
#दुमका #नगर_चुनाव : फरवरी 2026 के निकाय चुनाव से पहले अध्यक्ष पद की दौड़ में राजनीतिक हलचल तेज।
फरवरी 2026 में प्रस्तावित दुमका नगर परिषद चुनाव से पहले शहर की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। अध्यक्ष पद की दौड़ में मिक्की झा की एंट्री के साथ मुकाबला और रोचक हो गया है। इस चुनाव में निर्दलीय और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों की भूमिका अहम मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह चुनाव दुमका की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेगा।
- दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज।
- अध्यक्ष पद की दौड़ में मिक्की झा, अभिषेक चौरसिया और अमिता रक्षित आमने-सामने।
- 2018 के नगर चुनाव में रणनीतिक भूमिका निभा चुके मिक्की झा पहली बार प्रत्याशी के रूप में सक्रिय।
- चुनाव दलीय आधार पर नहीं, फिर भी कड़ा और दिलचस्प मुकाबला।
- राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में मिक्की झा की दावेदारी मजबूत।
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 को लेकर शहर की राजनीति इन दिनों पूरी तरह गरमा चुकी है। फरवरी माह में संभावित चुनाव से पहले अध्यक्ष पद के दावेदारों की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। इस बार का चुनाव भले ही दलीय आधार पर न हो, लेकिन स्थानीय समीकरण, व्यक्तिगत पकड़ और पूर्व अनुभव इसे बेहद दिलचस्प बना रहे हैं।
अध्यक्ष पद की दौड़ में तीन प्रमुख चेहरे
इस बार अध्यक्ष पद की दौड़ में मिक्की झा, अभिषेक चौरसिया और पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अमिता रक्षित के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। तीनों ही चेहरे दुमका की राजनीति में अपनी-अपनी पहचान रखते हैं और स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद रोचक होने की संभावना है।
2018 की रणनीति से 2026 की दावेदारी तक
मिक्की झा का नाम दुमका की राजनीति में नया नहीं है। वर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी की जीत की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वे पर्दे के पीछे रहकर चुनावी गणित साधते दिखे थे, लेकिन इस बार वे खुद मैदान में उतरने को तैयार हैं। माना जा रहा है कि जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और रणनीतिक समझ उन्हें बढ़त दिला सकती है।
दलीय चुनाव नहीं, फिर भी सियासी जोर
हालांकि यह नगर परिषद चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़ा जाएगा, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक सरगर्मी किसी दलीय चुनाव से कम नहीं है। स्थानीय नेता, सामाजिक संगठन और प्रभावशाली वर्ग अपने-अपने स्तर पर समीकरण साधने में जुट गए हैं। व्यक्तिगत छवि, विकास का रिकॉर्ड और स्थानीय मुद्दों की समझ इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
क्यों मजबूत मानी जा रही है मिक्की झा की स्थिति
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मिक्की झा की दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति, सामाजिक गतिविधियों और चुनावी रणनीति से जुड़े रहे हैं। उनका नेटवर्क, वार्ड स्तर तक पकड़ और पूर्व अनुभव उन्हें अन्य दावेदारों से अलग बनाता है। साथ ही, युवा मतदाताओं और स्थानीय व्यवसायिक वर्ग में भी उनकी स्वीकार्यता की चर्चा है।
अन्य दावेदारों की भी तैयारी तेज
वहीं अभिषेक चौरसिया और अमिता रक्षित भी अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। पूर्व अध्यक्ष होने के नाते अमिता रक्षित के पास प्रशासनिक अनुभव है, जबकि अभिषेक चौरसिया नई सोच और सक्रियता के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा।
न्यूज़ देखो: स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेगा यह चुनाव
दुमका नगर परिषद चुनाव 2026 केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि शहर की आगामी विकास दिशा तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है। मिक्की झा की एंट्री ने मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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