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सड़क हादसे में जान गंवाने वाले किसान के परिजनों से मिले मुख्तार आलम, हर संभव मदद का दिया भरोसा

#डुमरी #मानवीयपहल : सड़क दुर्घटना में मृत किसान अनुज लकड़ा के परिवार से मिलकर सहायता और बच्चों की पढ़ाई का भरोसा दिया।

गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के करमटोली गांव में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसान अनुज लकड़ा के परिवार से असंगठित कामगार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सह 20 सूत्री सदस्य मुख्तार आलम ने मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही सरकारी मुआवजा दिलाने और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी लेने की बात कही।

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  • डुमरी प्रखंड के करमटोली गांव में मृतक किसान के परिवार से मिले मुख्तार आलम
  • करीब 5 महीने पहले सड़क दुर्घटना में हुई थी अनुज लकड़ा की मौत
  • मृतक किसान अपने पीछे चार छोटे बच्चों वाला परिवार छोड़ गए।
  • सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू
  • बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सहायता का दिया भरोसा।

गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित करमटोली गांव में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसान अनुज लकड़ा के परिजनों से असंगठित कामगार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सह 20 सूत्री सदस्य मुख्तार आलम ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।

सड़क दुर्घटना में हुई थी किसान की मौत

जानकारी के अनुसार करीब पांच महीने पहले करमटोली निवासी अनुज लकड़ा अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अनुज लकड़ा पेशे से किसान थे और खेती-बारी के माध्यम से ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।

उनके अचानक निधन के बाद परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मृतक अपने पीछे चार छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनकी जिम्मेदारी अब परिवार के अन्य सदस्यों पर आ गई है।

मुआवजा दिलाने की पहल

परिवार की स्थिति को देखते हुए मुख्तार आलम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि सरकारी नियमों के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि दिलाने के लिए उन्होंने परिजनों से सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी

मुख्तार आलम ने यह भी कहा कि मृतक के चारों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए समुचित व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी ली जाएगी, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। साथ ही परिवार को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक कमाऊ सदस्य के चले जाने से परिवार पर जो संकट आता है, उसकी भरपाई तो नहीं की जा सकती, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार की बुनियादी जरूरतों में कोई कमी न रहे।

न्यूज़ देखो: मुश्किल समय में सहारा बनना सबसे बड़ी मानवीय जिम्मेदारी

किसी परिवार के कमाऊ सदस्य की अचानक मृत्यु पूरे परिवार के लिए गहरा संकट लेकर आती है। ऐसे समय में समाज और जनप्रतिनिधियों का सहयोग उस परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है। डुमरी के करमटोली गांव में भी यही प्रयास देखने को मिला, जहां पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता दिलाने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की पहल की जा रही है।

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जरूरतमंदों की मदद से बनता है मजबूत समाज

समाज की मजबूती इसी में है कि कठिन समय में जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हाथ आगे बढ़ाए जाएं। छोटे-छोटे प्रयास भी किसी परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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Aditya Kumar

डुमरी, गुमला

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