केरसई के बजरंगबली मंदिर वार्षिकोत्सव पर भव्य कलश यात्रा और अखंड हरिकीर्तन से गूंजा पूरा क्षेत्र

केरसई के बजरंगबली मंदिर वार्षिकोत्सव पर भव्य कलश यात्रा और अखंड हरिकीर्तन से गूंजा पूरा क्षेत्र

author Birendra Tiwari
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#केरसई #धार्मिक_आयोजन : वार्षिकोत्सव पर निकली भव्य कलश यात्रा और हरिकीर्तन आरंभ।

सिमडेगा जिले के केरसई स्थित बजरंगबली मंदिर में वार्षिकोत्सव के अवसर पर रविवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर नगर भ्रमण किया। इसके पश्चात मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन प्रारंभ हुआ। आयोजन में ग्रामीणों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

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  • केरसई स्थित बजरंगबली मंदिर में वार्षिकोत्सव पर भव्य कलश यात्रा आयोजित।
  • पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर नगर भ्रमण किया।
  • पूजा-अर्चना के बाद मंदिर प्रांगण में अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ।
  • यजमान के रूप में दिलीप प्रसाद सपत्नीक, आचार्य पं. अजय शंकर झा एवं संजय पाठक मौजूद।
  • आयोजन में अध्यक्ष विकास कुमार, पवन कुमार, आकाश कुमार, सूरज प्रसाद, धीरज साहू सहित ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका।

सिमडेगा जिले के केरसई में स्थित बजरंगबली मंदिर का वार्षिकोत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। रविवार को आयोजित भव्य कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया। इसके उपरांत मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन की शुरुआत की गई, जो देर शाम तक जारी रहा।

भक्ति भाव से सजी भव्य कलश यात्रा

वार्षिकोत्सव के अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सिर पर पवित्र कलश रखे और पूरे नगर का भ्रमण किया। “जय श्री राम” और “बजरंगबली की जय” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।

कलश यात्रा में स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच यात्रा का दृश्य अत्यंत आकर्षक और मनमोहक रहा। श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ

कलश यात्रा के समापन के पश्चात मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ हुआ। “हरे रामा हरे कृष्णा” मंत्र जाप से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिरस में डूब गया।

स्थानीय कीर्तन मंडलियों ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। भक्ति संगीत और मंत्रोच्चार से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बना रहा।

आचार्य पं. अजय शंकर झा ने कहा:

“वार्षिकोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने का माध्यम है।”

वहीं संजय पाठक ने बताया:

“अखंड हरिकीर्तन के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समाज में शांति एवं सद्भाव का संदेश जाता है।”

नाम यज्ञ, भंडारा और विशेष आरती का होगा आयोजन

आयोजन समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि वार्षिकोत्सव के दौरान नाम यज्ञ, भंडारा और विशेष आरती का आयोजन भी किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और सामूहिक भंडारा की व्यवस्था की गई है।

यजमान के रूप में दिलीप प्रसाद सपत्नीक पूरे अनुष्ठान में शामिल रहे और विधिवत पूजा संपन्न कराई। आयोजन को सफल बनाने में समिति और ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ग्रामीणों और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष विकास कुमार, पवन कुमार, आकाश कुमार, सूरज प्रसाद, धीरज साहू सहित सभी ग्रामवासियों ने सक्रिय योगदान दिया। युवाओं ने व्यवस्था, सजावट और श्रद्धालुओं के स्वागत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्रामीणों ने बताया कि यह वार्षिकोत्सव वर्षों से परंपरागत रूप से मनाया जाता है और इससे क्षेत्र में आपसी भाईचारा और एकता मजबूत होती है। आयोजन के दौरान सुरक्षा और अनुशासन का भी विशेष ध्यान रखा गया।

न्यूज़ देखो: आस्था के संग सामाजिक एकता का संदेश

केरसई का यह वार्षिकोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण है। कलश यात्रा और अखंड हरिकीर्तन जैसे कार्यक्रम ग्रामीण समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं। ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी सद्भाव बढ़ता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था से जुड़े, समाज से जुड़े रहें

धार्मिक आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं होते, वे समाज को जोड़ने का अवसर भी देते हैं।
भक्ति, सेवा और सहयोग की भावना से ही गांव और समाज मजबूत बनता है।
ऐसे पावन अवसरों पर सहभागिता से परंपराएं जीवित रहती हैं और नई पीढ़ी को संस्कार मिलते हैं।
आप भी अपने क्षेत्र के सकारात्मक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और सामाजिक एकता को मजबूत करें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर धार्मिक एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश फैलाएं।

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Written by

सिमडेगा

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