
#गढ़वा #निजीअस्पताललूट : सदर अस्पताल से दलाल ने फंसाया, न्यू सिटी हॉस्पिटल में बच्चे के नाम पर वसूली—बकाया के नाम पर नवजात रोकने का आरोप
- धुरकी थाना क्षेत्र के कटहल कला गांव की गरीब महिला रीना देवी का मामला
- प्रसव के बाद सदर अस्पताल से दलाल के जरिए निजी अस्पताल भेजे जाने का आरोप
- न्यू सिटी हॉस्पिटल में बच्चे की बीमारी बताकर भर्ती
- अलग-अलग किस्तों में 1 लाख 15 हजार रुपये की मांग
- पूरा भुगतान नहीं होने पर नवजात सौंपने से इनकार का आरोप
- सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी ने जांच व कार्रवाई का आश्वासन दिया
गरीब मरीज और निजी अस्पतालों का खतरनाक गठजोड़
गढ़वा जिला में एक बार फिर निजी अस्पतालों और कथित दलालों के गठजोड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस बार शिकार बनी हैं धुरकी थाना क्षेत्र के कटहल कला गांव की गरीब महिला रीना देवी, जिनके साथ प्रसव के बाद इलाज के नाम पर 1 लाख 15 हजार रुपये की कथित वसूली का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सदर अस्पताल से दलाल के जाल में फंसी महिला
जानकारी के अनुसार रीना देवी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद वह इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल पहुंची, जहां कथित तौर पर एक महिला दलाल ने उन्हें अपने झांसे में ले लिया। परिजनों का आरोप है कि दलाल ने सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज नहीं होने का डर दिखाकर निजी अस्पताल में इलाज कराने का प्रलोभन दिया।
न्यू सिटी हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती
दलाल के कहने पर महिला और उसके परिजन 18 जनवरी को द न्यू सिटी हॉस्पिटल पहुंचे, जहां नवजात बच्चे को विभिन्न तरह की बीमारियों का हवाला देकर भर्ती कर लिया गया। परिजनों का कहना है कि शुरुआत में स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन धीरे-धीरे खर्च का बोझ बढ़ता चला गया।
किस्तों में वसूली, फिर भी नहीं मिला बच्चा
पीड़ित परिवार के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने पहले 5 हजार रुपये, फिर 40 हजार रुपये जमा करने को कहा। परिजनों ने किसी तरह पैसे की व्यवस्था कर भुगतान किया। इसके बाद 3 फरवरी को अस्पताल के चिकित्सक डॉ भास्कर द्वारा बच्चे को डिस्चार्ज करने की बात कही गई।
लेकिन डिस्चार्ज के समय परिजनों से 72 हजार रुपये और जमा करने को कहा गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजन केवल 36 हजार रुपये ही जुटा सके, जिसे उन्होंने अस्पताल में जमा करा दिया।
भुगतान अधूरा, नवजात देने से इनकार का आरोप
परिजनों का आरोप है कि आंशिक भुगतान के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने नवजात बच्चे को सौंपने से इनकार कर दिया और कहा कि पहले पूरी राशि जमा की जाए, तभी बच्चा दिया जाएगा। इस घटना से परिवार पूरी तरह टूट गया और अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई
मामले को लेकर जब न्यू सिटी हॉस्पिटल प्रबंधन से संपर्क किया गया तो अस्पताल से जुड़े वकील ने कहा कि उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मरीज के परिजनों को किसी तरह की परेशानी है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
सिविल सर्जन का कड़ा रुख
इस पूरे मामले पर गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी ने गंभीरता दिखाते हुए कहा कि यदि निजी अस्पताल द्वारा इस तरह की घटना सामने आती है तो मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि सदर अस्पताल परिसर में दलालों की गतिविधियां बढ़ी हैं तो उन्हें चिन्हित कर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी ने कहा: “अगर निजी अस्पताल द्वारा मरीज के साथ गलत किया गया है तो इसकी जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। दलालों पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
बेहतर इलाज के लिए भेजा गया हायर सेंटर
सिविल सर्जन ने बताया कि पीड़ित परिवार को एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराकर बच्चे को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया है, ताकि नवजात के स्वास्थ्य से किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में दलालों की मौजूदगी, निजी अस्पतालों की मनमानी और गरीब मरीजों के शोषण की भयावह तस्वीर भी पेश करता है। ऐसे मामलों से आम जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।
न्यूज़ देखो: गरीब मरीजों के शोषण पर बड़ा सवाल
गढ़वा में सामने आया यह मामला बताता है कि किस तरह दलाल और निजी अस्पताल मिलकर गरीब परिवारों को निशाना बना रहे हैं। न्यूज़ देखो इस तरह के मामलों को उजागर कर प्रशासन से जवाबदेही की मांग करता रहेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज
सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते समय सतर्क रहें, दलालों से दूर रहें और किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत तुरंत प्रशासन से करें। इस खबर पर अपनी राय कमेंट में साझा करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और अपने परिचितों को भी जागरूक करें।







