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विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला, बोले— जन्म प्रमाण पत्र के लिए भी देनी पड़ रही घूस

#बोकारो #झारखंड_सरकार #भ्रष्टाचार : चंदनक्यारी प्रखंड का हवाला देकर विपक्ष नेता ने सरकार और प्रशासन को घेरा।

झारखंड में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक घूसखोरी एक सामान्य चलन बन चुकी है। बाबूलाल मरांडी ने बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि अब दुधमुंहे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी लोगों को रिश्वत देनी पड़ रही है। उन्होंने दोषी कर्मियों पर तत्काल कार्रवाई और बिना देरी के प्रमाण पत्र जारी कराने की मांग की है।

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  • विपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप।
  • बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड में जन्म प्रमाण पत्र के लिए घूस का आरोप।
  • फाइल खोजने और हस्ताक्षर के नाम पर हर टेबल पर अवैध वसूली का दावा।
  • बोकारो उपायुक्त की भूमिका पर भी उठाए सवाल।
  • दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।

झारखंड में सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में घूसखोरी अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सचिवालय, जिला, अनुमंडल और प्रखंड कार्यालयों तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं।

बाबूलाल मरांडी ने बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अब एक नवजात बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी आम नागरिकों को रिश्वत देनी पड़ रही है।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए भी घूस का आरोप

विपक्ष नेता ने कहा कि चंदनक्यारी प्रखंड में एक दुधमुंहे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक ने सभी आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी कर दी थीं। इसके बावजूद संबंधित कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा अवैध राशि की मांग की जा रही है।

उन्होंने इसे न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ बताया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक का मूल अधिकार है और इसे रिश्वत से जोड़ देना बेहद शर्मनाक है।

हर टेबल पर वसूली का आरोप

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकारी दफ्तरों में फाइल जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे घूस की मांग भी बढ़ती जाती है। कभी फाइल खोजने के नाम पर, तो कभी फाइल पर हस्ताक्षर करने के नाम पर रिश्वत मांगी जाती है।

उन्होंने कहा कि जितनी टेबल से फाइल गुजरती है, उतनी बार अवैध वसूली की जाती है। हर स्तर पर अलग-अलग बहानों से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आम आदमी त्रस्त हो चुका है।

उपायुक्त की भूमिका पर सवाल

विपक्ष नेता ने इस मामले में बोकारो के उपायुक्त की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि क्या पंजीयन कार्यालय के कर्मचारियों को उनका वेतन कम पड़ रहा है, जो वे अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन भी बिना घूस के नहीं कर पा रहे हैं।

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उन्होंने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर रिश्वत की दरें क्या तय की गई हैं। बाबूलाल मरांडी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर प्रशासन को इतनी ही निर्लज्जता दिखानी है, तो बेहतर होगा कि घूस की ‘रेट लिस्ट’ सार्वजनिक रूप से जारी कर दी जाए, ताकि आम नागरिकों को बार-बार अपमानित न होना पड़े।

तत्काल कार्रवाई की मांग

बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और बिना किसी देरी के संबंधित जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसे मामलों पर आंख मूंदे रही, तो जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

जनता त्रस्त, जवाब चाहती है

विपक्ष नेता ने कहा कि झारखंड की जनता भ्रष्टाचार से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है और अब जवाब चाहती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर ठोस और सख्त कदम उठाने होंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, तो इसका राजनीतिक और सामाजिक असर सरकार को भुगतना पड़ेगा।

न्यूज़ देखो: सिस्टम पर गंभीर सवाल

जन्म प्रमाण पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज के लिए रिश्वत का आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्ष नेता के बयान से यह साफ है कि भ्रष्टाचार का मुद्दा आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में और तेज होगा। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस आरोप पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं और आम नागरिकों को कब राहत मिलती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जवाबदेही तय होना जरूरी

अगर बुनियादी अधिकारों के लिए भी जनता को घूस देनी पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे मामलों में जागरूकता और सवाल उठाना ही बदलाव की पहली सीढ़ी है। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में रखें और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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