पलामू टाइगर रिजर्व में टस्कर की मौत, हाथियों की आपसी लड़ाई में दूसरा हताहत

पलामू टाइगर रिजर्व में टस्कर की मौत, हाथियों की आपसी लड़ाई में दूसरा हताहत

author News देखो Team
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हाइलाइट्स :

  • बेतला नेशनल पार्क में 45 वर्षीय टस्कर मृत पाया गया
  • इंट्रा फाइट में गंभीर रूप से घायल होने के बाद हुई मौत
  • टीम ने बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन टस्कर ने दम तोड़ा
  • पशु चिकित्सा टीम ने पोस्टमार्टम कर शव को दफनाया

पलामू टाइगर रिजर्व में 45 वर्षीय टस्कर की मौत

डालटनगंज: पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के उत्तर प्रभाग के बेटला नेशनल पार्क में एक 45 वर्षीय टस्कर मृत पाया गया। पीटीआर के नॉर्थ डिवीजन के उप निदेशक पीके जेना ने बताया कि यह टस्कर लगभग 6 दिन पहले अन्य हाथियों के साथ आपसी लड़ाई (इंट्रा फाइट) में गंभीर रूप से घायल हुआ था और आज उसका शव मिला।

पोस्टमार्टम के बाद किया गया दफन

पीके जेना ने बताया कि टस्कर के शव को पशु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा पोस्टमार्टम के बाद दफनाया गया। इस दौरान विस्केरा को संरक्षित किया गया, ताकि आगे जांच की जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाथियों को उनके टस्क (दांत) के साथ दफनाया नहीं जाता, इसलिए उसके दोनों टस्क को संरक्षित किया गया। दोनों टस्क की लंबाई 3 फीट से अधिक बताई जा रही है।

बचाने के प्रयास हुए नाकाम

पीटीआर के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि घायल टस्कर को बचाने के लिए वन विभाग की टीम ने हरसंभव प्रयास किया। उसे गर्दन में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण उसकी हालत बिगड़ती गई। टीम ने टस्कर को बचाने के लिए दवा मिले केले भी दिए थे, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

दूसरी बार हुई टस्कर की मौत

सूत्रों के अनुसार, पीके जेना ने घायल टस्कर को टी-गन की मदद से डार्ट भी किया था, लेकिन इलाज कारगर साबित नहीं हुआ। यह पिछले दो हफ्तों में टस्करों की लड़ाई में दूसरा हताहत है। इससे पहले, पीटीआर के दक्षिणी डिवीजन में एक अन्य टस्कर की मौत हो चुकी थी

हमलावर टस्कर अब भी जंगल में सक्रिय

वन विभाग के अनुसार, हमलावर टस्कर एक एकल टस्क (सिंगल टस्क) हाथी है और पूरी तरह स्वस्थ है। रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि इसी एकल टस्क हाथी ने मृत टस्कर की गर्दन पर गंभीर चोटें पहुंचाई थीं, जिससे उसकी मौत हो गई।

‘न्यूज़ देखो’ की नज़र वन्यजीव संरक्षण पर

पलामू टाइगर रिजर्व में टस्करों की आपसी लड़ाई से हो रही मौतें चिंता का विषय हैं। क्या वन विभाग इन संघर्षों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? ‘न्यूज़ देखो’ इस पर नज़र बनाए रखेगा और आपको हर अपडेट देता रहेगा। जुड़े रहें ‘न्यूज़ देखो’ के साथ – हर खबर पर रहेगी हमारी नज़र!

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