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पेसा कानून आदिवासी मूलवासी अधिकारों की ढाल: हटाने नहीं संशोधन की हो बात बोले मनिका विधायक रामचंद्र सिंह

#लातेहार #पेसा_कानून : आदिवासी मूलवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए पेसा कानून जरूरी संशोधन संभव हटाना जनविरोधी
  • पेसा कानून आदिवासी–मूलवासी समाज के अधिकारों की मजबूत सुरक्षा ढाल।
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा लागू किया गया साहसिक और दूरदर्शी निर्णय।
  • कानून हटाने की मांग को बताया भविष्य के साथ खिलवाड़
  • त्रुटि होने पर संवैधानिक संशोधन ही एकमात्र रास्ता।
  • ग्राम सभा को जल, जंगल, जमीन पर वास्तविक अधिकार।
  • भ्रामक प्रचार से बचने और सही जानकारी लेने की अपील।

लातेहार(झारखंड) में पेसा कानून को लेकर चल रहे विरोध और राजनीतिक बयानबाज़ी पर मनिका विधायक रामचंद्र सिंह ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को लातेहार सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पेसा कानून आदिवासी–मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है, न कि उसे हटाने के लिए। यदि किसी स्तर पर कोई कमी है, तो उसका समाधान संशोधन के माध्यम से किया जाना चाहिए।

हेमंत सोरेन का फैसला ऐतिहासिक

विधायक रामचंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पेसा कानून लागू करना झारखंड के इतिहास में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम है। इससे पहले किसी भी सरकार ने आदिवासी और मूलवासी समाज के अधिकारों को इतनी मजबूती से जमीन पर उतारने का साहस नहीं दिखाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण, आदिवासी और मूलवासी समाज के हित, अधिकार और सुरक्षा के लिए लाया गया है।

विरोध का अधिकार, लेकिन कानून खत्म करने की मांग गलत

विधायक ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर पेसा कानून को खत्म करने की मांग करना आदिवासी–मूलवासी समाज के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा,

“अगर पेसा कानून में कहीं कोई त्रुटि है, तो उसका संवैधानिक रास्ता संशोधन है, न कि कानून को हटाने की मांग।”

ग्राम सभा को मिलेगी असली ताकत

रामचंद्र सिंह ने बताया कि पेसा कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्राम सभा को सशक्त बनाना है। इस कानून के तहत गांवों के जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुनिश्चित होता है। ग्राम सभा की सहमति के बिना न तो जमीन अधिग्रहण संभव है और न ही खनन या अन्य बड़ी योजनाएं लागू की जा सकती हैं। इसके साथ ही वन उपज, बाजार और विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी तय की गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि पेसा कानून का विरोध करने वाले यह स्पष्ट करें कि उन्हें ग्राम सभा के मजबूत होने से परेशानी क्यों है।

राजनीति नहीं समाधान की जरूरत

विधायक ने कहा कि पेसा कानून को लेकर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी दल या संगठन को कानून की किसी धारा से आपत्ति है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि किस बिंदु पर संशोधन की आवश्यकता है। सरकार सुधार के लिए तैयार है, लेकिन केवल “पेसा हटाओ” का नारा समाधान नहीं हो सकता।

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भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील

रामचंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और लोग भोले-भाले आदिवासी–मूलवासी समाज को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और पेसा कानून की सही जानकारी लें, क्योंकि यह कानून उनके अधिकारों, सम्मान और स्वशासन की गारंटी है।

झारखंड के भविष्य की नींव

अंत में विधायक ने कहा कि पेसा कानून सिर्फ एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य की नींव है। इस पर स्वस्थ बहस, सुझाव और आवश्यक संशोधन होने चाहिए, लेकिन आदिवासी–मूलवासी हितों की रक्षा करने वाले इस कानून को खत्म करने की सोच पूरी तरह जनविरोधी है।

न्यूज़ देखो: अधिकार बनाम राजनीति

पेसा कानून को लेकर उठ रही बहस झारखंड की आत्मा से जुड़ा विषय है। यह कानून ग्राम सभा को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय करता है। ऐसे समय में भ्रम और राजनीति से ऊपर उठकर तथ्य और अधिकारों की बात जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आपकी राय जरूरी है

क्या पेसा कानून से ग्राम सभा और आदिवासी अधिकार मजबूत होंगे?
क्या संशोधन के जरिए समस्याओं का समाधान संभव है?
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Akram Ansari

बरवाडीह, लातेहार

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