
#गिरिडीह #उद्योग #मजदूरआंदोलन : माले नेता राजेश सिन्हा ने आंदोलन के जरिए फर्जी व्यवस्था को चुनौती देने की चेतावनी दी।
गिरिडीह जिले में बालमुकुंद स्पोंज आयरन फैक्ट्री को लेकर भाकपा माले ने गंभीर आरोप लगाए हैं। माले नेता राजेश सिन्हा ने फैक्ट्री के जीएम और अन्य अधिकारियों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मजदूर आंदोलन के बाद उन पर झूठे आपराधिक मामले थोपे गए हैं। माले ने इस पूरे प्रकरण को मजदूरों के अधिकार और प्रदूषण से जुड़े मुद्दों से जोड़ते हुए कानूनी और आंदोलनात्मक लड़ाई की घोषणा की है।
- बालमुकुंद स्पोंज आयरन के जीएम और अधिकारियों पर फर्जी मुकदमे का आरोप।
- माले नेता राजेश सिन्हा ने कोर्ट और आंदोलन दोनों का रास्ता अपनाने की घोषणा।
- शांतिपूर्ण असंगठित मजदूर मोर्चा के आंदोलन के बाद मामला दर्ज होने का दावा।
- फैक्ट्री पर प्रदूषण और खेत बर्बाद करने के गंभीर आरोप।
- मजदूरों के मुआवजे और पुनर्बहाली की मांग।
- श्रम कार्यालय और प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल।
गिरिडीह जिले में बालमुकुंद स्पोंज आयरन फैक्ट्री एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भाकपा माले के वरिष्ठ नेता राजेश सिन्हा ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मजदूरों और ग्रामीणों के हित में किए गए शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अदालत में सबूतों के आधार पर न्याय मिलेगा, लेकिन सड़क पर आंदोलन के जरिए भी फर्जी व्यवस्था को पीछे धकेला जाएगा।
फर्जी मुकदमे का आरोप और कानूनी लड़ाई की घोषणा
राजेश सिन्हा ने कहा कि बालमुकुंद फैक्ट्री के जीएम पुरुषोत्तम तिवारी और अन्य अधिकारियों ने जानबूझकर उनके और संगठन के खिलाफ झूठे आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने कहा:
राजेश सिन्हा ने कहा: “फर्जी मुकदमा तो कर दिया गया, लेकिन अदालत में सबूत देना पड़ता है। न्यायालय में हमें न्याय मिलेगा, लेकिन इस फर्जी व्यवस्था को हम अपने आंदोलन से भी चुनौती देंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि थाना स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है, तो वे कोर्ट के माध्यम से मुकदमा दर्ज कराएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करेंगे।
मजदूर आंदोलन की पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि 27 जनवरी को पूर्व सूचना के आधार पर असंगठित मजदूर मोर्चा, जो भाकपा माले का मजदूर संगठन है, के नेतृत्व में बालमुकुंद स्पोंज आयरन फैक्ट्री के गेट के पास शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन किया गया था। इस आंदोलन में ग्रामीणों के साथ चार ऐसे मजदूर भी शामिल थे, जिन्हें बिना किसी सूचना के काम से हटा दिया गया था।
माले का दावा है कि इन मजदूरों के मुद्दे को लेकर दो महीने पहले भी श्रम कार्यालय को लिखित आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 27 जनवरी के आंदोलन के दिन भी श्रम कार्यालय को आवेदन सौंपा गया, परंतु कोई ठोस पहल नहीं की गई।
पूर्व सूचना के बावजूद विवाद
माले नेताओं ने बताया कि 27 जनवरी के कार्यक्रम को लेकर 20 जनवरी को उपायुक्त गिरिडीह, अनुमंडल अधिकारी और थाना को भी आवेदन देने का प्रयास किया गया था। संगठन के अनुसार, आवेदन देने वाले व्यक्ति की तबीयत खराब होने और पर्याप्त जानकारी साझा न हो पाने के कारण यह सूचना समय पर संगठन तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी, लेकिन इरादा गलत नहीं था और लिखित आवेदन मौजूद है।
माले का कहना है कि आंदोलन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके सभी रिकॉर्ड संगठन के पास उपलब्ध हैं।
जीएम से बातचीत और आंदोलन का शांतिपूर्ण समापन
राजेश सिन्हा ने बताया कि आंदोलन शुरू होने से पहले उन्होंने असंगठित मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय स्तर के नेता कन्हाई पांडेय से बात की थी। कन्हाई पांडेय ने जानकारी दी कि फैक्ट्री जीएम से बातचीत हुई है और वे सुबह दस बजे तक पहुंचेंगे।
इसके बाद राजेश सिन्हा ने स्वयं जीएम पुरुषोत्तम तिवारी से फोन पर बात की, जिसमें जीएम ने दस बजे तक फैक्ट्री पहुंचने की बात कही। इसी आधार पर आंदोलन स्थल पर लोग मौजूद रहे। राजेश सिन्हा ने आंदोलन शुरू होने से पहले मुफ्फसिल थाना प्रभारी को भी अपनी उपस्थिति की सूचना दी और फैक्ट्री के ठेकेदार व मजदूरों से थाना प्रभारी की बात कराई गई।
बाद में ठेकेदार और जीएम ने फोन पर कहा कि मजदूरों को वापस रखने में एक सप्ताह का समय लगेगा। इसके बाद राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय के नेतृत्व में सभी लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने घर लौट गए।
बाद में दर्ज हुआ गंभीर आरोपों वाला मुकदमा
माले का आरोप है कि आंदोलन समाप्त होने के बाद अचानक यह जानकारी मिली कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से दरवान से छिनतई, एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने, वाहन रोकने जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। राजेश सिन्हा ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया।
उन्होंने जिला प्रशासन से मुलाकात कर कहा:
“अगर दरवान या सुरक्षा कर्मी से छिनतई हुई है तो मेन गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। जीएम को कोर्ट में सबूत देना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि रंगदारी मांगने का आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत है और प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
प्रदूषण और किसानों के नुकसान का मुद्दा
माले नेता ने बालमुकुंद फैक्ट्री पर लगातार प्रदूषण फैलाने और आसपास के खेतों को बर्बाद करने का भी गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रदूषण के कारण किसानों की फसल प्रभावित हुई है और इसका मुआवजा फैक्ट्री प्रबंधन को देना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्या कारण है कि मजदूरों से 12 घंटे काम कराया जाता है और इसके बावजूद फैक्ट्री पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
श्रम कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल
राजेश सिन्हा ने कहा कि वे श्रम कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा करेंगे, क्योंकि सूचना और आवेदन के बावजूद समय पर संज्ञान नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि थाना मुकदमा दर्ज नहीं करता है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
साजिश और आंदोलन की चेतावनी
माले ने आरोप लगाया कि उनके बढ़ते जनाधार से घबराकर विरोधी साजिश कर रहे हैं। राजेश सिन्हा ने कहा कि भाकपा माले इस साजिश के पीछे के लोगों को चिन्हित करेगी और उनके खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई और तेज होगी।
न्यूज़ देखो: मजदूर आंदोलन बनाम औद्योगिक प्रबंधन
बालमुकुंद स्पोंज आयरन को लेकर उठा यह विवाद केवल एक मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजदूर अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही और औद्योगिक प्रदूषण जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है। माले के आरोपों और फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच अब प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा होगी। यह देखना अहम होगा कि जांच में सच्चाई कैसे सामने आती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
न्याय, अधिकार और जवाबदेही की लड़ाई
मजदूरों और किसानों की आवाज तभी मजबूत होगी, जब अन्याय के खिलाफ संगठित होकर खड़ा हुआ जाए। यह मामला बताता है कि लोकतांत्रिक आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया दोनों कितनी जरूरी हैं।
अब जरूरत है कि सच सामने आए और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो।
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