
#पांडू #पंचायत_प्रशासन : सेवानिवृत्ति पर पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सम्मान समारोह आयोजित किया।
पलामू जिले के पांडू प्रखंड अंतर्गत रत्नाग पंचायत में कार्यरत पंचायत सचिव सह बीपीआरओ नागेंद्र दुबे के सेवानिवृत्त होने पर विदाई सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधि, कर्मी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। समारोह में नागेंद्र दुबे के पारदर्शी, ईमानदार और जनसेवामूलक कार्यकाल की सराहना की गई। यह आयोजन पंचायत स्तर पर प्रशासनिक सेवा और मानवीय मूल्यों के सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आया।
- रत्नाग पंचायत, पांडू प्रखंड में आयोजित हुआ विदाई सह सम्मान समारोह।
- पंचायत सचिव सह बीपीआरओ नागेंद्र दुबे के सेवानिवृत्त होने पर कार्यक्रम।
- समारोह की अध्यक्षता मुखिया शशिभूषण पाल ने की।
- कार्यक्रम का संचालन आशुतोष सुमन द्वारा किया गया।
- पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मियों और ग्रामीणों की रही व्यापक उपस्थिति।
पलामू जिले के पांडू प्रखंड अंतर्गत रत्नाग पंचायत में शुक्रवार का दिन भावनाओं से भरा रहा, जब पंचायत सचिव सह बीपीआरओ नागेंद्र दुबे को उनके लंबे और अनुकरणीय सेवा कार्यकाल के बाद सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। पंचायत परिसर में आयोजित इस विदाई सह सम्मान समारोह में प्रशासनिक औपचारिकता से कहीं अधिक अपनापन और सम्मान का भाव देखने को मिला। कार्यक्रम में पंचायत से जुड़े लगभग सभी वर्गों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि नागेंद्र दुबे ने अपने कार्य से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है।
समारोह की शुरुआत और आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसके बाद पंचायत के मुखिया शशिभूषण पाल ने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया। उन्होंने नागेंद्र दुबे के कार्यकाल को पंचायत के लिए स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनहित को सर्वोपरि रखा। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष सुमन ने किया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सहज और भावनात्मक ढंग से आगे बढ़ाया।
समारोह का उद्देश्य केवल विदाई देना नहीं था, बल्कि उस प्रशासनिक सेवा को सम्मान देना था, जिसने वर्षों तक पंचायत और ग्रामीणों के बीच सेतु का काम किया।
जनसेवा और पारदर्शिता का उदाहरण
वक्ताओं ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव सह बीपीआरओ नागेंद्र दुबे ने अपने पूरे कार्यकाल में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता दी। विभिन्न सरकारी योजनाओं को कागजों से निकालकर ज़मीनी हकीकत में बदलने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।
मुखिया शशिभूषण पाल ने कहा:
शशिभूषण पाल ने कहा: “नागेंद्र दुबे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं थे, बल्कि ग्रामीणों के सुख-दुख में सहभागी बनकर कार्य करने वाले सच्चे जनसेवक रहे।”
उनका कहना था कि चाहे आवास योजना हो, मनरेगा हो या अन्य कल्याणकारी योजनाएं, नागेंद्र दुबे ने हमेशा समयबद्ध और निष्पक्ष ढंग से कार्य कराया।
पंचायत कर्मियों और सहायकों की प्रतिक्रिया
पंचायत सहायक और सचिवों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नागेंद्र दुबे के साथ काम करना सीखने का अवसर रहा। पंचायत सहायक ने उन्हें पंचायत विकास की मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में काम करना आसान और प्रेरणादायक रहा।
पंचायत सचिव जितेंद्र कुमार, विवेक कुमार और उमाकांत सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि नागेंद्र दुबे का व्यवहार हमेशा सहयोगात्मक रहा और उन्होंने कभी भी पद का अहंकार नहीं दिखाया।
सम्मान और विदाई का भावनात्मक क्षण
समारोह के दौरान पंचायत की ओर से शॉल, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिन्ह भेंट कर नागेंद्र दुबे को सम्मानित किया गया। यह क्षण पूरे कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक हिस्सा रहा, जब ग्रामीणों और कर्मियों ने तालियों के साथ उन्हें सम्मान दिया।
विदाई संबोधन में नागेंद्र दुबे स्वयं भावुक नजर आए। उन्होंने कहा:
नागेंद्र दुबे ने कहा: “रत्नाग पंचायत में बिताया गया समय मेरे जीवन की अमूल्य और अविस्मरणीय पूंजी रहेगा। मुझे जो स्नेह और सहयोग मिला, वह हमेशा मेरे साथ रहेगा।”
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा के दौरान लोगों का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग
इस अवसर पर पंचायत सचिव जितेंद्र कुमार, विवेक कुमार, उमाकांत सिंह, पंचायत सहायक सनोज कुमार, आशुतोष सुमन, जनक शर्मा, मनोरंजन गुप्ता, रोजगार सेवक यूनुस अंसारी, पंचायत समिति सदस्य बिनोद पासवान, वार्ड सदस्य इंदल तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेन्द्र पाल, परमानन्द पाल, रविन्द्र पासवान सहित सभी वार्ड सदस्य, सहायक कर्मी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि नागेंद्र दुबे का कार्यकाल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण है।
ग्रामीणों की भावनात्मक प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने बताया कि नागेंद्र दुबे ने कभी कार्यालय की दीवारों तक खुद को सीमित नहीं रखा। वे अक्सर गांव में जाकर समस्याएं सुनते और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाते थे। यही वजह है कि उनकी विदाई केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसी महसूस हुई।
न्यूज़ देखो: प्रशासनिक सेवा में मानवीय संवेदनाओं की मिसाल
रत्नाग पंचायत का यह विदाई समारोह बताता है कि जब प्रशासनिक अधिकारी सेवा को कर्तव्य नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझते हैं, तो उनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। नागेंद्र दुबे का कार्यकाल पारदर्शिता और जनविश्वास का उदाहरण है। सवाल यह है कि क्या आने वाले अधिकारी भी इस विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जब सेवा बन जाए पहचान, तब विदाई भी सम्मान बन जाती है
सरकारी सेवा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है।
नागेंद्र दुबे का कार्यकाल यह सिखाता है कि सरलता और ईमानदारी से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
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