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पलामू किला आदिवासी जतरा मेला का हुआ भव्य शुभारंभ परंपरा और जनभावना का संगम बना आयोजन

#बरवाडीह #जतरा_मेला : वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने किया उद्घाटन 2026 से राजकीय मेला घोषित करने का भरोसा
  • पलामू किला आदिवासी दो दिवसीय जतरा मेला का हुआ शुभारंभ बड़ी संख्या में उमड़ा जनसैलाब।
  • वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने फीता काटकर किया उद्घाटन और राजकीय मेला घोषित करने का भरोसा दिलाया।
  • विधायक रामचंद्र सिंह ने कहा हम बोलते कम हैं और धरातल पर काम ज्यादा करते हैं।
  • पलामू किला के जीर्णोद्धार और औरंगा नदी पर पुल निर्माण की घोषणा हुई।
  • राष्ट्रीय चेरो जनजातीय महासंघ ने महाराजा मेदिनी राय को महापुरुष का दर्जा देने की मांग की।

बरवाडीह (लातेहार): ऐतिहासिक पलामू किला परिसर में बुधवार को आदिवासी दो दिवसीय जतरा मेला का शुभारंभ उत्साह और परंपरा के साथ हुआ। इस दौरान पलामू, लातेहार और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग मेले में पहुंचे। राष्ट्रीय चेरो जनजातीय महासंघ द्वारा आयोजित इस मेले ने क्षेत्र की संस्कृति, एकता और जनभावना का अनूठा संदेश दिया।

आदिवासी परंपरा और जनजुड़ाव का संगम

जतरा मेला की अध्यक्षता राष्ट्रीय चेरो जनजातीय महासंघ के प्रधान महासचिव सह मनिका विधायक रामचंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन राष्ट्रीय संयोजक अवधेश सिंह ने किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया।

राधा कृष्ण किशोर ने कहा: “यह जतरा मेला आदिवासी समाज की आत्मा का प्रतीक है। हमने इसे अगले वर्ष 2026 से राजकीय मेला घोषित करने का निर्णय लिया है। पलामू किला के जीर्णोद्धार और औरंगा नदी पर पुल निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होगा।”

मेला को मिला राजकीय दर्जे का वादा

इस अवसर पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आदिवासी संस्कृति और धरोहरों को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पलामू किला की ऐतिहासिकता और क्षेत्र के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में इसे राजकीय मेला के रूप में और भव्य बनाया जाएगा।

विधायक रामचंद्र सिंह ने कहा: “हम बोलते कम हैं और धरातल पर काम ज्यादा करते हैं। यह जतरा मेला हमारी वर्षों की मेहनत का परिणाम है। पलामू किला का जीर्णोद्धार और पुल निर्माण जैसे मुद्दे हमेशा हमारी प्राथमिकता रहे हैं।”

सामाजिक एकता और गौरव की मिसाल

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय चेरो जनजातीय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक हरिराम सिंह चेरो (दुद्धी, उत्तर प्रदेश) ने अपने संबोधन में महाराजा मेदिनी राय को महापुरुष का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी आदिवासी पहचान और संघर्ष की विरासत को जीवित रखने का प्रतीक है।

बंधन तिग्गा (आदिवासी धर्मगुरु) ने कहा: “समाज की शक्ति उसकी एकजुटता में है। हमें अपनी परंपरा और संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।”

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विभिन्न राज्यों से पहुंचे समाज प्रतिनिधि

इस अवसर पर राष्ट्रीय महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन सिंह, पूर्व प्रत्याशी अजय सिंह चेरो, राष्ट्रीय सलाहकार भरदूल कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी हृदया सिंह चेरो, प्रदेश सचिव मृतुंजय सिंह, उपाध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह, सहित कई पदाधिकारी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम में पलामू जिला संयोजक कामेश सिंह चेरो, लातेहार जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह, सहित कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।

हजारों लोगों की उपस्थिति से गूंजा पलामू किला परिसर

दो दिवसीय मेला के पहले दिन ही लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिला, पुरुष और बच्चे पारंपरिक परिधान में झूमते-गाते नजर आए। मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों ने माहौल को जीवंत बना दिया।
मेला समिति के संरक्षक आशुतोष कुमार सिंह चेरो, गणेश्वर सिंह, अध्यक्ष प्रदीप सिंह, अरविंद कुमार सिंह सहित वेलफेयर ट्राइबल सोसाइटी के कई पदाधिकारी आयोजन में सक्रिय रहे।

पलामू किला परिसर में उमड़ी श्रद्धा और गर्व की भावना

लोगों ने माना कि यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक चेतना और एकजुटता का उत्सव भी है। मेला स्थल पर लगे पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल, झूले और भोजनालयों में लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।

न्यूज़ देखो: परंपरा और पहचान का जीवंत प्रतीक बना जतरा मेला

यह जतरा मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि आदिवासी गौरव, एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुका है।
राजकीय दर्जे की घोषणा इस परंपरा को और सशक्त बनाएगी। पलामू किला का पुनरुद्धार और पुल निर्माण कार्य क्षेत्र के विकास में नई दिशा देगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परंपरा को सम्मान देना ही समाज की असली शक्ति

पलामू किला का जतरा मेला हमें यह सिखाता है कि संस्कृति तभी जीवित रहती है जब समाज उसे दिल से अपनाए।
आइए, हम सब इस परंपरा को आगे बढ़ाएं, अपने बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ें और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें।
सजग बनें, सहभागी बनें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और इस गौरवशाली आयोजन की भावना को आगे बढ़ाएं।

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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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