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राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर नेताओं ने किया माल्यार्पण, झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकार की मांग तेज

#लातेहार #झारखंड_आंदोलन : बेतला में माल्यार्पण कार्यक्रम के दौरान आंदोलनकारियों के सम्मान और हक की मांग उठी।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला में कुटमू चौक स्थित राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर मंगलवार को संयुक्त रूप से माल्यार्पण किया गया। यह कार्यक्रम पलामू प्रमंडल के तीन दिवसीय दौरे पर आए प्रधान महासचिव एवं झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिश के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान, पहचान और अधिकारों को लेकर राज्य सरकार से ठोस पहल की मांग की गई। नेताओं ने कहा कि राज्य निर्माण में योगदान देने वालों की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।

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  • कुटमू चौक, बेतला में राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण।
  • पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिश के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम।
  • झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान, पहचान पत्र और अधिकार देने की मांग।
  • आंदोलनकारियों के लिए जेल जाने की बाध्यता समाप्त करने पर जोर।
  • कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला क्षेत्र में मंगलवार को ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पलामू प्रमंडल के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधान महासचिव एवं झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिश के नेतृत्व में कुटमू चौक स्थित राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर संयुक्त रूप से माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर झारखंड आंदोलन के इतिहास, संघर्ष और वर्तमान स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई।

अतिथियों का भव्य स्वागत

पलामू से गढ़वा जाने के क्रम में जैसे ही नेता कुटमू चौक पहुंचे, जिला सचिव बिरेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने फूल-माला और गुलदस्ता भेंट कर अतिथियों का भव्य स्वागत किया। स्वागत कार्यक्रम के बाद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को याद किया।

राजा मेदनी राय के योगदान को किया नमन

माल्यार्पण के पश्चात नेताओं ने राजा मेदनी राय के जीवन, उनके संघर्ष और क्षेत्र के लिए किए गए योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि राजा मेदनी राय न सिर्फ वीर योद्धा थे, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले जननायक भी थे। उनके आदर्श आज भी समाज और राजनीति के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

आंदोलनकारियों के सम्मान की मांग तेज

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिश ने झारखंड आंदोलनकारियों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा:
“झारखंड आंदोलनकारियों को मान-सम्मान, स्वाभिमान और उनका पूरा हक-अधिकार मिलना चाहिए। राज्य निर्माण आंदोलन में भाग लेने वाला हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।”

उन्होंने राज्य सरकार से यह मांग की कि आंदोलनकारियों के लिए जेल जाने की बाध्यता को समाप्त किया जाए, क्योंकि कई वास्तविक आंदोलनकारी इस शर्त के कारण आज भी लाभ से वंचित हैं।

पहचान पत्र और आर्थिक सहायता की मांग

रामचंद्र सहिश ने कहा कि जिन आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और बलिदान से झारखंड राज्य बना, आज वही लोग उपेक्षा के शिकार हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि सभी आंदोलनकारियों को पहचान पत्र प्रदान किए जाएं और उनके जीवन-यापन के लिए ठोस नीति बनाकर आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि नीतिगत निर्णयों और जमीनी क्रियान्वयन से दिखना चाहिए।

वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से केन्द्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी, लातेहार जिला प्रभारी इम्तियाज अहमद नज़मी, छात्र संघ के केन्द्रीय अध्यक्ष ओम वर्मा, जिला अध्यक्ष अमित पांडेय, जिला सचिव बिरेंद्र ठाकुर शामिल रहे।

इसके अलावा गोपाल मिस्री, प्रखंड अध्यक्ष टललन तुरी, धुरबिगन सिंह, विजय सिंह, ईश्वरी सिंह, ओम प्रकाश लाला, अली हुसैन, रामावतार चौधरी, अशोक कुमार सिंह, चंदेश्वर तुरी, रामकृष्णा तुरी, राजकुमार सिंह, रामप्रताप सिंह, गयासुद्दीन मियां, ललन यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता मौजूद थे।

संघर्ष जारी रखने का ऐलान

नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक झारखंड आंदोलनकारियों को उनका सम्मान, अधिकार और सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और इतिहास से जुड़ी हुई है।

ग्रामीणों में दिखा समर्थन

कार्यक्रम में शामिल ग्रामीणों ने भी आंदोलनकारियों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया, उन्हें आज भी बुनियादी सम्मान के लिए लड़ना पड़ रहा है, यह पूरे समाज के लिए चिंतन का विषय है।

न्यूज़ देखो: आंदोलनकारियों की उपेक्षा पर सवाल

यह कार्यक्रम यह सवाल खड़ा करता है कि झारखंड आंदोलन के नायकों को आज भी उनका पूरा अधिकार क्यों नहीं मिल पाया। राजा मेदनी राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि संघर्ष की याद और भविष्य की चेतावनी भी है। यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो असंतोष और गहरा सकता है। आंदोलनकारियों के सम्मान से ही राज्य की आत्मा मजबूत होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सम्मान से ही बचेगा इतिहास, अधिकार से मजबूत होगा भविष्य

झारखंड का निर्माण संघर्ष और बलिदान से हुआ है, इसे भुलाया नहीं जा सकता। आंदोलनकारियों का सम्मान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर जागरूक बनें, संवाद करें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और झारखंड की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने में भूमिका निभाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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