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दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का लग्न शुरू: जानें आपके लिए कौन सा मुहूर्त है सर्वश्रेष्ठ

#भारत #दीपावली : मां लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की आराधना के लिए देशभर में तैयारियां पूरी – शाम से जगमगाएंगे घर-आंगन
  • कार्तिक अमावस्या पर मां लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा-अर्चना की जाएगी।
  • आचार्य सुरेंद्र पांडेय के अनुसार वृष लग्न में शाम 7:12 से रात 9:08 बजे तक रहेगा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।
  • कुंभ लग्न 2:36 से 4:07 बजे और सिंह लग्न 1:40 से 3:54 बजे रात तक शुभ माने गए।
  • निशिथ काल 11:33 से 12:23 बजे तक रहेगा काली पूजा के लिए श्रेष्ठ समय।
  • प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

इस वर्ष दीपावली का पर्व पूरे देश में उल्लास और श्रद्धा के वातावरण के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार की शाम सूर्यास्त के बाद घरों, मंदिरों, सड़कों और बाजारों में दीपों की रोशनी से जगमगाहट फैल जाएगी। मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की पूजा-अर्चना के साथ व्यापारी वर्ग नई बहीखातों का पूजन करेंगे, जिससे नए वर्ष की समृद्धि और शुभता की कामना की जाएगी।

शुभ मुहूर्त में होगा लक्ष्मी पूजन

आचार्य सुरेंद्र पांडेय के अनुसार कार्तिक कृष्णपक्ष की अमावस्या 20 अक्तूबर को दोपहर 2:55 बजे से शुरू होकर मंगलवार शाम 4:26 बजे तक रहेगी। इस अवधि में वृष लग्न का समय शाम 7:12 से रात 9:08 बजे तक रहेगा, जिसे लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ माना गया है। यह स्थिर लग्न है और इसमें की गई आराधना से दीर्घकालिक समृद्धि प्राप्त होती है।

आचार्य सुरेंद्र पांडेय ने कहा: “दीपावली के दिन वृष लग्न में किया गया पूजन सर्वश्रेष्ठ फलदायी होता है। इस समय मां लक्ष्मी की उपासना करने से घर में स्थायी सुख और धन की प्राप्ति होती है।”

अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष पूजा मुहूर्त

इस वर्ष दीपावली पर विभिन्न वर्गों के लिए पूजा के समय भी निर्धारित किए गए हैं।

  • दोपहर 3:30 से शाम 5:00 बजे तक सरकारी और निजी कर्मियों के लिए शुभ समय रहेगा।
  • शाम 5:00 से 6:30 बजे तक विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मुहूर्त है।
  • शाम 7:32 से रात 9:28 बजे तक गृहस्थ, किसान और आम जनता के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • वहीं रात 12:55 से 1:55 बजे तक का समय विशेष रूप से साधकों और काली माता उपासकों के लिए उत्तम बताया गया है।

काली पूजा के लिए निशिथ काल रहेगा शुभ

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दीपावली की रात निशिथ काल यानी रात 11:33 से 12:23 बजे के बीच का समय काली पूजा के लिए सर्वोत्तम रहेगा। इस दौरान साधक तंत्र-साधना और शक्ति उपासना कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

दीपोत्सव से सजा देश

दीपावली के स्वागत में देश के हर कोने में उत्सव का माहौल है। शहरों से लेकर गांवों तक मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ है, गलियों में रोशनी की झालरें टंगी हैं और घर-आंगन दीपमालाओं से सजाए जा रहे हैं। बच्चों में उत्साह चरम पर है और लोग परिवार तथा मित्रों के साथ लक्ष्मी पूजन की तैयारियों में व्यस्त हैं।

प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम

दीपावली के अवसर पर प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को लेकर पुख्ता तैयारियां की हैं। सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के पूजा-अर्चना और उत्सव का आनंद ले सकें।

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न्यूज़ देखो: दीपों की रौशनी में झलकेगी आस्था और एकता

दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मिक विकास, सामाजिक एकता और सद्भाव का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने और अपने भीतर की नकारात्मकता को मिटाने का संदेश देता है। जब हर घर में दीप जलते हैं, तो समाज में भी नई उम्मीदों का उजाला फैलता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सकारात्मकता के दीप जलाएं और खुशियां बांटें

इस दीपावली पर केवल अपने घरों में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं। प्रेम, करुणा और एकता का प्रकाश फैलाएं ताकि हर दिल में उजाला भर सके।
अब समय है कि हम सब मिलकर ‘ग्रीन दीपावली’ का संकल्प लें – कम पटाखे, अधिक दीप और अधिक मुस्कान।
अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और प्रकाश के इस पर्व को शुभता और सद्भाव के साथ मनाएं।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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