
#बरवाडीह #शोक_समाचार : गंभीर बीमारी से निधन, अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला पंचायत के कुटमू गांव में सुरेंद्र मिस्री की पत्नी के निधन से शोक की लहर है। गंभीर बीमारी के कारण उनका देहांत हो गया। स्थानीय कुल्ही नाला श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
- ग्राम कुटमू, बेतला पंचायत में शोक का माहौल।
- सुरेंद्र मिस्री की पत्नी का गंभीर बीमारी से निधन।
- कुल्ही नाला श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार।
- जनप्रतिनिधियों ने पहुंचकर दी श्रद्धांजलि।
- बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे अंतिम यात्रा में शामिल।
बरवाडीह प्रखंड के बेतला पंचायत अंतर्गत ग्राम कुटमू में उस समय शोक की लहर फैल गई जब सुरेंद्र मिस्री की धर्मपत्नी के निधन की खबर गांव में पहुंची। बताया गया कि वे बीते कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया है।
गांव में पसरा मातम
दिवंगत के निधन की सूचना मिलते ही परिजन और आसपास के ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। ग्रामीणों ने बताया कि वे मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं, जिनका समाज में सम्मान था। उनके जाने से गांव ने एक सम्मानित महिला को खो दिया है।
कुल्ही नाला श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार
दिवंगत का अंतिम संस्कार स्थानीय कुटमू के कुल्ही नाला श्मशान घाट पर विधि-विधान के साथ संपन्न किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
इस दौरान क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
जनप्रतिनिधियों ने जताई संवेदना
अंतिम संस्कार में झारखंड आंदोलनकारी अलीहसन अंसारी, बेतला के पूर्व मुखिया संजय सिंह, पूर्व उप मुखिया जयप्रकाश रजक, सिधेश्वर पासवान तथा जयगोविंद मिस्री सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की।
उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा, “इस दुख की घड़ी में पूरा समाज परिवार के साथ खड़ा है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।”
ग्रामीणों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रतीक थी कि दिवंगत के प्रति लोगों के मन में कितना सम्मान था। ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार को धैर्य और साहस बनाए रखने की बात कही। श्मशान घाट पर उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
न्यूज़ देखो: दुख की घड़ी में समाज की संवेदना
ग्रामीण जीवन में आपसी सहयोग और संवेदना ही सबसे बड़ी पूंजी होती है। कठिन समय में समाज का साथ परिवार को संबल देता है और दुख को सहने की शक्ति प्रदान करता है। यही सामाजिक एकजुटता गांवों की पहचान है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संवेदना और एकजुटता ही सबसे बड़ा सहारा
जीवन की अनिश्चितता हमें हर पल की अहमियत सिखाती है। ऐसे समय में हमें एक-दूसरे के साथ खड़े होकर मानवीय मूल्यों को मजबूत करना चाहिए।
आइए, हम सभी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें और शोक संतप्त परिवार को हरसंभव सहयोग देने का संकल्प लें।
आप भी अपनी श्रद्धांजलि कमेंट के माध्यम से व्यक्त करें और खबर को अधिक से अधिक साझा करें।






