नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य होने पर उबाल, पिछड़ी जातियों ने छेड़ा संघर्ष का बिगुल

नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य होने पर उबाल, पिछड़ी जातियों ने छेड़ा संघर्ष का बिगुल

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #ओबीसी_आरक्षण : नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य किए जाने से आक्रोशित पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति करेगी चरणबद्ध आंदोलन।

सिमडेगा में नगर परिषद चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण शून्य किए जाने के फैसले ने पिछड़ी जातियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति की बैठक कुंज नगर में आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। समिति ने इसे ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया। बैठक में प्रशासन से लेकर न्यायालय तक संघर्ष का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया।

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  • नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण शून्य किए जाने पर कड़ा विरोध।
  • पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति ने किया चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान।
  • 26 दिसंबर शुक्रवार को सरकार का पुतला दहन करने का निर्णय।
  • ओबीसी आरक्षण के लिए उच्च न्यायालय में रिट दाखिल करने की तैयारी।
  • सिमडेगा में आरक्षण नहीं, जबकि गुमला और लोहरदगा में ओबीसी को लाभ।

सिमडेगा नगर परिषद चुनाव को लेकर ओबीसी आरक्षण समाप्त किए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से गंभीर होता जा रहा है। कुंज नगर में आयोजित पिछड़ी जाति नगर निकाय संघर्ष समिति की बैठक में इस फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष राम जी यादव ने की, जिसमें ओबीसी समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

आरक्षण शून्य करना ओबीसी के साथ अन्याय

बैठक में समिति के अध्यक्ष राम जी यादव ने कहा कि सिमडेगा जिले में नगर परिषद चुनाव में ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जाना पिछड़े वर्ग के साथ शोषण के समान है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुमला और लोहरदगा जिलों में ओबीसी को आरक्षण का लाभ दिया गया है, लेकिन सिमडेगा को इससे वंचित रखा गया, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल सामाजिक असंतुलन पैदा करता है, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी को भी कमजोर करता है।

डीसी से मुलाकात और ज्ञापन की जानकारी

समिति के मुख्य संरक्षक जगदीश साहू ने बैठक में जानकारी दी कि ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने उपायुक्त से हुई बातचीत का विवरण साझा करते हुए बताया कि प्रशासन को समाज की भावनाओं से अवगत कराया गया है। बावजूद इसके, अभी तक कोई ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिलने से समाज में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

न्यायिक और आंदोलनात्मक रास्ता अपनाने का फैसला

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ओबीसी आरक्षण के अधिकार के लिए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की जाएगी। इसके साथ ही चरणबद्ध आंदोलन चलाने की रणनीति तय की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संगठित होगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक बनाया जाएगा।

26 दिसंबर को पुतला दहन और आक्रोश रैली

आंदोलन के पहले चरण में 26 दिसंबर (शुक्रवार) को सरकार का पुतला दहन करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत शाम 4 बजे प्रिंस चौक से आक्रोश रैली निकाली जाएगी, जो नीचे बाजार पेट्रोल पंप होते हुए महावीर चौक पहुंचेगी। वहीं सरकार का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। समिति ने इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी की अपील की है।

आगे और उग्र आंदोलन की चेतावनी

बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन के अगले चरण में धरना-प्रदर्शन, और आवश्यकता पड़ने पर जिला और प्रमंडल बंद जैसे कदमों पर भी विचार किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि ओबीसी समाज अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, लेकिन संघर्ष लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।

व्यापक भागीदारी की अपील

समिति की अगली बैठक में पिछड़ी जाति से जुड़े सभी वर्गों के लोगों को शामिल होने की अपील की गई। बैठक में अनूप केशरी, रमेश महतो, अरविंद प्रसाद, अशोक, दिलीप साह, सुनील साह, उदय साह, मुकेश प्रसाद, अमित प्रसाद, अनूप प्रसाद, परशुराम साहु, शंभू भगत, बजरंग, संजय गुप्ता, राकेश जायसवाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: आरक्षण का सवाल, लोकतंत्र की कसौटी

सिमडेगा में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा केवल एक वर्ग का नहीं, बल्कि समान प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा प्रश्न बन गया है। जब पड़ोसी जिलों में आरक्षण लागू है, तो सिमडेगा को इससे वंचित रखना सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और सरकार इस बढ़ते जनआक्रोश पर क्या कदम उठाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकार की लड़ाई में एकजुटता जरूरी

ओबीसी आरक्षण का प्रश्न सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक भागीदारी से सीधे जुड़ा है।
जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक अधिकार सुरक्षित नहीं रहेंगे।
यदि आप भी समान प्रतिनिधित्व और न्याय के पक्षधर हैं, तो इस मुद्दे पर अपनी राय रखें, खबर को साझा करें और जागरूकता फैलाकर लोकतांत्रिक संघर्ष को मजबूती दें।

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सिमडेगा

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