
#बानो #शहादत_दिवस : नवागांव में कार्यक्रम—स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर सम्मान दिया गया।
सिमडेगा के बानो प्रखंड के नवागांव में वीर बख्तर साय और मुंडल सिंह का शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर रौतिया समाज के लोगों ने झंडा पूजा और माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष राजेश सिंह सहित कई लोग शामिल हुए। शहीदों के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया गया।
- नवागांव के बेटांग चौक पर शहादत दिवस मनाया गया।
- राजेश सिंह (जिला अध्यक्ष) समेत कई लोग उपस्थित।
- झंडा पूजा और माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।
- वीर बख्तर साय और मुंडल सिंह के योगदान को याद किया गया।
- रौतिया समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत नवागांव के बेटांग चौक पर रौतिया जनजाति के जननायक स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद वीर बख्तर साय और वीर मुंडल सिंह का शहादत दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय रौतिया समाज के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने एकत्रित होकर शहीदों को याद किया और उनके बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम में सामूहिक रूप से झंडा पूजा और माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
झंडा पूजा और माल्यार्पण से श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत झंडा पूजा से हुई, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने भाग लिया। इसके बाद शहीदों की प्रतिमा और प्रतीक स्थल पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
एक सहभागी ने कहा: “शहीदों का बलिदान हमें हमेशा प्रेरणा देता है।”
शहीदों के योगदान को किया याद
इस अवसर पर वक्ताओं ने वीर बख्तर साय और मुंडल सिंह के साहस और बलिदान को याद किया। उन्होंने बताया कि इन दोनों स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जिला अध्यक्ष का संबोधन
अखिल भारतीय रौतिया समाज के सिमडेगा जिला अध्यक्ष राजेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा—
“वीर बख्तर साय और मुंडल सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने साहस से अंग्रेजों को छोटानागपुर क्षेत्र से खदेड़ दिया।”
उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों पर चलने की अपील की।
समाज की एकजुटता का प्रदर्शन
कार्यक्रम में रौतिया समाज के लोगों ने एकजुट होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिससे सामाजिक एकता और सामूहिक भावना का प्रदर्शन हुआ।
कार्यक्रम में मौजूद लोग
इस अवसर पर राजेश सिंह, उदेश्वर सिंह, बलराम सिंह, चैतु सिंह, रविन्द्र सिंह, रामप्रसाद सिंह, उमाशंकर सिंह, महेश सिंह, शंकर सिंह, विशम्बर सिंह, तपेश्वर सिंह, मालती देवी, शुलचना देवी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
इतिहास और विरासत का सम्मान
यह आयोजन केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को अपने इतिहास और विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बना।
युवाओं के लिए प्रेरणा
शहीदों की गाथा आज भी युवाओं को प्रेरित करती है कि वे अपने समाज और देश के लिए योगदान दें।
न्यूज़ देखो: इतिहास से सीखने का अवसर
बानो में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि शहीदों की स्मृति को जीवित रखना समाज के लिए जरूरी है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और इतिहास से जुड़ाव बना रहता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शहीदों के आदर्श अपनाएं
हमारे शहीदों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।
जरूरी है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।
समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
आइए, हम सभी उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
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