
#सिमडेगा #मकरसंक्रांतिउत्सव : भंवरपहाड़ गढ़ में श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति का संगम देखने को मिला।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत नवाटोली पंचायत के भंवरपहाड़ गढ़ में मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान जगन्नाथ स्वामी की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया। मंदिर से मेला स्थल तक निकली इस रथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सुख, समृद्धि और वैभव की कामना की। रथ यात्रा के बाद आदिवासी सदान सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए गए। यह आयोजन क्षेत्रीय परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
- भंवरपहाड़ गढ़ में मकर संक्रांति पर भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा का आयोजन।
- नवाटोली पंचायत के मेला स्थल पर श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु रथ को स्थापित किया गया।
- रथ यात्रा के बाद आदिवासी सदान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
- विभिन्न लोक नृत्य व गीत मंडलियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
- निर्याणक मंडली द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति देने वाले समूहों को किया गया सम्मानित।
- अतिथियों द्वारा गरीब व बुजुर्गों के बीच कंबल वितरण किया गया।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। नवाटोली पंचायत अंतर्गत भंवरपहाड़ गढ़ स्थित भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर से रथ यात्रा का शुभारंभ किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ रथ खींचते हुए उसे मेला स्थल तक पहुंचाया। इस दौरान जयकारों, पूजा-अर्चना और पारंपरिक उल्लास से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मकर संक्रांति के दिन आयोजित रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर परिसर से प्रारंभ हुई। श्रद्धालुओं ने परंपरागत विधि-विधान के साथ रथ को खींचते हुए मेला स्थल तक लाया, जहां भगवान जगन्नाथ स्वामी को दर्शन के लिए स्थापित किया गया। दूर-दराज के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि व क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। रथ यात्रा ने धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता का भी संदेश दिया।
आदिवासी सदान सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां
रथ यात्रा के समापन के पश्चात मंदिर परिसर में आदिवासी सदान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कोलेबिरा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आई मंडलियों ने पारंपरिक लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। ढोल, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी सदान संस्कृति को सहेजना और नई पीढ़ी तक इसकी पहचान को मजबूत करना रहा।
सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति देने वाले समूह हुए सम्मानित
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान निर्याणक मंडली द्वारा सभी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया। उत्कृष्ट लोक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत करने वाले समूहों का चयन कर उन्हें पुरस्कार प्रदान किए गए। इससे कलाकारों का उत्साह बढ़ा और क्षेत्रीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली।
ओहदार रण बहादुर सिंह को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम ओहदार रण बहादुर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। सभी अतिथियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके योगदान को स्मरण किया। यह क्षण आयोजन के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को और अधिक गहराई प्रदान करने वाला रहा।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्रखंड प्रमुख दुतामी हेमरोम एवं अमरनाथ सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रखंड प्रमुख दुतामी हेमरोम ने कहा: “इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण ही हमारे पूर्वजों द्वारा शुरू की गई परंपराएं आज भी जीवित हैं। आयोजन समिति द्वारा इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना सराहनीय कार्य है।”
संस्कृति संरक्षण पर दिया गया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक इंदवार ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर भंवरपहाड़ गढ़ में आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर विलुप्त होती जा रही परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का कार्य करते हैं।
भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक इंदवार ने कहा: “इस तरह के आयोजन हमारी पहचान और संस्कृति को बचाने का सशक्त माध्यम हैं।”
जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण
कार्यक्रम के समापन के बाद बढ़ती ठंड को देखते हुए प्रखंड प्रमुख दुतामी हेमरोम, अमरनाथ सिंह एवं अशोक इंदवार के साथ मिलकर मेले में आए गरीब और बुजुर्ग लोगों के बीच कंबल का वितरण किया गया। इस मानवीय पहल ने आयोजन को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ दिया।
कार्यक्रम में शामिल रहे गणमान्य लोग
इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से तपेश्वर सिंह, अभिमन्यु सिंह, गोपाल सिंह, कृष्ण सिंह, जनेश्वर बिल्हौर, दिलेश्वर सिंह, गौरी प्रसाद सिंह, भूपेंद्र प्रसाद सिंह, सोनू कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताया।
न्यूज़ देखो: परंपरा और सामाजिक सरोकार का सशक्त उदाहरण
भंवरपहाड़ गढ़ में आयोजित मकर संक्रांति का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश भी दिया। रथ यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सामुदायिक एकता को मजबूत किया। वहीं कंबल वितरण जैसी पहल ने आयोजन को मानवीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाया। ऐसे आयोजनों से प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी सामने आती है कि वे संस्कृति और जरूरतमंदों के हित में निरंतर सक्रिय रहें।
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परंपरा से प्रेरणा, समाज के लिए संकल्प
इस तरह के आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामूहिक जिम्मेदारी का बोध कराते हैं। संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब समाज उसे अपनाकर आगे बढ़ाता है। मकर संक्रांति जैसे पर्व हमें सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।




