बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन तेज, पूर्व विधायकों ने मजदूरों के समर्थन में भरी हुंकार

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन तेज, पूर्व विधायकों ने मजदूरों के समर्थन में भरी हुंकार

author News देखो Team
10 Views
#गिरिडीह #मजदूर_आंदोलन : 13 दिनों से जारी धरना के बीच गेट जाम और बड़े आंदोलन की चेतावनी।

गिरिडीह के टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने भाकपा माले और असंगठित मजदूर मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। मजदूरों की छंटनी, शोषण, प्रदूषण और स्थानीय लोगों की उपेक्षा के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 14वें दिन पूर्व विधायक विनोद सिंह और राजकुमार यादव भी धरना स्थल पहुंचे। नेताओं ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

Join WhatsApp
  • बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ 14वें दिन भी जारी रहा धरना।
  • पूर्व विधायक विनोद सिंह और राजकुमार यादव पहुंचे धरना स्थल।
  • मजदूरों की छंटनी और शोषण का लगाया गया आरोप।
  • प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर की वार्ता की कोशिश।
  • आंदोलनकारियों ने गेट जाम और चक्का जाम की चेतावनी दी।
  • बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और मजदूर संगठन के कार्यकर्ता रहे मौजूद।

गिरिडीह के टुंडी रोड स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री के सामने असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन लोकतांत्रिक धरना लगातार तेज होता जा रहा है। 13 मई से शुरू हुए आंदोलन के 14वें दिन भी मजदूर संगठनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर मजदूरों का शोषण करने और स्थानीय लोगों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। आंदोलन में शामिल नेताओं ने कहा कि यदि मजदूरों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

प्रशासन की वार्ता रही बेनतीजा

धरना स्थल पर अंचल अधिकारी जितेंद्र प्रसाद, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो, श्रम विभाग के प्रतिनिधि समेत कई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और वार्ता कराने का प्रयास किया। हालांकि आंदोलनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मौजूद प्रतिनिधि वार्ता बीच में छोड़कर चले गए।

धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिकों तक सही जानकारी नहीं पहुंचाई जा रही और प्रबंधन मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।

पूर्व विधायकों ने बढ़ाया आंदोलनकारियों का हौसला

धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व विधायक राजकुमार यादव और विनोद सिंह ने मजदूरों और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।

राजकुमार यादव ने कहा: “प्रदूषण, खेतों की बर्बादी और मजदूरों के शोषण जैसे मुद्दे पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर हैं। यदि बात नहीं मानी गई तो आंदोलन पूरे गिरिडीह में फैल सकता है।”

उन्होंने कहा कि मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी है।

विनोद सिंह ने कहा: “हम उद्योगों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार देने और नियमों का पालन करना जरूरी है। यदि प्रबंधन आंदोलन को कमजोर समझ रहा है तो यह उसकी भूल है।”

उन्होंने कहा कि मजदूरों के हक की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

स्थानीय मजदूरों की अनदेखी का आरोप

आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार उद्योगों में स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा।

मजदूर नेताओं ने आरोप लगाया कि मजदूरों से तय समय से अधिक काम लिया जा रहा है और बिना नियम-कानून के उन्हें हटाया जा रहा है।

कन्हाई पांडेय ने कहा: “मजदूरों का हक किसी भी कीमत पर नहीं मारने देंगे। आंदोलन लगातार जारी रहेगा।”

प्रदूषण और पर्यावरण को लेकर भी उठे सवाल

धरना स्थल पर नेताओं ने फैक्ट्री पर प्रदूषण फैलाने और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए। नेताओं का कहना है कि आसपास के खेतों और जल स्रोतों पर इसका असर पड़ रहा है।

पूरन महतो ने कहा: “बालमुकुंद फैक्ट्री की मनमानी नहीं चलेगी। मजदूरों और किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

माले नेता राजेश सिन्हा ने भी औद्योगिक क्षेत्र की जनता से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जायजा

धरना स्थल पर अनुमंडल अधिकारी धीरेन्द्र कुमार, अंचल अधिकारी जितेंद्र प्रसाद, एसडीपीओ जितवाहन उरांव, मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी राजेश कुमार समेत कई अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया।

प्रशासनिक टीम ने फैक्ट्री परिसर के अंदर जाकर मजदूरों से भी बातचीत की और माहौल की जानकारी ली।

हजारों महिला-पुरुष रहे शामिल

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर, ग्रामीण और महिला-पुरुष मौजूद रहे। कार्यक्रम में कन्हैया पाण्डेय, किशोर राय, हुबलाल राय, दीपक गोस्वामी, सुनील ठाकुर, मधुसूदन कोल, तुलसी तुरी, नबीन पाण्डेय, पवन यादव, भिखारी राय, दिलचंद कोल, अरबिंद टुडू, भीम कोल, मोहन कोल, बाबूलाल बास्की, राजन तुरी, प्रसादी राय, निमिया देवी, पार्वती देवी, सरिता देवी, ललिता देवी, जसमी देवी, सोनी देवी, करनी देवी, नौशाद आलम, तबारक चुन्नू, एकराम और मजहर समेत हजारों लोग शामिल हुए।

आंदोलनकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

न्यूज़ देखो: मजदूर आंदोलन अब जिले का बड़ा जनमुद्दा बनता दिख रहा

बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब केवल पांच मजदूरों की बहाली तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें स्थानीय रोजगार, श्रम अधिकार, प्रदूषण और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे कई मुद्दे जुड़ चुके हैं। पूर्व विधायकों और विभिन्न संगठनों के खुलकर समर्थन में आने से आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की लड़ाई में जागरूकता और एकजुटता सबसे बड़ी ताकत

जब मजदूर, किसान और आम लोग अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाते हैं, तभी बदलाव की शुरुआत होती है। लोकतांत्रिक आंदोलन समाज को अपनी समस्याओं और जरूरतों को सामने रखने का अवसर देते हैं।

संवाद और न्यायपूर्ण समाधान किसी भी विवाद का सबसे बेहतर रास्ता होता है। समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि जनहित और विकास के बीच संतुलन बनाए रखें।

आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय कमेंट में साझा करें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और मजदूर अधिकार तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

🗣️ Join the Conversation!

What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

🔔

Notification Preferences

error: