#ईसरीगिरिडीह #धार्मिकप्रवचन : पारसनाथ जैन विद्यालय में मुनि वसुनंदी जी का आशीर्वचन—छात्रों को संस्कार और शाकाहार का संदेश।
गिरिडीह के ईसरी स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन उच्च एवं मध्य विद्यालय में जैन मुनि वसुनंदी जी महाराज का प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, संस्कार और शाकाहार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और जैन समाज के लोग उपस्थित रहे। मुनिश्री ने विद्यालय परिवार को आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
- ईसरी जैन विद्यालय में मुनि वसुनंदी जी का प्रवचन कार्यक्रम।
- 25 दिगंबर मुनि व आर्यिकाएं भी कार्यक्रम में शामिल।
- शिक्षा, संस्कार और शाकाहार पर दिया विशेष संदेश।
- शिक्षकों को समाज का आधार बताया गया।
- विद्यालय परिवार को आशीर्वाद और रचना भेंट की गई।
- कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं व समाजजन उपस्थित।
गिरिडीह जिले के ईसरी स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन उच्च एवं मध्य विद्यालय परिसर में जैन मुनि वसुनंदी जी महाराज का भव्य प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं और जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मुनिश्री अपने साथ 25 पिच्छीधारी दिगंबर मुनि एवं आर्यिकाओं के साथ पहुंचे थे, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत आर्यिका वर्धश्वनी माता जी द्वारा मंगलाचरण के साथ की गई। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि मानव निर्माण की आधारशिला होते हैं।
वर्धश्वनी माता जी ने कहा: “विद्यालय एक ऐसी फैक्ट्री है जहाँ सम्पूर्ण मानव का निर्माण होता है।”
मुनि वसुनंदी जी का प्रेरणादायक प्रवचन
मुनि वसुनंदी जी महाराज ने अपने प्रवचन में शिक्षा, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमें “इंडिया” के बजाय “भारत” शब्द का प्रयोग करना चाहिए, जिससे अपनी संस्कृति और पहचान को सशक्त बनाया जा सके।
मुनि वसुनंदी जी महाराज ने कहा: “शिक्षक समाज का आधार होते हैं, वे शिष्ट, क्षमाशील और कर्तव्यनिष्ठ होते हैं।”
उन्होंने छात्रों को शुद्ध शाकाहारी भोजन अपनाने और अच्छे संस्कारों का पालन करने की प्रेरणा दी, जिससे वे जीवन में सफल और आदर्श नागरिक बन सकें।
विद्यालय परिवार ने लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के मध्य एवं उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील कुमार जैन ने मुनिश्री की चरणवंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि महाराज ने विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं को अपनी रचना भेंट की और पूरे विद्यालय परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में शामिल गणमान्य लोग
इस धार्मिक आयोजन में जैन समाज और विद्यालय परिवार के कई सदस्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से प्रदीप जैन, प्रिय जिनेश जैन, दीपक जैन, विवेक जैन, संगीता जैन, नीता जैन, रश्मि जैन, सरिता जैन सहित अन्य समाजजन शामिल थे।
विद्यालय के शिक्षक अशोक कुमार सिन्हा, नेम कुमार जैन, राजेश कुमार ठाकुर, अंकित जैन, महेश साव, शक्ति प्रसाद महतो, महेश कुमार, जितेंद्र प्रसाद तथा शिक्षिकाएं ममता कुमारी, मनोरमा कुमारी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संजीव जैन ने किया।
शिक्षा और संस्कार का संदेश
इस प्रवचन कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ, बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के महत्व को समझने का अवसर भी मिला। ऐसे आयोजन विद्यालय के वातावरण को सकारात्मक और प्रेरणादायक बनाते हैं।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का समन्वय जरूरी
ईसरी के जैन विद्यालय में आयोजित यह प्रवचन कार्यक्रम यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें नैतिकता और संस्कारों का समावेश भी जरूरी है। मुनि वसुनंदी जी के विचार छात्रों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक हैं और समाज को सही दिशा देने में सहायक हो सकते हैं। ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कारों से ही बनता है उज्ज्वल भविष्य
शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसमें संस्कार और नैतिकता का समावेश हो। छात्रों को न केवल पढ़ाई में बल्कि अपने आचरण में भी उत्कृष्ट बनने का प्रयास करना चाहिए।
अपने जीवन में अच्छे मूल्यों को अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
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