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बानो प्रखंड में मनरेगा कर्मियों की चार दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू, लंबित मांगों को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

#बानो #मनरेगा_हड़ताल : लंबित मांगों के समाधान के लिए मनरेगा कर्मियों ने चार दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू की।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर मनरेगा कर्मियों ने सोमवार से चार दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी। प्रखंड विकास कार्यालय के समीप बीपीओ, लेखा सहायक और रोजगार सेवकों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी लंबित मांगों को सरकार के समक्ष रखा। कर्मियों का कहना है कि वर्षों से सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और समयबद्ध मानदेय भुगतान की मांग लंबित है। सरकार द्वारा समाधान नहीं मिलने पर 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।

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  • बानो प्रखंड विकास कार्यालय के समीप मनरेगा कर्मियों की चार दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू।
  • हड़ताल में बीपीओ, लेखा सहायक और रोजगार सेवक सहित सभी मनरेगा कर्मियों की भागीदारी।
  • कर्मियों की मुख्य मांगें — सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण नीति, ग्रेड पे और नियमित वेतन
  • कई जिलों में छह माह से अधिक समय से मानदेय बकाया होने का आरोप।
  • मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 12 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार से मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चार दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी। प्रखंड विकास कार्यालय के समीप आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में प्रखंड क्षेत्र के सभी मनरेगा कर्मियों ने भाग लिया और सरकार से अपनी मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। हड़ताल के दौरान कर्मियों ने बताया कि वर्षों से उनकी समस्याओं को लेकर सरकार को अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

लंबित मांगों को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

हड़ताल के दौरान बीपीओ, लेखा सहायक तथा रोजगार सेवकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। मनरेगा कर्मियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण नीति का निर्माण, ग्रेड पे, नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, हेल्थ इंश्योरेंस, अनुकंपा नियुक्ति और समयबद्ध मानदेय भुगतान शामिल हैं।

कर्मियों ने बताया कि इन मांगों को लेकर कई बार राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा गया है और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से भी संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर समाधान की अपील की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस और परिणामकारी निर्णय सामने नहीं आया है।

हड़ताली मनरेगा कर्मियों ने कहा: “हम वर्षों से अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हमारी समस्याओं पर अब तक गंभीरता से विचार नहीं किया गया है।”

छह माह से अधिक समय से मानदेय बकाया

हड़ताल में शामिल कर्मियों ने बताया कि झारखंड के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों का छह महीने से अधिक समय से मानदेय बकाया है। इस स्थिति के कारण कई कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने कहा कि नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवार के भरण-पोषण में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लगातार बढ़ते कार्यभार और सीमित संसाधनों के कारण भी कर्मियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

कर्मियों ने कहा: “मानदेय का लंबे समय तक बकाया रहना हमारे लिए बड़ी समस्या बन गया है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है, फिर भी हम पूरी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।”

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अतिरिक्त कार्यभार और सुरक्षा का अभाव

मनरेगा कर्मियों ने यह भी बताया कि उन्हें लगातार अतिरिक्त और असंगत कार्यभार दिया जा रहा है। कई बार बिना किसी अतिरिक्त संसाधन और पारिश्रमिक के भी उन्हें अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।

फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मियों ने कहा कि उन्हें कई बार प्रतिकूल परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है, लेकिन उनके लिए किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था या स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध नहीं है।

कर्मियों के अनुसार, यदि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और उचित सुविधाएं मिलें तो वे और बेहतर तरीके से योजना के क्रियान्वयन में योगदान दे सकते हैं।

112 मनरेगा कर्मियों की मृत्यु का दावा

संघ के अनुसार झारखंड में अब तक करीब 112 मनरेगा कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन उनके आश्रितों को किसी प्रकार की सहायता या लाभ नहीं मिल पाया है।

कर्मियों ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे मनरेगा कर्मियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि मृत कर्मियों के परिवारों को उचित मुआवजा और सहायता दी जाए।

इसके साथ ही राज्य मनरेगा कोषांग में कार्यरत पदाधिकारियों के समान वेतन संरचना लागू करने की मांग भी दोहराई गई।

मनरेगा योजना में कर्मियों की अहम भूमिका

मनरेगा कर्मियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे ही योजना के क्रियान्वयन की मुख्य कड़ी हैं।

इसके बावजूद यदि उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जाता है और उनकी समस्याओं को अनदेखा किया जाता है तो इससे योजना के प्रभावी संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

कर्मियों ने कहा: “मनरेगा योजना को सफल बनाने में जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की भूमिका सबसे अहम है, इसलिए हमारी समस्याओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।”

अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि 9, 10 और 11 मार्च 2026 को राज्यभर के सभी मनरेगा कर्मी सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि के भीतर सरकार की ओर से मांगों पर ठोस, लिखित और समयबद्ध समाधान नहीं दिया जाता है तो 12 मार्च 2026 से सभी मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

हड़ताल में कई कर्मी रहे मौजूद

इस विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के दौरान कई मनरेगा कर्मी उपस्थित रहे। इनमें बीपीओ विक्रम सिंह, लेखा सहायक दीपक बड़ाइक, प्रखंड अध्यक्ष रियासत मियां, रोजगार सेवक इशाक, किशोर टोप्पो, अमित सिंह, रूबी कुमारी, दिव्य प्रकाश, बसंत मड़की और प्रमोद टोप्पो शामिल थे।

सभी कर्मियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई और सरकार से जल्द समाधान की मांग की।

न्यूज़ देखो: जमीनी कर्मियों की अनदेखी कब तक

मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की सफलता जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों पर निर्भर करती है। यदि वही कर्मी लंबे समय से मानदेय, सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

सरकार के लिए जरूरी है कि वह इन मांगों पर गंभीरता से विचार करे और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करे, ताकि योजना का कार्य प्रभावित न हो और कर्मियों में विश्वास बना रहे। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 12 मार्च से पहले सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकार और सम्मान के लिए जागरूक बने समाज

किसी भी विकास योजना की असली ताकत वह लोग होते हैं जो उसे जमीन पर लागू करते हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रमों में काम करने वाले कर्मियों की समस्याओं को समझना और उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

यदि किसी व्यवस्था में काम करने वाले लोग ही असुरक्षित महसूस करें तो विकास की गति प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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