
#कोलेबिरा #उर्स_समारोह : जनप्रतिनिधियों ने मजार पर पहुंचकर की चादरपोशी।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में आयोजित सालाना उर्स के अवसर पर अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने चादर चढ़ाई। पुलिस कप्तान की व्यस्तता के कारण पहली चादरपोशी कोलेबिरा थाना प्रभारी ने की। इसके बाद कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने मजार पर हाजिरी लगाई। सभी ने जिले में शांति, भाईचारा और विकास की कामना की।
- कोलेबिरा थाना प्रभारी ने की पहली चादरपोशी।
- विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और विधायक भूषण बाड़ा ने चढ़ाई चादर।
- जिला परिषद अध्यक्ष सिमडेगा और एसडीपीओ सिमडेगा भी रहे मौजूद।
- मजार परिसर में कव्वाली, मिलाद शरीफ और लंगरखानी का आयोजन।
- उर्स में दूर-दराज से पहुंचे हजारों जायरीन और श्रद्धालु।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में आयोजित सालाना उर्स के पावन अवसर पर अंजान शाह पीर बाबा की मजार श्रद्धालुओं से गुलजार रही। परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष पुलिस प्रशासन की ओर से पहली चादरपोशी की जाती है। इस वर्ष पुलिस कप्तान की सरकारी व्यस्तता के कारण यह जिम्मेदारी कोलेबिरा थाना प्रभारी ने निभाई। इसके बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी मजार पर पहुंचकर विधिवत चादर चढ़ाई और जिले की खुशहाली की कामना की।
परंपरा के तहत पहली चादरपोशी
कोलेबिरा में आयोजित उर्स के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से पहली चादरपोशी की परंपरा वर्षों से निभाई जाती रही है। इस वर्ष भी उसी परंपरा का पालन करते हुए कोलेबिरा थाना प्रभारी ने अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर चादर चढ़ाई। पुलिस कप्तान सिमडेगा की सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण वे स्वयं उपस्थित नहीं हो सके।
चादरपोशी के दौरान मजार परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
विधायकों ने मांगी अमन-चैन और तरक्की की दुआ
पहली चादरपोशी के बाद कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने मजार पर पहुंचकर चादर चढ़ाई। उनके साथ जिला परिषद अध्यक्ष सिमडेगा और एसडीपीओ सिमडेगा भी मौजूद रहे।
दोनों जनप्रतिनिधि मुख्य सड़क मार्ग से चादर लेकर पैदल मजार तक पहुंचे। विधिवत तरीके से चादर चढ़ाकर उन्होंने जिले और प्रदेश की सुख-शांति, तरक्की और सामाजिक सौहार्द की कामना की।
विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा: “अंजान शाह पीर बाबा का मजार कौमी एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। यहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ आकर माथा टेकते हैं, जो हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम और एकजुटता को मजबूत करते हैं।”
विधायक भूषण बाड़ा ने कहा: “उर्स केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का उत्सव है। बाबा के दरबार में हाजिरी लगाकर मैंने जिलेवासियों की खुशहाली, किसानों की उन्नति और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।”
उर्स में उमड़ी जायरीनों की भीड़
उर्स के अवसर पर दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों जायरीन कोलेबिरा पहुंचे। मजार परिसर में लगातार चादरपोशी का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और अकीदत के साथ बाबा की दरगाह पर माथा टेका।
कार्यक्रम के दौरान कव्वाली और मिलाद शरीफ का आयोजन किया गया, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। लंगरखानी का भी आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
उर्स कमेटी के सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत कर सम्मानित किया। आयोजन को सफल बनाने में कमेटी के पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही।
प्रशासन की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था
भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मेला परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने समय-समय पर व्यवस्था का जायजा लिया।
सामाजिक सौहार्द का संदेश
उर्स के इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, उर्स कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में जिले में शांति, सद्भाव और विकास की कामना की।
अंजान शाह पीर बाबा की मजार को क्षेत्र में कौमी एकता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। यहां हर समुदाय के लोग समान भाव से आकर दुआ मांगते हैं, जो सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
न्यूज़ देखो: उर्स बना सामाजिक एकता का संदेश
कोलेबिरा का यह उर्स केवल धार्मिक आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता का मजबूत संदेश भी देता है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की संयुक्त उपस्थिति यह दर्शाती है कि ऐसे आयोजनों को शांति और सद्भाव के साथ संपन्न कराने की सामूहिक जिम्मेदारी निभाई जा रही है। धार्मिक स्थलों पर सभी समुदायों की सहभागिता सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती है। आने वाले समय में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से भाईचारे का यह संदेश कायम रहे, यही अपेक्षा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ एकता का संकल्प
धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं जब वे समाज को जोड़ने का काम करें। कोलेबिरा का उर्स इसी भावना का प्रतीक बनकर सामने आया है।
आइए हम भी अपने-अपने स्तर पर सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें।
भाईचारे की यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे, यह हम सभी की जिम्मेदारी है।






