
#रांची #मनरेगा_आंदोलन : सांकेतिक हड़ताल के तीसरे दिन प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक — मांगें नहीं मानने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय।
झारखंड में मनरेगा कर्मियों की चल रही तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के तीसरे दिन रांची में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार की ओर से मांगों पर ठोस पहल नहीं होने पर चिंता जताई गई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 12 मार्च 2026 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। संघ नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
- रांची के मोरहाबादी ऑक्सीजन पार्क में मनरेगा कर्मचारी संघ की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक आयोजित।
- तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के तीसरे दिन राज्यभर के प्रतिनिधियों ने की चर्चा।
- प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने की घोषणा की।
- नियमितीकरण, बकाया मानदेय और सामाजिक सुरक्षा समेत कई मांगों पर सरकार से नाराजगी।
- राज्य के सभी जिलों में आंदोलन को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
झारखंड में मनरेगा कर्मियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के तीसरे दिन रांची के मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए संघ के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान मनरेगा कर्मियों की लंबित मांगों और राज्य सरकार की ओर से अब तक किसी ठोस पहल नहीं किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 12 मार्च 2026 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखी जाएगी।
तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद लिया गया बड़ा फैसला
मनरेगा कर्मियों द्वारा राज्यभर में तीन दिनों तक सांकेतिक हड़ताल की गई। इस दौरान कर्मियों ने सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
हालांकि संघ का कहना है कि इन तीन दिनों के दौरान सरकार की ओर से कोई ठोस या सकारात्मक पहल सामने नहीं आई। इसी कारण प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार जल्द समाधान की दिशा में पहल नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय का बयान
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि मनरेगा कर्मी लंबे समय से अपनी मूलभूत मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा: “मनरेगा कर्मी लंबे समय से बकाया मानदेय, नियमितीकरण नीति, समान वेतन संरचना, सामाजिक सुरक्षा और मृत कर्मियों के आश्रितों को सहायता जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार द्वारा इन मुद्दों पर गंभीर पहल नहीं की गई है।”
उन्होंने कहा कि लगातार उपेक्षा के कारण मनरेगा कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
सरकार की उदासीनता पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान संघ के नेताओं ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मनरेगा कर्मियों ने हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाया है।
प्रदेश महामंत्री दीपक महतो ने कहा कि संघ ने कई बार सरकार के साथ संवाद की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
प्रदेश महामंत्री दीपक महतो ने कहा: “संघ ने हमेशा संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान की पहल की है, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण कर्मियों को आंदोलन के रास्ते पर जाना पड़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि मनरेगा कर्मियों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और जब तक इन पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सभी जिलों में आंदोलन को मजबूत करने की रणनीति
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी जिलों में मनरेगा कर्मी एकजुट होकर आंदोलन को और मजबूत करेंगे।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार जल्द समाधान की दिशा में पहल नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि इस आंदोलन का उद्देश्य केवल कर्मियों के अधिकारों की रक्षा करना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना को मजबूत बनाना भी है।
सरकार से फिर की गई सकारात्मक पहल की अपील
बैठक के अंत में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से एक बार फिर अपील की कि मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए।
संघ का कहना है कि यदि सरकार समय रहते सकारात्मक कदम उठाती है, तो इस आंदोलन का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है।
संघ के नेताओं ने कहा कि हजारों मनरेगा कर्मी ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना को जमीन पर लागू करने का काम करते हैं, इसलिए उनके अधिकारों और समस्याओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।
न्यूज़ देखो: मनरेगा व्यवस्था और कर्मियों के भविष्य का सवाल
मनरेगा योजना ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस योजना के संचालन में लगे कर्मियों की समस्याएं यदि लंबे समय तक अनसुलझी रहती हैं, तो इसका असर सीधे ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और कर्मचारी संघ के बीच संवाद और समाधान की दिशा में ठोस पहल बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और कर्मियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की आवाज तभी मजबूत होती है जब समाज जागरूक हो
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संगठन और जागरूकता ही किसी भी समस्या के समाधान की पहली सीढ़ी होती है। जब कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाते हैं, तो यह केवल उनके हितों का सवाल नहीं होता, बल्कि व्यवस्था की मजबूती का भी संकेत होता है।
यदि आप भी ग्रामीण विकास, रोजगार योजनाओं और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं, तो अपनी आवाज जरूर उठाएं। जागरूक नागरिक ही बेहतर नीतियों और जवाबदेही की नींव रखते हैं।
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