
#कोलेबिरा #सालाना_उर्स : जनप्रतिनिधियों ने मजार पर चादर चढ़ाकर शांति की कामना की।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में आयोजित सालाना उर्स के अवसर पर अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक चादरपोशी की। परंपरा के तहत पहली चादरपोशी कोलेबिरा थाना प्रभारी हर्ष कुमार साह ने की। उपायुक्त की अनुपस्थिति में बीडीओ बीरेंद्र किंडो ने प्रतिनिधित्व किया। सभी ने जिले में शांति, भाईचारा और विकास की दुआ मांगी।
- परंपरा अनुसार पुलिस प्रशासन की ओर से थाना प्रभारी हर्ष कुमार साह ने की पहली चादरपोशी।
- बीडीओ बीरेंद्र किंडो ने उपायुक्त का प्रतिनिधित्व किया।
- विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और विधायक भूषण बाड़ा रहे मौजूद।
- जिला परिषद अध्यक्ष सिमडेगा और एसडीपीओ सिमडेगा की उपस्थिति।
- उर्स में हजारों जायरीन, कव्वाली और लंगरखानी का आयोजन।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा में आयोजित सालाना उर्स के मौके पर अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर श्रद्धा और अकीदत का विशेष माहौल देखने को मिला। परंपरा के अनुसार पुलिस प्रशासन की ओर से पहली चादरपोशी की गई। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से मजार पर चादर चढ़ाकर जिले की खुशहाली की दुआ मांगी। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
परंपरा के तहत पहली चादरपोशी
कोलेबिरा में आयोजित उर्स के अवसर पर हर वर्ष पुलिस प्रशासन द्वारा पहली चादरपोशी की परंपरा निभाई जाती है। इस वर्ष पुलिस कप्तान सिमडेगा की सरकारी व्यस्तता के कारण यह जिम्मेदारी कोलेबिरा थाना प्रभारी हर्ष कुमार साह ने निभाई। उन्होंने विधिवत तरीके से अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर पहली चादर चढ़ाई।
इसी तरह उपायुक्त सिमडेगा की व्यस्तता के चलते उनके प्रतिनिधि के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी बीरेंद्र किंडो ने कार्यक्रम में भाग लिया और प्रशासनिक जिम्मेदारी का निर्वहन किया। उनकी उपस्थिति प्रशासन की ओर से आयोजन को महत्व दिए जाने का संकेत रही।
जनप्रतिनिधियों की सामूहिक उपस्थिति
पहली चादरपोशी के बाद कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा मजार पहुंचे। उनके साथ जिला परिषद अध्यक्ष सिमडेगा और एसडीपीओ सिमडेगा भी उपस्थित थे।
दोनों विधायक मुख्य सड़क मार्ग से चादर लेकर पैदल मजार तक पहुंचे। विधिवत चादर चढ़ाकर उन्होंने प्रदेश और जिले की तरक्की, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की कामना की। उर्स कमेटी के सदस्यों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर सम्मानित किया।
विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा: “अंजान शाह पीर बाबा का मजार कौमी एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। यहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ आकर माथा टेकते हैं, जो हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करते हैं।”
विधायक भूषण बाड़ा ने कहा: “उर्स केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का उत्सव है। बाबा के दरबार में हाजिरी लगाकर मैंने जिलेवासियों की खुशहाली, किसानों की उन्नति और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।”
उर्स में उमड़ी आस्था की भीड़
सालाना उर्स के अवसर पर दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों जायरीन कोलेबिरा पहुंचे। मजार परिसर में लगातार चादरपोशी का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ बाबा की दरगाह पर माथा टेका और अपने परिवार तथा समाज की खुशहाली की दुआ मांगी।
कार्यक्रम के दौरान कव्वाली और मिलाद शरीफ का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा। लंगरखानी में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। मेला परिसर में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
प्रशासन की सतर्क निगरानी
भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मेला परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखी गई। अधिकारियों ने समय-समय पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
उर्स के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। यह प्रशासन और आयोजन समिति के बेहतर समन्वय का परिणाम माना जा रहा है।
सामाजिक समरसता का प्रतीक आयोजन
अंजान शाह पीर बाबा की मजार क्षेत्र में कौमी एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक मानी जाती है। यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ आकर दुआ मांगते हैं। सालाना उर्स का यह आयोजन भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाता नजर आया।
इस अवसर पर उर्स कमेटी के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में जिले में शांति, सद्भाव और विकास की कामना की।
न्यूज़ देखो: उर्स ने दिया एकता और सौहार्द का संदेश
कोलेबिरा का यह उर्स प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की साझा भागीदारी का उदाहरण बना। धार्मिक आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकजुटता का संदेश देना आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रशासन की सतर्कता और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को गरिमामय बनाया। सवाल यह भी है कि क्या ऐसे आयोजनों से निकला भाईचारे का संदेश वर्षभर सामाजिक जीवन में कायम रह पाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था से बढ़े आपसी विश्वास की डोर
धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी होते हैं।
कोलेबिरा का यह उर्स हमें एकता और आपसी सम्मान का पाठ सिखाता है।
जब प्रशासन और जनता साथ खड़े हों, तो सामाजिक सौहार्द और मजबूत होता है।
आइए हम भी अपने आसपास शांति और भाईचारे का वातावरण बनाने में योगदान दें।
सजग नागरिक बनें और सकारात्मक पहल का समर्थन करें।
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