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झामुमो के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष के पिता के निधन पर पार्टी नेताओं ने जताया शोक, परिजनों को दिया संबल

#बरवाडीह #शोक_संवेदना : झामुमो जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास ने पोखरी कलां पहुंचकर जताया दुःख, परिजनों को बंधाया ढांढस।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष अफ़जल अंसारी के पिता के निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। इस दुःखद अवसर पर झामुमो की जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास पोखरी कलां स्थित उनके आवास पर पहुंचीं। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस कठिन समय में धैर्य रखने का संबल दिया। पार्टी की ओर से इसे एक पारिवारिक क्षति बताते हुए साथ खड़े रहने का भरोसा दिया गया।

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  • झामुमो के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष अफ़जल अंसारी के पिता का निधन।
  • जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास ने पोखरी कलां पहुंचकर जताया शोक।
  • परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और संवेदना प्रकट की।
  • दुःख की घड़ी में झामुमो के साथ खड़े रहने का आश्वासन
  • क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर शोक की भावना।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पोखरी कलां गांव में उस समय शोक का माहौल व्याप्त हो गया, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष अफ़जल अंसारी के पिता के निधन की सूचना सामने आई। यह खबर मिलते ही न केवल उनके परिवार, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भी गहरा दुःख देखा गया।

इसी क्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास विशेष रूप से पोखरी कलां स्थित अफ़जल अंसारी के आवास पहुंचीं। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से भेंट कर दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

परिजनों से मिलकर जताया दुःख और संवेदना

जिला उपाध्यक्ष आरती देवी दास ने अफ़जल अंसारी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर इस अपूरणीय क्षति पर गहरा दुःख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि पिता का साया उठ जाना परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक क्षण होता है, जिसकी भरपाई किसी भी रूप में संभव नहीं है।

उन्होंने कहा:

आरती देवी दास ने कहा: “पूर्व प्रखंड अध्यक्ष अफ़जल अंसारी के इस दुःख की घड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा का पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है। पार्टी उनके परिवार के दुःख को अपना दुःख मानती है।”

उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय से उबरने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

पार्टी के प्रति समर्पण और पारिवारिक संबंधों की मिसाल

झारखंड मुक्ति मोर्चा में लंबे समय से सक्रिय रहे अफ़जल अंसारी का राजनीतिक और सामाजिक जीवन क्षेत्र में जाना-पहचाना रहा है। पार्टी के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत करने और जनसमस्याओं को उठाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके पिता के निधन को पार्टी ने केवल एक व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पारिवारिक क्षति के रूप में देखा।

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आरती देवी दास ने इस दौरान कहा कि झामुमो केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि संघर्ष और आपसी सहयोग से जुड़ा एक परिवार है। सुख-दुःख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना पार्टी की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है।

सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक

पूर्व प्रखंड अध्यक्ष के पिता के निधन की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता, पार्टी समर्थक और स्थानीय लोग भी शोक व्यक्त कर रहे हैं। पोखरी कलां और आसपास के गांवों में लोगों ने दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति से शोक संतप्त परिवार को मानसिक संबल मिलता है और उन्हें यह भरोसा मिलता है कि वे अकेले नहीं हैं।

झामुमो की परंपरा: दुःख में साथ, सुख में सहभागिता

झारखंड मुक्ति मोर्चा की पहचान केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पार्टी सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व देती रही है। किसी कार्यकर्ता या नेता के परिवार में दुःख की घड़ी आने पर पार्टी नेतृत्व का मौके पर पहुंचना इसी परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

आरती देवी दास की यह उपस्थिति भी इसी परंपरा को दर्शाती है, जहां संगठन अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मानवीय रिश्तों को प्राथमिकता देता है।

शोक की घड़ी में एकजुटता का संदेश

इस अवसर पर यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर दुःख के समय एकजुटता और सहानुभूति सबसे महत्वपूर्ण होती है। अफ़जल अंसारी के पिता के निधन पर विभिन्न वर्गों के लोगों द्वारा शोक व्यक्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक रिश्ते राजनीति से कहीं आगे होते हैं।

न्यूज़ देखो: संवेदना और साथ की राजनीति

बरवाडीह में यह घटना झारखंड की राजनीति में मानवीय पक्ष को उजागर करती है। दुःख की घड़ी में नेताओं की उपस्थिति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

दुःख में साथ ही असली ताकत

कठिन समय में किसी के साथ खड़ा होना सबसे बड़ा सहारा होता है। इस खबर पर अपनी संवेदना साझा करें, इसे आगे बढ़ाएं और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएं।

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