लापरवाही या सिस्टम का शिकार? डुमरी में टीकाकरण के 90 मिनट बाद मासूम की मौत से हड़कंप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

लापरवाही या सिस्टम का शिकार? डुमरी में टीकाकरण के 90 मिनट बाद मासूम की मौत से हड़कंप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

author Aditya Kumar
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#डुमरी #टीकाकरण_मौत : टीका लगने के कुछ ही देर बाद बिगड़ी हालत, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया।

गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के लठाटोली गांव में सरकारी टीकाकरण अभियान के दौरान एक माह छह दिन की बच्ची की मौत से हड़कंप मच गया है। परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में टीका लगने के लगभग 90 मिनट बाद बच्ची की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। घटना ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि आकांक्षी प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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  • डुमरी प्रखंड के लठाटोली गांव में टीकाकरण के बाद मासूम की मौत।
  • बच्ची की उम्र मात्र 1 महीना 6 दिन बताई गई।
  • एएनएम सुषमा टोप्पो द्वारा टीका लगाए जाने का आरोप।
  • परिजनों ने निगरानी और प्राथमिक उपचार में लापरवाही का लगाया आरोप।
  • मुखिया ज्योति बेहर और ग्रामीणों ने नर्स पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए।
  • स्वास्थ्य विभाग ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।

गुमला जिले के आकांक्षी प्रखंड डुमरी में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। लठाटोली गांव में नियमित टीकाकरण अभियान के दौरान एक माह छह दिन की बच्ची की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्ची को शनिवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में टीका लगाया गया था। टीकाकरण के करीब डेढ़ घंटे के भीतर ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

टीकाकरण के बाद बिगड़ी हालत

परिजनों के अनुसार, बच्ची को नियमित टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, जहां एएनएम सुषमा टोप्पो ने टीका लगाया। परिजनों का आरोप है कि टीका लगने के कुछ ही समय बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी, शरीर में अकड़न आ गई और वह लगातार रोने लगी। आरोप है कि टीकाकरण के बाद की अनिवार्य निगरानी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बच्ची की बिगड़ती हालत को गंभीरता से नहीं लिया गया।

परिजनों का आरोप: संवेदनहीनता बनी मौत की वजह

आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्राथमिक उपचार या रेफरल की व्यवस्था की जाती, तो शायद बच्ची की जान बच सकती थी। परिजनों ने कहा:

परिजनों ने कहा: “सरकार सुरक्षित टीकाकरण की बात करती है, लेकिन अगर व्यवस्था इतनी लापरवाह है तो हमारे बच्चे कैसे सुरक्षित रहेंगे?”

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन दवाओं, ऑक्सीजन और त्वरित इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

मुखिया ने लगाए गंभीर आरोप

घटना की जानकारी मिलने पर मुखिया ज्योति बेहर स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने कहा:

ज्योति बेहर ने कहा: “लठाटोली में टीकाकरण के दौरान बच्ची को लगभग डेढ़ बजे टीका दिया गया और तीन बजे उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि टीकाकरण के बाद रिएक्शन हुआ, लेकिन समय पर उचित जानकारी और मदद नहीं दी गई।”

मुखिया ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित एएनएम पर पहले से ही अवैध वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मांग है कि एएनएम सुषमा टोप्पो को तत्काल हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

ग्रामीणों में गुस्सा, उच्च स्तरीय जांच की मांग

घटना के बाद लठाटोली और आसपास के गांवों में गुस्से का माहौल है। ग्रामीण दीपक नायर ने भी मौके पर मौजूद रहकर स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। ग्रामीणों ने आरोपी नर्स के निलंबन और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग का बयान

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डुमरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अलबेल केरकेट्टा ने कहा:

डॉ. अलबेल केरकेट्टा ने कहा: “मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जा रही है। संबंधित एएनएम से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

हालांकि ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं यह मामला केवल कागजी जांच तक सीमित न रह जाए।

न्यूज़ देखो: टीकाकरण व्यवस्था की सच्चाई

डुमरी की यह घटना सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। सुरक्षित टीकाकरण केवल दावे नहीं, बल्कि सख्त निगरानी, संसाधन और जवाबदेही की मांग करता है। यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों का भरोसा और अधिक टूटेगा। अब यह देखना अहम होगा कि जांच निष्पक्ष होती है या मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मासूमों की सुरक्षा से समझौता नहीं

एक बच्चे की मौत पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए सजग रहना होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की मांग करनी होगी। ऐसी घटनाओं पर चुप्पी भविष्य में और बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और जिम्मेदार व्यवस्था के लिए आवाज उठाएं।

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Written by

डुमरी, गुमला

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