
#कोलेबिरा #शिक्षा_संवाद : विद्यालय और अभिभावकों के समन्वय से छात्रों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया गया।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड स्थित एसएस प्लस टू हाई स्कूल परिसर में अभिभावक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने अभिभावकों व विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। गोष्ठी का उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा बच्चों के शैक्षणिक और नैतिक विकास पर चर्चा करना रहा। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
- एसएस प्लस टू हाई स्कूल, कोलेबिरा में अभिभावक गोष्ठी का आयोजन।
- विधायक नमन विक्सल कोंगारी ने बच्चों की रुचि पहचानने पर दिया जोर।
- शिक्षकों ने पढ़ाई, अनुशासन और परीक्षा परिणाम पर जानकारी साझा की।
- अभिभावकों ने विद्यालय व्यवस्था और समस्याओं को रखा।
- विद्यालय प्रबंधन ने सुधार और सहयोग का भरोसा दिलाया।
सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत एसएस प्लस टू हाई स्कूल में आयोजित अभिभावक गोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाना तथा बच्चों के भविष्य को लेकर सामूहिक संवाद स्थापित करना था। इस अवसर पर कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगारी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।
विधायक ने बच्चों की रुचि पहचानने पर दिया जोर
मुख्य अतिथि विधायक नमन विक्सल कोंगारी ने अपने संबोधन में कहा कि हर बच्चे की अपनी अलग प्रतिभा और रुचि होती है, जिसे समय रहते पहचानना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की महत्वाकांक्षा और काबिलियत को समझें तथा उनकी रुचि के अनुसार उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
विधायक नमन विक्सल कोंगारी ने कहा:
“बच्चों की रुचि को पहचानकर, उनकी क्षमता के अनुसार मार्गदर्शन किया जाना चाहिए ताकि वे शिक्षा, खेल, नृत्य या संगीत किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़कर स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें।”
उन्होंने यह भी कहा कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं।
गोष्ठी का उद्देश्य और प्रमुख बिंदु
इस अभिभावक गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना था। साथ ही छात्रों के शैक्षणिक, नैतिक और सर्वांगीण विकास को लेकर खुली चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा की गई। उन्होंने विद्यालय की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
शिक्षकों ने साझा की शैक्षणिक जानकारी
गोष्ठी के दौरान विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों की पढ़ाई, नियमित उपस्थिति, अनुशासन और परीक्षा परिणामों की विस्तृत जानकारी अभिभावकों के साथ साझा की। शिक्षकों ने यह भी बताया कि बच्चों की प्रगति में नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और घर में सकारात्मक वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की पढ़ाई पर नियमित ध्यान दें और विद्यालय के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें।
अभिभावकों ने रखी अपनी बातें
अभिभावक गोष्ठी में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं और बच्चों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को खुलकर सामने रखा। कई अभिभावकों ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
विद्यालय प्रबंधन ने सभी सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधार किए जाने का आश्वासन दिया।
सहयोग और संकल्प के साथ हुआ समापन
गोष्ठी के अंत में विद्यालय प्रशासन की ओर से अभिभावकों से निरंतर सहयोग की अपील की गई। साथ ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि श्यामलाल प्रसाद, कोलेबिरा मुखिया अंजना लकड़ा सहित कई अभिभावक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में संवाद की मजबूत पहल
अभिभावक गोष्ठी जैसे आयोजन यह दर्शाते हैं कि शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। विधायक और विद्यालय प्रबंधन की उपस्थिति से यह संदेश गया कि बच्चों के भविष्य को लेकर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। ऐसे कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले समय में ऐसे संवाद और नियमित होने चाहिए।
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मिलकर संवारें बच्चों का भविष्य
बच्चों की प्रतिभा को पहचानना और सही दिशा देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विद्यालय और अभिभावक जब साथ चलते हैं, तभी शिक्षा सार्थक बनती है।
हर बच्चे के सपनों को पंख देने के लिए संवाद और सहयोग जरूरी है।










