
#झारखंड #निकाय_चुनाव : मइयाँ योजना लोन खबर को आचार संहिता उल्लंघन बताकर भाजपा ने आयोग से कार्रवाई की मांग की।
निकाय चुनाव की घोषणा के बाद मइयाँ योजना के तहत बिना गारंटी 20 हजार रुपये तक लोन देने की खबर प्रकाशित होने पर भाजपा ने आपत्ति जताई है। सुधीर श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई। भाजपा का आरोप है कि यह खबर आदर्श आचार संहिता के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से प्रकाशित कराई गई। आयोग ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
- सुधीर श्रीवास्तव के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल आयोग पहुंचा।
- मइयाँ योजना के तहत 20 हजार रुपये लोन की खबर पर आपत्ति।
- आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, जांच की मांग।
- आयोग ने शिकायत पर जांच का आश्वासन दिया।
- प्रतिनिधिमंडल में अशोक बड़ाईक और सीमा सिंह शामिल।
निकाय चुनाव के दौरान मइयाँ योजना से जुड़ी लोन खबर को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। भाजपा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का आरोप है कि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार के इशारे पर प्रमुख अखबारों में इस तरह की खबर प्रकाशित कराई गई, जिससे चुनाव प्रभावित हो सकता है।
आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
भाजपा नेता सुधीर श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयोग पहुंचा और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया है कि राज्य में निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है, लेकिन सरकार इसे मानने को तैयार नहीं दिख रही।
सुधीर श्रीवास्तव ने कहा:
“निकाय चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद मइयाँ योजना के तहत बिना गारंटी 20 हजार रुपये तक लोन देने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित कराई गई। यह मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस चुनाव को मइयाँ योजना से जोड़कर लाभुकों को प्रलोभन देना चाहती है।
खबर के पीछे जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की मांग
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से यह मांग की कि इस खबर के प्रकाशन के पीछे कौन अधिकारी या पदाधिकारी जिम्मेदार है, इसकी जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि आचार संहिता के दौरान सरकारी योजनाओं को इस तरह प्रचारित किया जाता है, तो यह निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।
दलीय आधार पर चुनाव नहीं कराने पर भी उठाया सवाल
सुधीर श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि भाजपा लगातार मांग करती रही कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराए जाएं, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना। उनका आरोप है कि अब गैर-दलीय चुनाव के बावजूद सरकार अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
आयोग ने दिया जांच का आश्वासन
ज्ञापन सौंपने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। आयोग की ओर से कहा गया कि शिकायत की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल में अशोक बड़ाईक और सीमा सिंह भी शामिल थे, जिन्होंने आयोग से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की।

न्यूज़ देखो: चुनावी निष्पक्षता पर उठे सवाल
निकाय चुनाव के दौरान सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबरों का प्रकाशन हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। भाजपा की शिकायत यह संकेत देती है कि चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक दल सतर्क हैं। अब निगाहें निर्वाचन आयोग की जांच पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में कोई आचार संहिता उल्लंघन पाया जाता है। निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा सर्वोपरि है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए सजग रहें
चुनाव सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि विश्वास की प्रक्रिया है।
जरूरी है कि सभी दल और सरकारें आचार संहिता का सम्मान करें।
मतदाता जागरूक रहेंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा।
आपका एक वोट भविष्य की दिशा तय करता है।
क्या आपको लगता है कि चुनाव के दौरान योजनाओं का प्रचार सीमित होना चाहिए?
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