
#जरमुंडीदुमका #कृषिसुरक्षा : नकली कीटनाशकों पर रोक के लिए दुकानों में औचक निरीक्षण और सैंपल संग्रह।
दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले कीटनाशक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने विशेष अभियान चलाया। कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी शुभांकर गुप्ता के नेतृत्व में कीटनाशक दुकानों का औचक निरीक्षण कर नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों को गुणवत्ता जांच के लिए रांची स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा। अभियान का उद्देश्य नकली और घटिया दवाओं पर रोक लगाकर किसानों की फसल और मेहनत को सुरक्षित करना है।
- जरमुंडी प्रखंड के विभिन्न कीटनाशक दुकानों पर औचक निरीक्षण।
- कार्रवाई का नेतृत्व कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी शुभांकर गुप्ता ने किया।
- कीटनाशकों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए एकत्र किए गए।
- सैंपल रांची स्थित कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
- टीम में पौधा संरक्षण निरीक्षक, पर्यवेक्षक और क्षेत्र परिचालक शामिल रहे।
- मानक उल्लंघन पर विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी।
दुमका जिले में कृषि व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को सुरक्षित उत्पादन साधन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में बुधवार को जरमुंडी प्रखंड में कीटनाशक दुकानों पर औचक छापेमारी की गई। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि किसानों को जो कीटनाशक बेचे जा रहे हैं, वे गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हों। हाल के वर्षों में नकली और घटिया कीटनाशकों से फसल नुकसान की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिसे देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेष अभियान का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
जरमुंडी प्रखंड कृषि आधारित क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका खेती पर निर्भर रखते हैं। कीटनाशकों की गुणवत्ता सीधे तौर पर फसल की सुरक्षा और उत्पादन से जुड़ी होती है। नकली या अमानक दवाओं के उपयोग से न केवल फसल को नुकसान होता है, बल्कि किसानों की मेहनत और लागत भी व्यर्थ चली जाती है। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है, ताकि बाजार में उपलब्ध कृषि आदानों की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखा जा सके।
निरीक्षण और सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया
अभियान के दौरान जरमुंडी प्रखंड के विभिन्न कीटनाशक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने दुकानों में उपलब्ध कीटनाशकों की पैकेजिंग, लेबलिंग, वैधता अवधि और भंडारण की स्थिति की भी जांच की। संदेहास्पद या यादृच्छिक रूप से चुने गए कीटनाशकों के नमूने एकत्र किए गए, जिन्हें सीलबंद कर गुणवत्ता परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुसार की गई, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
जांच के लिए रांची भेजे जाएंगे नमूने
संग्रहित किए गए सभी नमूनों को रांची स्थित कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जाएगा। वहां वैज्ञानिक पद्धति से इनकी जांच की जाएगी, जिसमें सक्रिय तत्वों की मात्रा, प्रभावशीलता और सुरक्षा मानकों का परीक्षण होगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित कीटनाशक निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की टीम और प्रशासनिक निगरानी
इस अभियान में कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी के साथ-साथ पौधा संरक्षण निरीक्षक, पर्यवेक्षक और क्षेत्र परिचालक भी मौजूद रहे। टीम ने संयुक्त रूप से दुकानों का निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच की। अधिकारियों की मौजूदगी से दुकानदारों में नियमों के पालन को लेकर सतर्कता देखी गई। प्रशासन का स्पष्ट संदेश रहा कि किसानों के हित से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसानों के हित में सख्त संदेश
अभियान के दौरान कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी शुभांकर गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
शुभांकर गुप्ता ने कहा: “किसानों को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले कीटनाशक उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। नकली दवाओं से फसल सुरक्षा और किसानों की मेहनत बर्बाद न हो, इसके लिए यह अभियान जिले के सभी प्रखंडों में निरंतर जारी रहेगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि यदि जांच में किसी भी प्रकार का गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के प्रावधान शामिल हैं।
नकली कीटनाशकों से होने वाला नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नकली या अमानक कीटनाशकों के उपयोग से फसलों में रोग और कीट नियंत्रण प्रभावी नहीं हो पाता। इससे उत्पादन घटता है और किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है—एक तरफ फसल नुकसान और दूसरी तरफ आर्थिक क्षति। ऐसे में प्रशासन की यह पहल किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है और बाजार में भरोसेमंद उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकती है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल जरमुंडी तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में दुमका जिले के अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह की जांच और निरीक्षण किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पूरे जिले में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और किसानों को सुरक्षित खेती का माहौल प्रदान करना है।
न्यूज़ देखो: किसानों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम
जरमुंडी में की गई यह कार्रवाई बताती है कि प्रशासन अब नकली कीटनाशकों के मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। सैंपल कलेक्शन और लैब जांच जैसी प्रक्रिया से यह तय होगा कि बाजार में बिक रहे उत्पाद कितने भरोसेमंद हैं। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं और यह देखना अहम होगा कि दोषी पाए जाने वालों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित खेती से ही मजबूत होगा किसान
किसानों की मेहनत तभी सफल होगी, जब उन्हें सही और गुणवत्तापूर्ण संसाधन मिलें। नकली दवाओं के खिलाफ यह अभियान खेती को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।
अब जरूरत है कि किसान भी सजग रहें और संदिग्ध उत्पादों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं।
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