वर्ष के अंतिम दिन चार श्राद्धकर्मों में पौधारोपण कर डॉक्टर कौशल ने दिया पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदना का संदेश

वर्ष के अंतिम दिन चार श्राद्धकर्मों में पौधारोपण कर डॉक्टर कौशल ने दिया पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदना का संदेश

author Niranjan Kumar
79 Views Download E-Paper (30)
#छतरपुर #पर्यावरण_संरक्षण : श्राद्धकर्म में पौधा दान और आर्थिक सहयोग से प्रकृति व मानवता का संदेश।

छतरपुर प्रखंड में वर्ष के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदना की अनूठी मिसाल देखने को मिली। ट्री मैन ऑफ इंडिया डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने चार अलग-अलग श्राद्धकर्म कार्यक्रमों में शामिल होकर मृतकों की स्मृति में पौधा दान किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवन के हर संस्कार से जोड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम में पौधारोपण के साथ आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया, जिससे मानवता और प्रकृति दोनों के प्रति जिम्मेदारी का भाव सामने आया।

Join WhatsApp
  • डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने चार श्राद्धकर्मों में किया पौधा दान।
  • थाईलैंड प्रजाति के आम के पौधे भेंट किए गए।
  • पर्यावरण संरक्षण को श्राद्धकर्म और संस्कारों से जोड़ने की पहल।
  • घूरन भुईयां की पत्नी को दिया गया आर्थिक सहयोग।
  • सामाजिक विवाह और सेवा कार्यों का भी उल्लेख।

छतरपुर (पलामू) प्रखंड क्षेत्र में वर्ष के अंतिम दिन पर्यावरण और मानवता के संगम का एक प्रेरक दृश्य सामने आया। विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पर्यावरण धर्मगुरु एवं वन राखी मूवमेंट के प्रणेता ट्री मैन ऑफ इंडिया डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने अलग–अलग स्थानों पर आयोजित चार श्राद्धकर्म कार्यक्रमों में भाग लेकर मृतकों की स्मृति में पौधारोपण किया। इस पहल ने यह संदेश दिया कि जीवन के अंतिम संस्कार से जुड़े कर्म भी प्रकृति संरक्षण के माध्यम बन सकते हैं।

श्राद्धकर्म में पौधा दान की अनूठी पहल

डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने प्रत्येक श्राद्धकर्म में थाईलैंड प्रजाति के आम का पौधा दान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण धर्म का पहला और मूल मंत्र यही है कि जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर पर पौधा लगाया जाए या पौधा दान किया जाए। उनका मानना है कि श्राद्धकर्म जैसे संस्कारों में यदि पौधा दान को जोड़ा जाए, तो यह केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की विरासत तैयार करने जैसा कार्य है।

डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने कहा:

“केवल पारंपरिक दान से आत्मिक शांति अधूरी रहती है। जब दान प्रकृति से जुड़ता है, तब मृतक की आत्मा को भी सच्ची शांति मिलती है और समाज को भी लाभ होता है।”

परिवार की सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर डॉ. कौशल की धर्मपत्नी एवं डाली पंचायत की मुखिया पूनम जायसवाल तथा पुत्र एवं छतरपुर पूर्वी के जिला परिषद सदस्य अमित कुमार जायसवाल भी उनके साथ मौजूद रहे। तीनों ने मिलकर पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण को पारिवारिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत किया। स्थानीय लोगों ने इसे एक सकारात्मक और अनुकरणीय उदाहरण बताया।

सामाजिक कार्यों का उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने अपने पूर्व सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व इटकदाग गांव के स्वर्गीय ब्रह्मदेव भुईयां की दो पुत्रियों सहित भुईयां समाज की तीन बेटियों का सामूहिक विवाह चेगावाना धाम में संपन्न कराया गया था। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए इस तरह के प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए।

डॉ. कौशल ने यह भी जानकारी दी कि इसी वर्ष स्व. ब्रह्मदेव भुईयां की शेष दो पुत्रियों के विवाह के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि परिवार को सम्मानजनक जीवन मिल सके।

शोक की घड़ी में मानवीय सहयोग

इसी क्रम में डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने इटकदाग गांव के आग से झुलसकर मृत हुए घूरन भुईयां की पत्नी रुकमणिया कुंवर को आर्थिक सहयोग प्रदान किया। उन्होंने उनका चरण स्पर्श कर ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि समाज उनके साथ खड़ा है। यह दृश्य उपस्थित लोगों के लिए भावुक करने वाला रहा।

समाज और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश

डॉ. कौशल ने कहा कि शोक और पीड़ा के क्षणों में यदि हम पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहयोग को जोड़ दें, तो यह समाज को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पेड़ लगाना केवल पर्यावरणीय कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है।

न्यूज़ देखो: संस्कारों से जुड़ा पर्यावरण संरक्षण

यह पहल बताती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे समाज के संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। श्राद्धकर्म जैसे पारंपरिक आयोजनों में पौधा दान की परंपरा समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। डॉ. कौशल किशोर जायसवाल की यह सोच पर्यावरण और मानवता दोनों के लिए प्रेरणास्रोत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शोक में भी संकल्प, प्रकृति के साथ जीवन

यदि हर संस्कार में एक पौधा जुड़ जाए, तो धरती और समाज दोनों सुरक्षित होंगे।
पर्यावरण संरक्षण को अपनी परंपरा और जिम्मेदारी बनाएं।
क्या आप भी अपने परिवारिक आयोजनों में पौधा दान का संकल्प लेंगे?
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और हरियाली का संदेश आगे बढ़ाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

छतरपुर, पलामू

🔔

Notification Preferences

error: