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कोलेबिरा में मनरेगा बचाओ संग्राम और पेसा कानून पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर, एसआईआर को लेकर बीएलओ को किया गया प्रशिक्षित

#कोलेबिरा #प्रशिक्षण_शिविर : मनरेगा, पेसा कानून और एसआईआर विषयों पर जनप्रतिनिधियों व बीएलओ के लिए आयोजित हुआ एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम।

कोलेबिरा प्रखंड में मनरेगा बचाओ संग्राम, पेसा कानून नियमावली एवं एसआईआर को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सिमडेगा विधायक सह जिला अध्यक्ष भूषण बाड़ा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और महिला जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत बीएलओ और पंचायत प्रतिनिधियों को कानूनों व प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

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  • कोलेबिरा प्रखंड में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन।
  • मनरेगा बचाओ संग्राम, पेसा कानून नियमावली और एसआईआर पर विशेष फोकस।
  • सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा और कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी की सहभागिता।
  • एसआईआर प्रशिक्षण हेतु विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा बीएलओ को मार्गदर्शन।
  • 11 पंचायतों के पंचायत अध्यक्षों और बीएलओ की व्यापक भागीदारी।

कोलेबिरा प्रखंड में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर ने मनरेगा, पेसा कानून और एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून की समझ और एसआईआर से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कानूनी प्रावधानों, अधिकारों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

मनरेगा बचाओ संग्राम पर विशेष चर्चा

शिविर में मनरेगा बचाओ संग्राम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि मनरेगा ग्रामीण रोजगार की रीढ़ है और इसकी पारदर्शिता व निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है। पंचायत स्तर पर कार्यरत प्रतिनिधियों को यह समझाया गया कि वे मजदूरों के अधिकारों की रक्षा कैसे कर सकते हैं और योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता को कैसे रोका जा सकता है।

पेसा कानून नियमावली की जानकारी

प्रशिक्षण शिविर का एक महत्वपूर्ण सत्र पेसा कानून नियमावली पर केंद्रित रहा। इसमें बताया गया कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को प्राप्त अधिकारों, संसाधनों के प्रबंधन और स्थानीय स्वशासन की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि पेसा कानून के सही क्रियान्वयन से गांवों का समग्र विकास संभव है।

एसआईआर पर बीएलओ को प्रशिक्षण

एसआईआर से संबंधित प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों सामरोम पॉल तोपनो, डॉ. इम्तियाज हुसैन और श्रीमती सुचिता तिर्की ने बीएलओ को विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान एसआईआर की प्रक्रिया, डेटा संकलन, सत्यापन और रिपोर्टिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में समझाया गया। बीएलओ को यह भी बताया गया कि वे जमीनी स्तर पर कार्य करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखें।

मुख्य अतिथियों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम में सिमडेगा विधायक सह जिला अध्यक्ष भूषण बाड़ा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और महिला जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा ने प्रशिक्षण शिविर को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं और इससे योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है।

सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने कहा: “मनरेगा और पेसा कानून जैसे विषयों की सही समझ ही गांवों के सशक्तिकरण की कुंजी है। प्रशिक्षण के माध्यम से हम जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था बना सकते हैं।”

जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

शिविर में प्रखंड अध्यक्ष सुलभ नेल्शन डुंगडुंग, विधायक प्रतिनिधि शमी आलम, शकील अहमद, रवेल लकड़ा, जमीर हसन, प्रिंस खान, सजदा खातून, उर्मिला केरकेट्टा, प्रतिमा कुजूर, अमृत डुंगडुंग, फुल्केरिया डांग, महिला प्रखंड अध्यक्ष महिमा केरकेट्टा, मंडल अध्यक्ष जोसेफ, सोरेंग, राकेश कोंगाड़ी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसके अलावा कोलेबिरा प्रखंड के 11 पंचायतों के सभी पंचायत अध्यक्ष और सभी बीएलओ ने प्रशिक्षण में भाग लिया।

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प्रशिक्षण का जमीनी महत्व

इस तरह के प्रशिक्षण शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीएलओ और पंचायत प्रतिनिधि ही योजनाओं और कानूनों के क्रियान्वयन की पहली कड़ी होते हैं। उन्हें सही जानकारी और प्रशिक्षण मिलने से शासन की मंशा जमीन पर उतरती है।

न्यूज़ देखो: जमीनी कार्यकर्ताओं को मजबूत करने की पहल

कोलेबिरा में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर दर्शाता है कि योजनाओं की सफलता के लिए केवल नीति निर्माण नहीं, बल्कि सही प्रशिक्षण भी जरूरी है। मनरेगा, पेसा कानून और एसआईआर जैसे विषयों पर स्पष्टता आने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशिक्षण का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक पंचायत, सशक्त गांव की दिशा में कदम

गांवों का विकास तभी संभव है जब कानूनों और योजनाओं की सही समझ हर स्तर तक पहुंचे। प्रशिक्षण से मिली जानकारी को व्यवहार में उतारना अब सभी प्रतिभागियों की जिम्मेदारी है।

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Birendra Tiwari

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