
#गुमला #उग्रवाद_सर्चऑपरेशन : सिसई-बसिया सीमा पर पुलिस ने चलाया अभियान।
गुमला जिले के सिसई और बसिया थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित ओकबा जंगल में पीएलएफआई उग्रवादियों की मौजूदगी की सूचना पर पुलिस ने व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस के पहुंचने से पहले ही संदिग्ध उग्रवादी जंगल का लाभ उठाकर फरार हो गए। क्षेत्र में हाल के दिनों में संगठन की गतिविधियों की चर्चा से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। गश्त और छापेमारी अभियान जारी है।
- ओकबा जंगल, सिसई-बसिया सीमा पर उग्रवादियों की सूचना।
- पीएलएफआई के सदस्य पुलिस पहुंचने से पहले फरार।
- लेवी वसूली और दबदबा कायम करने की आशंका।
- बसिया व सिसई थाना पुलिस द्वारा सघन सर्च अभियान।
- संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी जारी।
गुमला जिले में एक बार फिर उग्रवादी गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सिसई और बसिया थाना क्षेत्र की सीमावर्ती ओकबा जंगल में पीएलएफआई उग्रवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही पुलिस ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही उग्रवादी जंगल की आड़ लेकर फरार हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और गश्त को तेज कर दिया गया है।
सीमावर्ती ओकबा जंगल बना गतिविधियों का केंद्र
सिसई और बसिया बॉर्डर पर स्थित ओकबा जंगल भौगोलिक दृष्टि से घना और दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। यही कारण है कि पूर्व में भी उग्रवादी संगठन इस इलाके को अस्थायी ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में यहां संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को मिल रही थी, जिसके बाद अभियान चलाया गया।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संगठन क्षेत्र में फिर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। कई वर्षों से कमजोर पड़ चुका पीएलएफआई अब छोटे-छोटे दस्तों में सक्रिय होकर गांवों में आवाजाही कर रहा है।
लेवी वसूली की आशंका, ग्रामीणों में चिंता
सूत्र बताते हैं कि उग्रवादियों का उद्देश्य क्षेत्र में विकास योजनाओं से लेवी (रंगदारी) वसूलना और ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बनाना हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस दस्ते में कुछ ऐसे सदस्य भी शामिल हैं, जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं।
उग्रवादी छोटे समूह बनाकर गांवों में घूम रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में आशंका और चिंता का माहौल है। हालांकि इस संबंध में पुलिस ने आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
पुलिस की रणनीति और कार्रवाई
बसिया और सिसई थाने की पुलिस संयुक्त रूप से क्षेत्र में गश्त कर रही है। संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। जंगल से सटे गांवों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित आपराधिक या उग्रवादी गतिविधि को समय रहते रोकना है।
अधिकारियों का कहना है कि इलाके में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
क्षेत्र में बढ़ी सतर्कता
कई वर्षों के बाद ओकबा इलाके में इस तरह की हलचल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की मुठभेड़ या बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस का प्रयास है कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए और आम लोगों के बीच भय का वातावरण न बने। क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
न्यूज़ देखो: उग्रवाद पर सतर्कता ही सबसे बड़ा जवाब
ओकबा जंगल की घटना यह संकेत देती है कि कमजोर पड़ चुके उग्रवादी संगठन अवसर की तलाश में हैं। ऐसे में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सर्च ऑपरेशन सराहनीय है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। जरूरी है कि खुफिया तंत्र और जनसहयोग के माध्यम से ऐसी गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लगाया जाए। विकास और सुरक्षा साथ-साथ चलें, यही क्षेत्र के हित में है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
डर नहीं, जागरूकता और सहयोग है असली ताकत
उग्रवाद जैसी चुनौतियों से निपटने में प्रशासन के साथ समाज की भूमिका भी अहम होती है। यदि हम सतर्क रहें, अफवाहों से बचें और सही जानकारी समय पर साझा करें, तो किसी भी असामाजिक तत्व की योजना सफल नहीं हो सकती। अपने क्षेत्र की सुरक्षा में सहभागी बनें। अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और जागरूकता फैलाने में योगदान दें।







