
#आनंदपुर #नवरात्र_अनुष्ठान : कलश स्थापना के साथ पूजा आरंभ — जलयात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में नवरात्र के पावन अवसर पर कलश स्थापना के साथ पूजा-अर्चना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही भगवती राजराजेश्वरी मंदिर में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ की शुरुआत हुई, जिसके पहले दिन संगम से जलयात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य आध्यात्मिक जागरूकता और लोककल्याण की कामना है।
- विश्व कल्याण आश्रम, आनंदपुर में नवरात्र का शुभारंभ।
- ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी की देखरेख में कलश स्थापना संपन्न।
- शतचंडी यज्ञ के लिए संगम से निकली भव्य जलयात्रा।
- अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन, दशमी पर भंडारे का आयोजन।
- कई पुजारियों और यजमानों की उपस्थिति में अनुष्ठान प्रारंभ।
आनंदपुर स्थित विश्व कल्याण आश्रम में नवरात्र के पावन अवसर पर धार्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। शंकराचार्य स्वामी द्वारा स्थापित इस आश्रम में विधिवत कलश स्थापना के साथ नवरात्र अनुष्ठान की शुरुआत की गई। आश्रम परिसर स्थित भगवती राजराजेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ।
कलश स्थापना के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ
नवरात्र के प्रथम दिन आश्रम प्रभारी ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी की देखरेख में कलश स्थापना की गई। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न हुई और देवी भगवती का आह्वान किया गया।
ब्रह्मचारी विश्वानन्द जी ने कहा: “नवरात्र के दौरान प्रतिदिन भगवती का विशेष श्रृंगार, पूजन और आरती की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी।”
उन्होंने बताया कि पूरे नौ दिनों तक मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
नौ दिनों तक विशेष धार्मिक कार्यक्रम
नवरात्र अनुष्ठान के अंतर्गत प्रत्येक दिन देवी भगवती का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। साथ ही आरती, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
अष्टमी और नवमी के दिन विशेष रूप से बटुक, कन्या और सौभाग्यवती पूजन किया जाएगा। वहीं दशमी के दिन विधिवत विसर्जन के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
शतचंडी यज्ञ का भी हुआ शुभारंभ
इसी क्रम में भगवती राजराजेश्वरी मंदिर में नौ दिवसीय शतचंडी यज्ञ का भी शुभारंभ किया गया। यज्ञ का पहला दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, जिसमें संगम स्थल से जलयात्रा निकाली गई।
यज्ञ के आचार्य बसंत बिल्थरे एवं सहयोगी पुजारियों ने कोयल-कारो संगम में विधिवत पूजा-अर्चना कर जल भरण किया। इसके बाद जलयात्रा के रूप में श्रद्धालु जल लेकर मंदिर पहुंचे।
संगम से निकली भव्य जलयात्रा
जलयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। भक्तगण भक्ति गीतों और जयकारों के साथ संगम से मंदिर तक पहुंचे। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
यज्ञ की शुरुआत पंचांग पूजा, क्षेत्रपाल पूजा, 64 योगिनी पूजन तथा आवाहित देवताओं की पूजा के साथ की गई। साथ ही ब्राह्मणों का वरण कर विधिवत अनुष्ठान आरंभ किया गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पुजारी रहे मौजूद
इस धार्मिक आयोजन में कई पुजारी और यजमान उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से हरवंश तिवारी, अनन्त पाठक, ललित चौबे, आयुष पांडे, वेद प्रकाश पांडे, मनोरंजन पंडा, शिव प्रताप सिंहदेव, मनोज सिंहदेव, संजीव गंताइत, प्रणब नंद समेत कई श्रद्धालु शामिल हुए।
सभी ने मिलकर यज्ञ और पूजा-अर्चना को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। पूरे आयोजन में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण
विश्व कल्याण आश्रम में आयोजित यह नवरात्र अनुष्ठान और शतचंडी यज्ञ हमारी समृद्ध धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में एकता और सकारात्मकता का संदेश भी देते हैं। प्रशासन और समाज के सहयोग से ऐसे कार्यक्रमों का सफल आयोजन सराहनीय है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं
नवरात्र केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का अवसर भी है। ऐसे आयोजनों में भाग लेते समय अनुशासन, स्वच्छता और सहयोग का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
हम सभी को चाहिए कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश फैलाएं। यही हमारी संस्कृति की पहचान है।
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