सिमडेगा में सरहुल पर्व की तैयारी तेज, आदिवासी लोहरा समाज की बैठक में बनी आयोजन की रूपरेखा

सिमडेगा में सरहुल पर्व की तैयारी तेज, आदिवासी लोहरा समाज की बैठक में बनी आयोजन की रूपरेखा

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #सरहुल #लोहरासमाज : अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में हुई बैठक, पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाने पर सहमति

सिमडेगा में आगामी सरहुल पर्व की तैयारी को लेकर आदिवासी लोहरा समाज जिला इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में हुई इस बैठक में पर्व को धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाने को लेकर चर्चा की गई। समाज के पदाधिकारियों ने आयोजन की रूपरेखा तय करते हुए लोगों से सरहुल पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

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  • अल्बर्ट एक्का स्टेडियम, सिमडेगा में आदिवासी लोहरा समाज की बैठक आयोजित।
  • बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष वासुदेव तिर्की ने की।
  • सरहुल पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाने पर चर्चा।
  • आयोजन की तैयारी और जिम्मेदारियों को लेकर समाज के पदाधिकारियों को दिए निर्देश
  • समाज के लोगों से सरहुल पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील

सिमडेगा जिले में आने वाले पारंपरिक आदिवासी पर्व सरहुल को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में आदिवासी लोहरा समाज जिला इकाई सिमडेगा की एक महत्वपूर्ण बैठक शहर के अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष वासुदेव तिर्की ने की। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने आगामी सरहुल पर्व को धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की।

पर्व की तैयारी और आयोजन पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान सरहुल पर्व के आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई। समाज के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि सरहुल पर्व को पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाए।

इसके साथ ही आयोजन के दौरान विभिन्न जिम्मेदारियों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया और समाज के पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि सरहुल पर्व के दौरान समाज के सभी सदस्य एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करेंगे।

पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान

बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पर्व के माध्यम से प्रकृति के प्रति आस्था और सामुदायिक एकता का संदेश दिया जाता है।

उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे सरहुल पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपनी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

कई पदाधिकारी बैठक में रहे मौजूद

इस बैठक में समाज के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। इनमें जिला संगठन सचिव सह कोलेबिरा प्रखंड अध्यक्ष मुनेश्वर तिर्की, ठेठईटांगर प्रखंड अध्यक्ष कालू इंदवार, जलडेगा प्रखंड अध्यक्ष आशीष इंदवार, पाकरटांड़ प्रखंड अध्यक्ष, जिला कोषाध्यक्ष साधू लोहरा तथा जिला उपाध्यक्ष बसंत लोहरा शामिल थे।

सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में सरहुल पर्व को उत्साह और परंपरा के साथ मनाने का संकल्प लिया।

न्यूज़ देखो: सरहुल आदिवासी संस्कृति का प्रतीक

सरहुल पर्व आदिवासी समाज के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व प्रकृति, पेड़-पौधों और धरती के प्रति आस्था और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

ऐसे आयोजनों और बैठकों के माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करता है।

संस्कृति और परंपरा से जुड़ाव ही समाज की पहचान

अपने पारंपरिक त्योहारों और संस्कृति को सहेजकर रखना समाज की बड़ी जिम्मेदारी है। सरहुल जैसे पर्व लोगों को प्रकृति से जुड़ने और सामुदायिक एकता का संदेश देते हैं।

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Written by

सिमडेगा

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