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झारखंड स्थापना दिवस पर बेतला में गूंजेगी कव्वाली की तरंगें, मशहूर कलाकारों का होगा जलवा

#बरवाडीह #स्थापना_दिवस : 19 नवंबर को बेतला नेशनल पार्क के समीप झारखंड की 25वीं वर्षगांठ पर होगा भव्य कव्वाली आयोजन
  • झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर 19 नवंबर को बेतला में कव्वाली कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
  • आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल सोशल यूथ कमेटी, बेतला-बरवाडीह इकाई ने संभाली है।
  • कार्यक्रम में मशहूर कव्वाल अनीश शाबरी और सिंगर सलमान अली अपने दरगाही प्रोग्राम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।
  • विधायक रामचंद्र सिंह की देखरेख में यह कार्यक्रम संपन्न होगा।
  • पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू समेत कई मंत्री और जनप्रतिनिधि होंगे शामिल।
  • इस आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं, इसे भव्य स्वरूप देने की पूरी कोशिश की जा रही है।

झारखंड राज्य के स्थापना दिवस पर इस बार बरवाडीह क्षेत्र में कुछ विशेष होने जा रहा है। बेतला नेशनल पार्क के नजदीक 19 नवंबर को आयोजित होने जा रहे इस कव्वाली कार्यक्रम की तैयारियां पूरे जोश और उत्साह के साथ चल रही हैं। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल सोशल यूथ कमेटी, बेतला-बरवाडीह इकाई द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष झारखंड राज्य अपनी 25वीं स्थापना वर्षगांठ मना रहा है, जिसे यादगार बनाने के लिए यह अनोखा आयोजन किया जा रहा है।

झारखंड स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक आयोजन

स्थापना दिवस पर आयोजित इस कव्वाली कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। कमेटी ने बताया कि यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक होगा, जिसमें देशभर से लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध विरासत और विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाना है।

कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि बेतला नेशनल पार्क के पास स्थित आयोजन स्थल पर रोशनी, मंच सजावट और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जा रही है। पार्क की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण में कव्वाली की गूंज लोगों के दिलों में एक नई ऊर्जा भर देगी।

मशहूर कव्वालों की प्रस्तुति से सजेगा मंच

इस कार्यक्रम की खासियत होगी हिंदुस्तान के मशहूर कव्वाल अनीश शाबरी और सलमान अली की उपस्थिति। दोनों कलाकारों के दरगाही प्रोग्राम में सूफियाना रंगों की झलक देखने को मिलेगी।

आयोजक समिति के अध्यक्ष समसुल अंसारी ने बताया: “हम चाहते हैं कि झारखंड स्थापना दिवस पर ऐसा कार्यक्रम हो जो लोगों के दिलों में एकता और भाईचारे का संदेश छोड़े।”

इन कलाकारों की मधुर आवाज़ और सूफी अंदाज लोगों को आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ देगा। आयोजन के दौरान कई स्थानीय कलाकारों को भी मंच दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिल सके।

भव्य आयोजन के लिए चल रही तैयारियां

कार्यक्रम को सफल और यादगार बनाने के लिए नेशनल सोशल यूथ कमेटी ने तैयारियों को तेज कर दिया है। स्थल पर मंच निर्माण, साउंड सिस्टम, पार्किंग, और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी लगातार की जा रही है। आयोजन समिति का कहना है कि वे इस कार्यक्रम को एक भव्य सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।

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कमेटी के कोषाध्यक्ष हेसामुल अंसारी ने बताया: “यह सिर्फ एक कव्वाली कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड के गौरव और एकता का उत्सव है।”

वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधायक रामचंद्र सिंह की देखरेख में इस पूरे आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजन में पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू समेत राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और स्थानीय समाजसेवी शामिल होंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस अवसर पर बड़ी संख्या में दर्शक शामिल होकर झारखंड की सांस्कृतिक समृद्धि का हिस्सा बनेंगे।

झारखंड की 25वीं वर्षगांठ पर होगा ऐतिहासिक आयोजन

झारखंड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर बने इस राज्य ने विकास, संस्कृति और लोक परंपराओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह आयोजन न केवल राज्य के गौरवशाली सफर को याद करने का अवसर देगा, बल्कि युवाओं में राज्य प्रेम और एकता की भावना को भी सशक्त करेगा।

स्थानीय निवासी इस बात को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं कि झारखंड की स्थापना दिवस पर बेतला जैसे प्राकृतिक स्थल को इस भव्य आयोजन के लिए चुना गया है। यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा।

न्यूज़ देखो: संस्कृति, एकता और झारखंडी गर्व का संगम

बेतला में होने वाला यह कव्वाली कार्यक्रम केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि झारखंडी एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है। इससे झारखंड के पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार व अवसरों की दिशा मिलेगी।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

झारखंडी धुनों में बहेगी एकता की तान

झारखंड की स्थापना दिवस पर इस तरह का सांस्कृतिक आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि समाज को जोड़ने का सेतु भी है। कव्वाली के स्वर जब बेतला की वादियों में गूंजेंगे, तो यह संदेश देंगे कि विविधता में ही हमारी एकता है।

आइए, इस झारखंड स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक गौरव को सलाम करें।
कार्यक्रम में शामिल हों, अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को साझा कर दूसरों को भी जागरूक बनाएं।
एकता, संस्कृति और झारखंडी पहचान को मिलकर आगे बढ़ाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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