
#पलामू #आंदोलन : यूजीसी कानून के खिलाफ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने पांडू में चक्का जाम का निर्णय लिया।
यूजीसी कानून के विरोध में पलामू जिले के पांडू प्रखंड में एक फरवरी को चक्का जाम किया जाएगा। यह निर्णय अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट पलामू के जिला मंत्री अंकित सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में कानून को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए नुकसानदेह बताते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाने पर सहमति बनी। आंदोलन को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क और पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है।
- यूजीसी कानून के विरोध में 1 फरवरी को पांडू में चक्का जाम।
- निर्णय अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट, पलामू की बैठक में लिया गया।
- 31 जनवरी शाम 4 बजे से दुकानदारों से जनसंपर्क अभियान।
- 1 जनवरी पूर्ण बंद के समर्थन में लोगों से सहयोग की अपील।
- बैठक की अध्यक्षता जिला मंत्री अंकित सिंह ने की।
पलामू जिले के पांडू प्रखंड में यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध तेज होता नजर आ रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट पलामू की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलनात्मक कदम उठाने पर चर्चा हुई। बैठक में मौजूद सदस्यों ने सर्वसम्मति से एक फरवरी को पांडू में चक्का जाम करने का निर्णय लिया। संगठन का कहना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
बैठक में लिया गया आंदोलन का निर्णय
बैठक की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट पलामू के जिला मंत्री अंकित सिंह ने कहा कि यूजीसी कानून को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष है। उन्होंने बताया कि इस कानून से शिक्षा का स्वरूप प्रभावित होगा और छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसी कारण संगठन ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी आंदोलन का रास्ता चुना है।
जनसंपर्क अभियान की बनाई गई रणनीति
बैठक में यह भी तय किया गया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए पहले चरण में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। 31 जनवरी की संध्या 4 बजे से संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पांडू क्षेत्र के सभी दुकानदारों और स्थानीय लोगों से संपर्क करेंगे। उन्हें 1 जनवरी के पूर्ण बंद और 1 फरवरी के चक्का जाम के समर्थन में सहयोग देने का आग्रह किया जाएगा।
चक्का जाम के जरिए सरकार तक संदेश
संगठन का कहना है कि चक्का जाम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य सरकार तक जनभावनाओं को पहुंचाना है। आंदोलन के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि यूजीसी कानून को लेकर आमजन और सामाजिक संगठन गंभीर आपत्ति रखते हैं। बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि जब तक कानून पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख लोग
इस बैठक में संगठन के कई सक्रिय सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। उपस्थित लोगों में सुनील पांडे, देवेंद्र पांडे, प्रिंस सिंह, दारा सिंह, मंटू सिंह, राजन कश्यप, हरिवंश सिंह, राज मोहन सिंह, अभिषेक सिंह, सुबी एन सिंह, विकास सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
संगठन का स्पष्ट रुख
बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी कानून के विरोध में यह आंदोलन केवल संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा और समाज के हित से जुड़ा मुद्दा है। संगठन ने आम नागरिकों, छात्रों और व्यापारियों से अपील की कि वे इस आंदोलन में सहयोग करें ताकि सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंच सके।
न्यूज़ देखो: शिक्षा नीति पर बढ़ता जनआंदोलन
यूजीसी कानून को लेकर पांडू में प्रस्तावित चक्का जाम यह दर्शाता है कि शिक्षा से जुड़े फैसलों पर अब स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। जनसंपर्क और पूर्ण बंद की रणनीति से यह साफ है कि संगठन आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाना चाहता है। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और सरकार इस विरोध को कैसे लेती है और क्या संवाद का रास्ता निकलता है। शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज की सक्रियता लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
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जागरूक समाज ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है
शिक्षा से जुड़े कानून सीधे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सवाल उठाना और संवाद करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पांडू में होने वाला यह आंदोलन जनभागीदारी का उदाहरण बन सकता है। अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज में जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।







