
#हुसैनाबाद #पलामू #शिक्षाआंदोलन : यूजीसी के नए नियमों को शिक्षा और सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए नागरिकों ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों के विरोध में हुसैनाबाद में मंगलवार को व्यापक जनआंदोलन देखने को मिला। पूर्वाह्न 10 बजे अंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए। आंदोलन का नेतृत्व प्रेमतोष कुमार सिंह ‘गुड्डू’ ने किया, जहां नियमों को शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए खतरा बताया गया। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा गया, जिससे आंदोलन की गंभीरता स्पष्ट हुई।
- यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अंबेडकर चौक पर जोरदार विरोध।
- प्रेमतोष कुमार सिंह ‘गुड्डू’ के नेतृत्व में हुआ आंदोलन।
- पूर्वाह्न 10 बजे बड़ी संख्या में जुटे लोग।
- राज्यपाल के नाम ज्ञापन अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा गया।
- शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक न्याय को खतरा बताया गया।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रही असंतोष की लहर अब हुसैनाबाद तक पहुंच गई है। मंगलवार को पलामू जिले के हुसैनाबाद में नागरिकों, छात्र-युवाओं और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर इन नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। अंबेडकर चौक पर आयोजित इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही, जिससे क्षेत्र में जनआक्रोश का स्पष्ट संदेश गया।
अंबेडकर चौक बना जनआंदोलन का केंद्र
पूर्वाह्न 10 बजे से ही हुसैनाबाद का अंबेडकर चौक आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और आम नागरिकों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रेमतोष कुमार सिंह ‘गुड्डू’ ने किया, जिन्होंने मंच से यूजीसी के नए नियमों को शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला बताया।
वक्ताओं ने कहा कि ये नियम उच्च शिक्षा को सीमित और महंगी बनाकर आम जनता की पहुंच से दूर करने की साजिश हैं। उनका आरोप था कि इससे विशेष रूप से गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और सीमित हो जाएंगे।
शिक्षा और सामाजिक न्याय पर खतरे का आरोप
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूजीसी के नए नियम संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था के विपरीत हैं। उनका कहना था कि इन नियमों के लागू होने से शिक्षा का निजीकरण और केंद्रीकरण बढ़ेगा, जिससे समान अवसर की अवधारणा कमजोर होगी।
प्रेमतोष कुमार सिंह ‘गुड्डू’ ने कहा: “यूजीसी के नए नियम शिक्षा को कुछ गिने-चुने वर्गों तक सीमित करने की कोशिश हैं। इससे गरीब और वंचित छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। हम संविधान और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं।”
वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बिना व्यापक विमर्श और जनसंवाद के ऐसे महत्वपूर्ण नियम लागू कर रही है, जिससे समाज में असंतोष और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
ज्ञापन सौंपकर सरकार को चेतावनी
प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल अनुमंडल पदाधिकारी के पास पहुंचा और राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से यूजीसी के नए नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों से संवाद आवश्यक है।
छात्र-युवाओं और सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी
इस विरोध-प्रदर्शन में छात्र-युवा, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। पूरे आंदोलन के दौरान अंबेडकर चौक नारेबाजी और जनआक्रोश से गूंजता रहा। प्रदर्शनकारियों ने “संविधान बचाओ”, “शिक्षा बचाओ”, और “यूजीसी नियम वापस लो” जैसे नारे लगाए।
कई वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम है, और इससे छेड़छाड़ किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर शिक्षा और संविधान की मूल भावना की रक्षा का संकल्प लिया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने शीघ्र यूजीसी के नए नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल हुसैनाबाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य और देश स्तर पर और तेज किया जाएगा।
न्यूज़ देखो: शिक्षा नीति पर बढ़ता जनसंघर्ष
हुसैनाबाद का यह विरोध-प्रदर्शन बताता है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में गंभीर असंतोष है। शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सरकार की पारदर्शिता और संवाद की कमी सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन विरोधों को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या कोई संतुलित समाधान निकलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा और संविधान की रक्षा में जागरूक नागरिक ही असली ताकत
शिक्षा का अधिकार हर नागरिक का मूल अधिकार है।
संविधान के मूल्यों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
ऐसे जनआंदोलन लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखते हैं।
आप भी शिक्षा और सामाजिक न्याय के पक्ष में सजग रहें।
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