
#गढ़वा #रुद्र_महायज्ञ : नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ शुरू — कथामंडपम का दीप प्रज्वलित कर किया गया उद्घाटन।
गढ़वा–मझिआंव रोड स्थित जोबरईया गांव के बंडा पहाड़ पर नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर सहित कई अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कथामंडपम का उद्घाटन किया। इस दौरान अयोध्या धाम से आए कथा व्यास पंडित पंकज शांडिल्य जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा का संगीतमय आयोजन भी शुरू हुआ।
- नीलकंठ महादेव मंदिर, बंडा पहाड़ में नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ।
- पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने दीप प्रज्वलित कर कथामंडपम का किया उद्घाटन।
- अयोध्या धाम से पधारे पंडित पंकज शांडिल्य जी महाराज सुना रहे श्रीराम कथा।
- प्रथम दिन भव्य जलयात्रा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत।
- बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग रहे उपस्थित।
गढ़वा–मझिआंव रोड स्थित जिला मुख्यालय के समीप ग्राम जोबरईया के बंडा पहाड़ पर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय विराट श्री रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ भव्य तरीके से किया गया। महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन संध्या काल में अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास पंडित पंकज शांडिल्य जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा अमृतवर्षा का संगीतमय आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रथम दिन रविवार को जलयात्रा के साथ महायज्ञ की शुरुआत हुई। इसके बाद संध्या समय कथा प्रारंभ होने से पूर्व भव्य कथामंडपम का उद्घाटन किया गया।
दीप प्रज्वलित कर हुआ कथामंडपम का उद्घाटन
कथामंडपम का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, विशिष्ट अतिथि एसडीओ संजय कुमार पांडेय, महायज्ञ के प्रधान संयोजक राकेश पाल तथा यज्ञाधीश आचार्य श्री श्री आशीष वैद्य जी महाराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और भगवान राम के जयकारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राम कथा को जीवन में उतारना जरूरी
इस मौके पर पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने महायज्ञ जैसे धार्मिक आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक जागृति लाने का कार्य करते हैं। उन्होंने जागृति युवा क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक और धार्मिक कार्यों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्म के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए। यदि हम कर्मठ और ईमानदार होंगे तो जीवन सुखद और सफल बनेगा।
मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि राम कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने के लिए होती है। जब हम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे तभी राम कथा और यज्ञ का आयोजन वास्तव में सार्थक होगा। राम कथा हमें मर्यादा, कर्तव्य और अच्छे कर्मों का संदेश देती है।
सनातन संस्कृति में महायज्ञ का विशेष महत्व
इस अवसर पर यज्ञाधीश आचार्य श्री श्री आशीष वैद्य जी महाराज ने सनातन संस्कृति में महायज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का संचार करते हैं।
उन्होंने महायज्ञ के आयोजन में जागृति युवा क्लब द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।
आयोजन में स्थानीय लोगों का रहा सहयोग
महायज्ञ के प्रधान संयोजक राकेश पाल ने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बंडा पहाड़ पर इतने बड़े धार्मिक आयोजन का सपना पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और स्थानीय लोगों के सहयोग से साकार हो सका है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है।
कथा व्यास ने सुनाई प्रथम दिवस की कथा
कथा व्यास पंडित पंकज शांडिल्य जी महाराज ने वंदना के साथ प्रथम दिवस की कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि राम कथा मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने बताया कि परमात्मा की दो शक्तियां होती हैं—भक्ति और माया।
उन्होंने कहा कि जो लोग भक्ति का मार्ग अपनाते हैं उनका जीवन सुख और शांति से भर जाता है, जबकि माया के मार्ग पर चलने वाले लोग सांसारिक बंधनों में उलझे रहते हैं।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य मनोज ठाकुर, श्री कृष्ण गौशाला समिति के शिव शंकर गुप्ता, मानस मंडली गढ़वा के द्वारकानाथ पांडेय, अनुज प्रसाद, बुद्धदेव पाल, अजय केसरी, उपाध्यक्ष सत्येंद्र पाल, सचिव विनय कुमार पाल, ओमप्रकाश पाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रोता उपस्थित थे।

न्यूज़ देखो विशेष: धार्मिक आयोजन से बढ़ती है सामाजिक एकता
महायज्ञ और राम कथा जैसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।
ऐसे आयोजन लोगों को नैतिक मूल्यों, धर्म और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित होती है।
जब आस्था और सेवा का संगम होता है
जब समाज के लोग मिलकर धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भाग लेते हैं, तो इससे न केवल आध्यात्मिक वातावरण बनता है बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
यदि आपके क्षेत्र में भी कोई धार्मिक, सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, तो उसकी जानकारी ‘न्यूज़ देखो’ तक जरूर पहुंचाएं।





