे शुरू हुए इस चौपाल में बड़ी संख्या में महिला मंडल की सदस्याएं और किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को आधुनिक बनाते हुए शिक्षा के माध्यम से दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देना रहा।

कृषि और शिक्षा के समन्वित विकास पर जोर

कार्यक्रम के दौरान मयूरी ट्रस्ट के निदेशक बसंत कुमार गुप्ता ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि हमारी आधारभूत संरचना है और इसके बिना किसी भी समाज की समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि सही जानकारी के अभाव में कई किसान इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कृषि के साथ-साथ शिक्षा को भी समान महत्व दें। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा संचालित चैताली कॉलेज में बीएड, डीएलएड, इंटर और बीए पाठ्यक्रमों में नामांकन लेने का आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही खेती को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

आधुनिक तकनीक से खेती पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कृषि चौपाल में मौजूद कृषि विशेषज्ञ सुश्री वंशिका ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम पानी में उपयुक्त फसल चयन कर किसान जल संरक्षण के साथ बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय, गुणवत्तापूर्ण बीज की पहचान और बहु-फसली खेती के लाभों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा:

“यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा होगा।”

महिला किसानों की अहम भागीदारी

इस कृषि चौपाल में महिला किसानों की सक्रिय भूमिका देखने को मिली। महिला प्रतिनिधियों ने खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से सवाल भी पूछे। इससे कार्यक्रम को संवादात्मक और उपयोगी बनाया गया। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और जानकारी मिले, तो वे खेती में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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कार्यक्रम में उपस्थित रहे कई गणमान्य

इस अवसर पर मयूरी ट्रस्ट के सचिव चैताली सेनगुप्ता, सिविल इंजीनियर शुभम कुमार गुप्ता, हर्ष कुमार गुप्ता उपस्थित रहे। वहीं किसान प्रतिनिधियों में बुधनी देवी, लीलावती देवी, कमल उरांव, दिनेश टोप्पो, मंगल उरांव, मंगल महतो, सुमति उड़ान सहित अनेक ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लिया। सभी ने इस पहल को गांव के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

किसानों ने लिया सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के अंत में किसानों और महिला प्रतिनिधियों ने कृषि विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और शिक्षा को एक साथ अपनाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर बन सकता है।

न्यूज़ देखो: खेती और शिक्षा का मेल ही ग्रामीण विकास की कुंजी

हरिहरपुर में आयोजित यह कृषि चौपाल बताती है कि जब खेती को शिक्षा से जोड़ा जाता है, तो उसका असर लंबे समय तक दिखाई देता है। मयूरी ट्रस्ट की यह पहल किसानों को केवल जानकारी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास भी दे रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि किसान इन जानकारियों को कितनी तेजी से व्यवहार में लाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक किसान, सशक्त गांव की ओर कदम

ग्रामीण विकास की असली ताकत जागरूक किसानों और शिक्षित समाज में छिपी है। ऐसी पहलें किसानों को नई सोच और नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
यदि आपके गांव में भी खेती या शिक्षा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम हों, तो उनमें भागीदारी जरूर करें।
अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और ग्रामीण विकास की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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