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मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से ठप हुआ विकास कार्य, मांगों को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव

#मेदिनीनगर #मनरेगा_हड़ताल : कर्मियों ने भविष्य, सम्मान और अधिकार के लिए आंदोलन तेज किया।

पलामू जिले में मनरेगा कर्मियों ने 12 मार्च से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन के कारण जिले भर में मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। कर्मियों ने सेवा स्थायीकरण, वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। आंदोलन को लेकर प्रशासन और सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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  • 12 मार्च से पलामू में मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी।
  • सभी प्रखंडों में मनरेगा कार्य पूरी तरह ठप, विकास कार्य प्रभावित।
  • जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने आंदोलन को बताया सम्मान और भविष्य की लड़ाई
  • कर्मियों की प्रमुख मांगें—स्थायीकरण, वेतन भुगतान, सेवा नियमावली
  • सरकार पर उपेक्षा का आरोप, आंदोलन उग्र होने की चेतावनी।

पलामू जिले में मनरेगा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने अब व्यापक रूप ले लिया है। 12 मार्च से शुरू हुए इस आंदोलन के कारण जिले के सभी प्रखंडों में मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, तालाब, कुआं निर्माण जैसे कई जरूरी काम रुक जाने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हड़ताल स्थल पर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन ने अब प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।

आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन

हड़ताल में शामिल कर्मियों के साथ-साथ संघ के पदाधिकारी भी लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विभिन्न प्रखंडों से आए कर्मियों ने एक मंच पर एकत्र होकर अपनी आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायित्व और सम्मान नहीं मिल पाया है।

इस आंदोलन के कारण न केवल सरकारी योजनाओं की गति प्रभावित हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है।

जिलाध्यक्ष पंकज सिंह का तीखा संबोधन

संघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा:

पंकज सिंह ने कहा: “यह आंदोलन केवल मांगों का नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व, भविष्य और सम्मान की लड़ाई है। हमने वर्षों तक मनरेगा को मजबूत किया, लेकिन आज भी हमारी कोई स्थायी पहचान नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा:

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“हम अल्प मानदेय पर लगातार काम कर रहे हैं, जबकि हमसे अतिरिक्त कार्य भी लिए जाते हैं। कई कर्मियों की मृत्यु तक हो गई, लेकिन उनके परिवारों को कोई सहायता नहीं मिली। जब तक हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।”

वरीय नेताओं ने भी उठाई आवाज

संघ के अन्य वरीय नेताओं ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मनरेगा कर्मी ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं, लेकिन उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।

नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। साथ ही उन्होंने कर्मियों से अपील की कि वे एकजुट रहकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखें।

प्रमुख मांगों को लेकर स्पष्ट रुख

मनरेगा कर्मियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सरकार के सामने रखा है। इनमें प्रमुख रूप से:

  • सेवा का स्थायीकरण
  • स्पष्ट सेवा नियमावली का निर्माण
  • बकाया मानदेय का भुगतान
  • समान वेतन संरचना लागू करना
  • सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

कर्मियों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

बढ़ता आक्रोश और निर्णायक मोड़

हड़ताल में शामिल कर्मियों के बीच सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण विकास की योजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें उचित सम्मान और सुरक्षा नहीं दी जा रही है।

कर्मियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पलामू में यह हड़ताल अब केवल एक विरोध नहीं, बल्कि अधिकारों और सम्मान की लड़ाई बन चुकी है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम व्यवस्था का सवाल

मनरेगा कर्मियों की यह हड़ताल एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास योजनाओं को संचालित करने वाले कर्मियों की उपेक्षा की जा सकती है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ेगा। सरकार को इस मुद्दे पर जल्द और ठोस कदम उठाने होंगे। क्या प्रशासन समय रहते समाधान निकाल पाएगा या आंदोलन और तेज होगा—यह देखना अहम होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों के लिए आवाज उठाना भी जिम्मेदारी है

जब मेहनत करने वाले लोगों को उनका हक नहीं मिलता, तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है। यह केवल कर्मियों की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि ऐसे मुद्दों को समझे और समर्थन करे।

अगर हम विकास चाहते हैं, तो उन लोगों की समस्याओं को भी समझना होगा, जो इसे जमीन पर उतारते हैं। जागरूक बनें, सही मुद्दों पर अपनी राय रखें और बदलाव का हिस्सा बनें।

अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और जागरूक समाज के निर्माण में भागीदारी निभाएं।

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Nitish Kumar Paswan

पांकी पलामू

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