News dekho specials
CrimeGarhwa

सदर अस्पताल में नवजात सौदे का खेल, दस्तावेजों में हेरफेर से मचा हड़कंप

#गढ़वा #स्वास्थ्य_विवाद : नवजात बच्ची को कथित अवैध तरीके से सौंपने का मामला — adoption process में गड़बड़ी से स्वास्थ्य विभाग में हलचल
  • सदर अस्पताल में नवजात बच्ची को अवैध रूप से सौंपने का आरोप
  • दस्तावेजों में कथित काटछांट कर नाम बदलने का मामला सामने आया
  • ओपीडी पर्ची, रजिस्टर और जन्म प्रमाण पत्र फॉर्म में गड़बड़ी की आशंका
  • अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल
  • उपाधीक्षक डॉ माहेरु यामानी ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन

गढ़वा। गढ़वा सदर अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला एक नवजात बच्ची को कथित रूप से अवैध तरीके से दूसरे दंपती को सौंपने से जुड़ा है। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

कैसे सामने आया पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले एक महिला प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती हुई थी, जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बताया जा रहा है कि महिला की पहले से बेटियां थीं, जिसके चलते उसने नवजात को अपने रिश्तेदार दंपती को देने की इच्छा जताई।
हालांकि, भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित नियमों और कानूनी औपचारिकताओं के तहत ही पूरी की जाती है। इस मामले में इन नियमों का पालन संदिग्ध बताया जा रहा है, जिससे मामला गंभीर बन गया है।

दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप

सूत्रों के अनुसार, प्रसव के दौरान अस्पताल के आधिकारिक दस्तावेज जैसे ओपीडी पर्ची, बेडहेड टिकट, प्रसव रजिस्टर और जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित फॉर्म में जैविक माता-पिता का नाम दर्ज किया गया था।
लेकिन बाद में इन दस्तावेजों में कथित रूप से काटछांट कर नाम बदलने की बात सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से कागजात में बदलाव कर नवजात बच्ची को दूसरे दंपती को सौंप दिया गया।
यह भी बताया जा रहा है कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए भरे गए फॉर्म में भी नाम और पते में बदलाव किया गया, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

दोबारा अस्पताल पहुंचने पर खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब संबंधित महिला कुछ दिनों बाद फिर से अस्पताल पहुंची। बातचीत के दौरान अस्पताल कर्मियों को दस्तावेजों में गड़बड़ी और बच्ची के हस्तांतरण की जानकारी मिली।
इस घटना के सामने आते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

आंतरिक जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया

लेबर रूम से जुड़े स्टाफ द्वारा इस मामले में लिखित शिकायत दी गई है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में सदर अस्पताल गढ़वा: “मामले की जानकारी मिली है। सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ एक गंभीर मामला है। मामले में लिखित शिकायत भी उपलब्ध हुआ है। जिसकी जांच की जा रही है। जिन लोगों के बारे में शिकायत मिली है उनसे स्पष्टीकरण की मांग किया गया है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”

कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी पर सवाल

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी ढांचे के अंतर्गत होती है, जिसमें न्यायालय की अनुमति और अधिकृत एजेंसियों की भूमिका अनिवार्य होती है।
ऐसे में यदि किसी नवजात को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के दूसरे को सौंपा जाता है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि बच्चे के अधिकारों का भी गंभीर हनन माना जाता है।

News dekho specials

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने गढ़वा की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त संभावित खामियों को उजागर करता है।
लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर सरकारी अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य तंत्र में पारदर्शिता की सख्त जरूरत

नवजात बच्ची से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी कमी को उजागर करता है।
न्यूज़ देखो ऐसे मामलों को सामने लाकर जिम्मेदारों से जवाब मांगने और व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही बदल सकता है व्यवस्था

ऐसी घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि समाज और सिस्टम दोनों में सतर्कता कितनी जरूरी है। हर नागरिक को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
आप भी इस खबर पर अपनी राय जरूर दें, इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक बन सकें।
“`

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Sonu Kumar

गढ़वा

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
🔔

Notification Preferences

error: