
#सिमडेगा #राष्ट्रीय_लोकअदालत : व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत में हजारों मामलों का आपसी सहमति से समाधान हुआ।
सिमडेगा व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। लोक अदालत के माध्यम से 21 हजार से अधिक मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया और करोड़ों रुपये की समझौता राशि तय हुई।
- सिमडेगा व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत।
- कुल 21,183 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
- मामलों में 1 करोड़ 15 लाख 61 हजार 603 रुपये की समझौता राशि तय।
- उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा, उपायुक्त कंचन सिंह और एसपी श्रीकांत एस. खोटरे ने किया।
- मामलों के निष्पादन के लिए छह अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया।
सिमडेगा जिले के व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर किया गया था। राज्य स्तर पर इस कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने किया।
स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजीव कुमार सिन्हा, उपायुक्त कंचन सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे, एडीजे नरंजन सिंह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम सहित अन्य अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
त्वरित और सुलभ न्याय का माध्यम है लोक अदालत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है।
राजीव कुमार सिन्हा ने कहा: “राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय मिलता है। आपसी समझौते के आधार पर विवादों का समाधान होने से समाज में सौहार्द और आपसी विश्वास भी मजबूत होता है।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने लंबित मामलों के समाधान के लिए लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
21 हजार से अधिक मामलों का हुआ निपटारा
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 21,183 मामलों का आपसी सहमति से निष्पादन किया गया।
इन मामलों में कुल 1 करोड़ 15 लाख 61 हजार 603 रुपये की समझौता राशि तय की गई। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया से न केवल अदालतों का बोझ कम होता है बल्कि लोगों को भी लंबे समय तक न्यायालय के चक्कर लगाने से राहत मिलती है।
विभिन्न श्रेणियों के मामलों का समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत में अलग-अलग प्रकार के मामलों का निपटारा किया गया। इनमें बैंक से संबंधित 358 मामले, बिजली से संबंधित 12 मामले, मोटर दुर्घटना से जुड़े 6 मामले, चेक बाउंस से संबंधित मामले तथा अन्य आपराधिक प्रकृति के 47 मामले शामिल थे।
इसके अलावा प्री लिटिगेशन से जुड़े 20,759 मामलों का भी समाधान किया गया। इन मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा किया गया, जिससे पक्षकारों को त्वरित न्याय मिल सका।
मामलों के निपटारे के लिए छह बेंचों का गठन
राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए कुल छह बेंचों का गठन किया गया था। प्रत्येक बेंच में न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ताओं की टीम शामिल थी, जिन्होंने मामलों की सुनवाई कर आपसी समझौते के आधार पर निपटारा कराया।
पहली बेंच में एडीजे नरंजन सिंह के साथ अधिवक्ता कैलाश प्रसाद एवं रामप्रीत प्रसाद शामिल थे।
दूसरी बेंच में सीजेएम निताशा बारला के साथ अधिवक्ता प्रद्युमन सिंह एवं संत प्रसाद सिंह मौजूद थे।
तीसरी बेंच में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुभाष बाड़ा के साथ अधिवक्ता सुरेश प्रसाद तथा असिस्टेंट एलएडीसीएस सुकोमल शामिल थे।
चौथी बेंच में सदर अंचल अधिकारी इम्तियाज अहमद, अंचल निरीक्षक किरण डांग और अधिवक्ता सरयू बड़ाइक मौजूद थे।
पांचवीं बेंच में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष रमेश कुमार श्रीवास्तव, सदस्य लक्ष्मीकांत प्रसाद तथा प्रिय रंजन कुमार शामिल थे।
छठी बेंच में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रविंद्र कुमार तथा अधिवक्ता विपिन मौजूद रहे।
जागरूकता के लिए लगाए गए स्टॉल
राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), जिला पुलिस, समाज कल्याण विभाग सहित कई विभागों द्वारा व्यवहार न्यायालय परिसर में जागरूकता स्टॉल भी लगाए गए।
इन स्टॉलों के माध्यम से आम लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रमों से लोगों में कानूनी जागरूकता भी बढ़ती है।
कार्यक्रम में अपर समाहर्ता ज्ञानेंद्र, एसडीओ प्रभात रंजन ज्ञानी सहित कई अधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो: लोक अदालत से न्याय व्यवस्था को मिलती है गति
राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसके माध्यम से लंबे समय से लंबित मामलों का त्वरित समाधान संभव हो पाता है और लोगों को कम खर्च में न्याय मिलता है। सिमडेगा में एक ही दिन में हजारों मामलों का निपटारा होना इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाता है। हालांकि यह भी जरूरी है कि लोग जागरूक होकर अपने विवादों को समय रहते सुलझाने के लिए ऐसे मंचों का अधिक उपयोग करें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
न्याय और जागरूकता से मजबूत होता है समाज
कानून की जानकारी और न्याय तक आसान पहुंच किसी भी समाज को मजबूत बनाती है। लोक अदालत जैसे मंच आम लोगों को यह भरोसा दिलाते हैं कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं बल्कि सुलभ भी है।
यदि हम अपने विवादों को समझदारी और आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास करें तो समाज में शांति और भाईचारा मजबूत होता है।
आप भी अपने अधिकारों और कानूनी विकल्पों के प्रति जागरूक बनें। इस खबर को अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें, अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें और समाज में न्याय और जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।






